AI पर लगाम को लेकर दुनिया एकजुट, ट्रम्प का ग्लोबल निगरानी प्लान से इनकार
20 देशों और यूरोपियन यूनियन ने AI पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी की मांग की, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नए नियम लादने का विरोध किया।
दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की तेजी से बढ़ती ताकत को लेकर बहस तेज हो गई है। AI पर कंट्रोल, सेफ्टी और इंटरनेशनल नियमों की चर्चा जोरों पर है, मगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने AI को लेकर बनाई जा रही किसी नई ग्लोबल कंट्रोल सिस्टम का साफ विरोध कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र की महासभा के दौरान यह मुद्दा फिर से सामने आया, जहां AI के भविष्य को लेकर अमेरिका और बाकी देशों के बीच अलग-अलग नजरिया दिखाई दिया।
जर्मनी, कनाडा, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूएई समेत 20 देशों और यूरोपियन यूनियन ने मिलकर मांग रखी है कि AI हमेशा इंसानों के कंट्रोल में रहे, और इसके लिए इंटरनेशनल सहयोग बढ़ाया जाए। इन देशों ने AI के लिए एक जैसे सेफ्टी स्टैंडर्ड बनाने, कोई बड़ी घटना होने पर उसकी जानकारी आपस में शेयर करने, और आगे चलकर किसी इंटरनेशनल संस्था के जरिए निगरानी रखने का प्रस्ताव रखा है।
दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रम्प ने AI सेक्टर पर नए नियम थोपे जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि सख्त नियमों से टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी साफ किया है कि AI पर नजर रखने का काम अमेरिका का जस्टिस डिपार्टमेंट भी कर सकता है। उनकी इस भूमिका से यह साफ झलकता है कि अमेरिका AI को रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।
AI की बढ़ती क्षमता के साथ-साथ इसके गलत इस्तेमाल, साइबर सिक्योरिटी, इंसानी कंट्रोल और आगे चलकर पैदा हो सकने वाले खतरों को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने भी कहा है कि AI से जुड़े खतरों से निपटने के लिए एक बहुपक्षीय यानी मल्टीलेटरल व्यवस्था की जरूरत है।
ऐसे में एक तरफ जहां इंटरनेशनल नियमों और निगरानी की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका AI सेक्टर के डेवलपमेंट को प्राथमिकता दे रहा है। इन दो अलग-अलग रुखों की वजह से आने वाले समय में AI के ग्लोबल रेगुलेशन का मुद्दा और ज्यादा चर्चा में रहने की उम्मीद है।