मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
18:54 IST

अजय देवगण की दृश्यम 3 रिलीज, विजय साळगावकर के आखिरी दांव में सस्पेंस कायम

अजय देवगण की फिल्म दृश्यम: द कन्क्लूजन 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई। इसमें विजय साळगावकर के सामने जयदीप अहलावत के राजवीर तोमर हैं।

अजय देवगण की दृश्यम 3 रिलीज, विजय साळगावकर के आखिरी दांव में सस्पेंस कायम
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अजय देवगण की 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में आई है। यह दृश्यम फ्रेंचाइजी का तीसरा और आखिरी भाग है। फिल्म में विजय साळगावकर का आखिरी खेल दिखाया गया है।

इस बार विजय के सामने जयदीप अहलावत हैं, जो राजवीर तोमर नाम के तेज और आक्रामक पुलिस अफसर बने हैं। राजवीर के पास कुछ नए सबूत हैं और इन्हीं के सहारे वे विजय को कानून के फंदे में फंसाना चाहते हैं। इसी से एक बार फिर विजय बनाम पुलिस की दिमागी बाजी शुरू होती है। फिल्म का बड़ा हिस्सा इसी टकराव के इर्द-गिर्द घूमता है और दर्शकों में आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है। तब्बू, श्रिया सरन और प्रकाश राज भी अहम भूमिकाओं में हैं।

फिल्म देखते हुए सबसे पहले यह बात महसूस होती है कि मेकर्स ने पहले दो भागों की पहचान बना सस्पेंस और विजय की चालें बरकरार रखी हैं। अजय देवगण ने विजय के किरदार में फिर संयमित एक्टिंग की है। चेहरे पर शांत भाव, नाप-तौलकर बोलने का अंदाज और मुसीबत में हालात संभालने का तरीका इस रोल को अलग ताकत देते हैं। जयदीप अहलावत विजय के बिल्कुल उलट खड़े होते हैं और उनका आक्रामक अंदाज कहानी को जरूरी तनाव देता है। तब्बू और प्रकाश राज का काम भी कहानी को वजन देता है।

फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसके ट्विस्ट, जांच और क्लाइमैक्स की तरफ बढ़ती उत्सुकता है। समीक्षकों की प्रतिक्रियाओं में भी खासकर आखिरी हिस्से के तनाव और क्लाइमैक्स का जिक्र आया है। हालांकि हर चीज परफेक्ट है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। कुछ समीक्षकों के मुताबिक पहले हिस्से की रफ्तार थोड़ी धीमी है। दूसरे भाग के बाद फिल्म फिर उसी तरह के अपराध, पुलिस और चतुराई के खेल पर लौटती है, इसलिए कुछ जगह पुराना फॉर्मूला महसूस होता है। कुछ समीक्षाओं में यह भी कहा गया है कि आखिरी हिस्सा असरदार होने के बावजूद थोड़ा खिंचा हुआ लग सकता है।

तो फिल्म क्यों देखी जाए? जिन्हें पहले दो भागों में विजय साळगावकर की कहानी पसंद आई थी, उनके लिए इस कहानी का अंत पर्दे पर देखने का मौका सबसे बड़ी वजह है। सस्पेंस, जांच, सबूतों का खेल, पुलिस की रणनीति और आखिर तक सवाल बनाए रखने वाली कहानी फिल्म का मुख्य आकर्षण है। खासकर अजय देवगण और जयदीप अहलावत की टक्कर फिल्म को दम देती है।

दूसरी तरफ, अगर आप पहले दो 'दृश्यम' फिल्मों की तरह बिल्कुल नया आइडिया या लगातार तेज रफ्तार कहानी चाहते हैं, तो कुछ हिस्सों में फॉर्मूला जाना-पहचाना लग सकता है। पहले हिस्से की अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार और कुछ जगह महसूस होने वाली लंबाई फिल्म न देखने की वजह भी बन सकती है।

कुल मिलाकर, 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' उन दर्शकों के लिए बनी फिल्म है जो बड़े पर्दे पर सस्पेंस थ्रिलर का अनुभव लेना चाहते हैं और विजय साळगावकर की आखिरी कहानी जानना चाहते हैं। यह फिल्म पहले दो भागों से अलग प्रयोग करने के बजाय उसी दुनिया की कहानी को आगे बढ़ाती है और आखिर में विजय की चाल को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश करती है। इसलिए इसे मुख्य रूप से कहानी, ट्विस्ट और क्लाइमैक्स के लिए देखा जा सकता है। पहले दो भागों से तुलना करते वक्त उम्मीदें काबू में रखना ठीक रहेगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे