अदिती सारंगधर बोलीं: महिला को सुपरवुमन बनने की जरूरत नहीं, पहले खुद से प्यार करे
नवरात्रि पर 'सनई चौघडे' की अदिती सारंगधर ने देवी के नौ रूपों, मातृत्व और महिलाओं की सेहत पर अपनी राय रखी।
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झी मराठी की मालिका 'सनई चौघडे' में इन दिनों जय और शरू को एहसास हो रहा है कि वे एक-दूसरे से प्यार करने लगे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर जय की मां तेजस्विनी पर पड़ने वाला है। यह किरदार अदिती सारंगधर निभा रही हैं। नवरात्रि के मौके पर उन्होंने मां के भीतर देवी के रूप, आज की दुनिया में महिलाओं के खुद को ताकतवर रखने और अपनी शक्ति पहचानने पर बात की।
नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा होती है। एक स्त्री में इन शक्तियों का अक्स कैसे दिखता है, यह पूछने पर अदिती ने अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि जिन देवियों को हम अलग-अलग नामों से पूजते हैं, उनके कई रूप होते हैं। सौम्य, प्यारी और गुस्सैल स्त्री में हर किसी को देवी के अलग-अलग रूप जरूर दिखते हैं। देवी के ये रूप स्त्री की भावनाएं हैं और इन भावनाओं का वक्त-वक्त पर बाहर आना जरूरी है।
अदिती के मुताबिक नवदुर्गा यानी नौ रसों की नौ भावनाएं। महिलाएं अक्सर इन भावनाओं को जाहिर करने से हिचकती हैं, जबकि मन से खुलना जरूरी है। पारंपरिक खेलों में खेला जाने वाला भोंडला, गरबा और डांडिया, ये सब इन्हीं भावनाओं को व्यक्त करने के लिए हैं। पहले के जमाने में महिलाओं के लिए घर की दहलीज लांघना मुश्किल था, तो किसी न किसी तरह उनके घर से बाहर आने के लिए त्योहार बने। मेंटल हेल्थ पर आज खूब जागरूकता से बात होती है, पर तब यह धारणा ही नहीं थी। औरतें घर में बंधी थीं और कुछ घंटों की खुशी मिल जाती तो उसी को लेकर साल भर जी लेती थीं। अदिती ने कहा कि उनके लिए नौ देवियों के ये नौ रूप इसी तरह झलकते हैं।
मां को दुर्गा जैसी ताकतवर और अन्नपूर्णा जैसी ममतामयी कहा जाता है। देवी के इन रूपों को वे कैसे देखती हैं, इस पर अदिती ने कहा कि उन्हें लगता है आज की माएं बहुत रोने वाली हैं। पहले इतने बच्चे संभाले जाते थे, पर यह बुरे मतलब में नहीं है। भागदौड़ भरी दुनिया में हम एक ही बच्चे को जन्म देते हैं, इसलिए हर मां अपने बच्चों को लेकर पजेसिव रहती है।
अदिती ने यह भी कहा कि सही उम्र में शादी और बच्चा न हो तो भावनाओं का बवंडर उठता है, और इस संतुलन को साधते हुए दम फूल जाता है। उनके भीतर की दुर्गा को लगता है कि 'सनई चौघडे' में तेजस्विनी का किरदार निभाते हुए जय, गौतम और साक्षी उनके बच्चे हैं और वह उसी हिसाब से बर्ताव कर रही है। सोसायटी की नजर से यह गलत हो सकता है, पर एक मां की नजर से यह गलत नहीं है।
उनके मुताबिक मां बनकर जीते हुए ये सारे रूप देखने पड़ते हैं। हर मां बेटे के मामले में पजेसिव होती है। सास बनने वाली हूं, यह जानकर खुशी होती है, पर बेटा मुझसे दूर जाएगा, यह एहसास अलग होता है। हर मां की इनसिक्योरिटी का स्तर अलग होता है और जाहिर करने का तरीका भी। अदिती ने कहा कि तेजस्विनी का किरदार निभाते हुए उन्हें एक मां के तौर पर वह अपनी जगह सही लगती है। लोगों को वह गलत लगे तो भी मां की नजर से वह बिल्कुल सही है। दुर्गा का उसका रूप कौन सा है, यह जल्दी ही पता चलेगा।
आज की स्त्री के सामने घर और करियर का संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है। इस पर अदिती ने बताया कि वे 'सनई चौघडे' की शूटिंग सिर्फ 8-10 दिन करती हैं। बाकी वक्त वे अपने बेटे को ठीक से देती हैं, क्योंकि अभी वही उनकी प्राथमिकता है। अब वे काम के लिए खुद को बहुत ज्यादा तकलीफ नहीं दे सकतीं। खाना बनाना पसंद है, पर अब नहीं हो पाता तो उसकी जरूरत नहीं लगती।
अदिती का मानना है कि सुपरवुमन बनना है, इस टैग के पीछे खुद को नजरअंदाज करना बहुत गलत है। वे ज्यादा से ज्यादा वक्त पति और बेटे को देने की कोशिश करती हैं। उनकी खुशी किसमें है, यह अब उन्हें ज्यादा अहम लगता है। उनके पास विकल्प हैं, तो घर और करियर संभालते हुए चिड़चिड़ाहट कम करना, डाइट करना और खुद पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है, और इसके लिए जरूरी विकल्प चुनना ज्यादा जरूरी है।
स्त्री के लिए खुद के लिए जीना और अपने सपनों को तरजीह देना कितना अहम है, इस पर अदिती ने कहा कि उन्हें यह बेहद अहम लगता है। पहले के जमाने के लोग ग्रेट थे, पर वे जिए इसलिए हमें भी वैसे ही जीना चाहिए, ऐसा उन्हें बिल्कुल नहीं लगता। हम जो चाहें करने के लिए आजाद हैं। हर महिला को अपने लिए जीना और अपने सपनों को मजबूती देना ही चाहिए।
इस नवरात्रि में महिलाओं और उनके परिवार वालों को क्या संदेश देंगी, इस पर अदिती ने कहा कि हर महिला से यही कहना चाहती हैं कि खुद पर ध्यान दें। खुद से प्यार करना सीख लिया तो आप सबको ठीक से संभाल सकती हैं। आप खुद तकलीफ में होंगी तो दूसरों को भी खुश नहीं रख सकतीं। भावनाएं किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती हैं और भावनाओं का निकास न हो तो ये बीमारियां होती हैं। इसलिए खुद से प्यार करें, जो बातें नहीं चाहिए उन्हें बाहर निकालें, और इस नवरात्रि पर हर महिला खुद की देखभाल जरूर करे।
एक शब्द में मातृत्व का मतलब पूछने पर अदिती ने कहा, 'Irreplaceable'। मातृत्व कभी पैसे से खरीदा नहीं जा सकता और मां की जगह कोई दूसरा कभी नहीं ले सकता। अदिती ने अपनी राय साफ और बेबाक ढंग से रखी, सबको नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं और 'सनई चौघडे' जरूर देखने की बात कहना भी नहीं भूलीं।