मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

आंखें ठीक दिखने का मतलब रेटिना सलामत नहीं, शुगर के मरीज हर साल कराएं जांच

डायबिटिक रेटिनोपैथी में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता, इसलिए मधुमेह वाले लोगों के लिए हर साल रेटिना की जांच अहम बताई गई है।

आंखें ठीक दिखने का मतलब रेटिना सलामत नहीं, शुगर के मरीज हर साल कराएं जांच
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

हमें दिख रहा है तो आंखें बिल्कुल ठीक होंगी, ज्यादातर लोग ऐसा ही मान लेते हैं। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। आंख के अंदर पीछे की तरफ एक परत होती है, जिसे रेटिना कहते हैं, और असल में देखने में यही परत मदद करती है। बाहर से आंखें अच्छी लगें, तब भी अंदर की यह परत खराब हो सकती है और इंसान को पता तक नहीं चलता। मधुमेह का असर इस रेटिना पर पड़ सकता है।

आज भारत में शुगर के मरीज काफी बढ़ गए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 10 करोड़ लोगों को मधुमेह है। इनमें से 12 से 16 प्रतिशत लोगों की आंख के रेटिना पर इसका असर हो चुका है। डॉक्टर इसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। आसान भाषा में कहें तो नौ में से एक आदमी को शुगर है, और शुगर वाले हर छह में से एक आदमी की आंख में तकलीफ शुरू हो चुकी है। हर 25 में से एक आदमी की नजर जाने की कगार पर है। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि 8 प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें शुगर है।

इस बीमारी में सबसे बड़ा खतरा यही है कि कोई लक्षण नहीं दिखता। यह धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरू में कुछ पता नहीं चलता। न दर्द होता है, न नजर कम होती है, और आदमी को लगता है कि सब ठीक है। 85 प्रतिशत शुगर वाले लोगों को यह मालूम ही नहीं होता कि शुगर से आंखों की रोशनी जा सकती है। उन्होंने कभी रेटिना की जांच नहीं करवाई होती। जब वे डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब 45 प्रतिशत लोगों की नजर काफी कम हो चुकी होती है, और तब तक देर हो चुकी होती है। जिन्हें कई सालों से शुगर है, उनके लिए खतरा ज्यादा है, और शुगर कंट्रोल में न हो तो यह खतरा और बढ़ जाता है।

आंखें चली जाएं तो आदमी न काम कर पाता है, न पढ़ाई। इसका असर सिर्फ उस पर नहीं, उसके घर और देश पर भी पड़ता है। एक अंदाजे के मुताबिक आंख की इस बीमारी की वजह से भारत को हर साल करीब 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है, क्योंकि लोग काम नहीं कर पाते।

बताए गए उपाय के तौर पर हर साल आंखों की जांच कराना ही रास्ता है। नजर अच्छी दिख रही है, यह सोचकर अनदेखी न करें। खासकर जिन्हें शुगर है, उन्हें हर साल रेटिना चेक कराना चाहिए। साथ ही कहा गया है कि सरकार को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। गांव-गांव में रेटिना जांच की मशीन होनी चाहिए, अच्छे डॉक्टर मिलने चाहिए, इलाज सस्ता होना चाहिए और उसे बीमा में शामिल किया जाना चाहिए। शुगर से जुड़े हर कार्यक्रम में आंखों की जांच भी होनी चाहिए।

इसके लिए एक अच्छा कार्यक्रम शुरू हुआ है, जिसका नाम है विजन साथी। डॉ. करोबी लाहिरी, उपाध्यक्ष, विट्रिओ रेटिनल सोसायटी इंडिया और कंसल्टेंट, बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, के मुताबिक यह देशभर का कार्यक्रम है। इसमें QR कोड स्कैन करने पर व्हाट्सऐप पर 14 छोटे मैसेज आते हैं। इन मैसेज में आसान भाषा में बताया जाता है कि शुगर से आंख को क्या होता है, जांच क्यों जरूरी है और इलाज कहां कराना है। जानकारी मिल जाए तो लोग वक्त पर डॉक्टर के पास जाते हैं।

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