90 साल के जापानी बॉडीबिल्डर तोशिसुके कानाझावा ने जीता 19वां खिताब
जापान के 90 वर्षीय तोशिसुके कानाझावा ने मास्टर्स बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में 85 साल से ऊपर की उम्र के वर्ग में सोना जीता, पत्नी की याद और सादे शाकाहारी खाने को बताया अपनी फिटनेस का राज।
50 साल की उम्र पार करते ही ज्यादातर लोग किसी न किसी बीमारी की शिकायत करने लगते हैं या थकान का रोना रोते हैं। ऐसे में जापान के एक 90 साल के बुजुर्ग ने दुनियाभर के जवान लोगों को हैरान कर दिया है। तोशिसुके कानाझावा नाम के इस शख्स ने 31 अगस्त को हुई मास्टर्स बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में 85 साल से ऊपर के वर्ग में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़कर गोल्ड मेडल जीता। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनकी जिद और अनुशासित जिंदगी का जीता-जागता सबूत थी। इस जीत के साथ ही कानाझावा के करियर का यह 19वां राष्ट्रीय खिताब बन गया।
जिस उम्र में ज्यादातर बुजुर्ग घर में आराम करते हैं या बिस्तर तक सीमित हो जाते हैं, उस उम्र में कानाझावा स्टेज पर जाकर अपनी मसल्स दिखाते हैं और दुनिया के सबसे उम्रदराज एक्टिव बॉडीबिल्डर के तौर पर पहचान बना रहे हैं। उन्होंने अपनी इस गजब की फिटनेस और अपने जीवन के सफर के बारे में बताया है।
तोशिसुके कानाझावा का जन्म 1936 में जापान के शिमाने प्रांत में हुआ था। बचपन से ही उन्हें खेलकूद का खासा शौक था। हाईस्कूल में रहते हुए उन्होंने तैराकी और कुश्ती में अपना पहला मेडल जीता था। 20 साल की उम्र में उन्होंने बॉडीबिल्डिंग में गंभीरता से दिलचस्पी लेना शुरू किया और 24 और 37 साल की उम्र में मिस्टर जापान का खिताब भी अपने नाम किया। लेकिन लगातार की जाने वाली मेहनत और शरीर पर पड़ने वाले तनाव की वजह से उन्होंने 34 साल की उम्र में बॉडीबिल्डिंग को अलविदा कह दिया था।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब कानाझावा 50 साल के हुए, तब उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ने लगी। बीमार पत्नी को हौसला देने के लिए, उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए और उसे जिंदगी में आगे बढ़ने की हिम्मत देने के लिए कानाझावा ने दोबारा जिम जाने और बॉडीबिल्डिंग में वापसी करने का बड़ा फैसला लिया। उनकी पत्नी का निधन हो चुका है, लेकिन आज भी हर प्रतियोगिता में उतरते वक्त वे अपनी पत्नी को याद करते हैं और उसी की प्रेरणा से स्टेज पर जीत हासिल करते हैं।
आज के बॉडीबिल्डिंग की दुनिया में बहुत से जवान लड़के शॉर्टकट के तौर पर स्टेरॉयड या सप्लीमेंट का सहारा लेते हैं। लेकिन कानाझावा साफ कहते हैं कि उनका शरीर पूरी तरह नैचुरल है। बिना किसी नकली दवा के, सिर्फ सही खाना और अनुशासित कसरत के दम पर उन्होंने अपनी मसल्स बनाए रखी हैं। उन्होंने मछली और मांस खाना पूरी तरह छोड़ दिया है, यानी वे शाकाहारी जीवनशैली अपनाते हैं। साथ ही उन्होंने कभी शराब भी नहीं पी।
उनकी रोज की डाइट में सुबह के नाश्ते में ब्राउन राइस, नाटो (किण्वित सोयाबीन) और परंपरागत मिसो सूप शामिल रहता है। दोपहर और रात के खाने में वे ब्राउन राइस के ऊपर जापानी मसाला फुरिकाके डालकर खाते हैं। प्रोटीन के लिए वे रोज 2 अंडे खाते हैं और दिन में 3 बार प्रोटीन शेक पीते हैं, हालांकि पहले वे 6 बार पीते थे।
सिर्फ खाना ही नहीं, कानाझावा आज भी रोज बिना नागा जिम जाते हैं और वेट ट्रेनिंग करते हैं। इसके साथ ही शरीर को पूरा आराम देने के लिए वे रोज 7 घंटे की गहरी नींद लेते हैं। कानाझावा का कहना है कि उम्र बढ़ना एक नैचुरल प्रोसेस है, इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही खानपान और मेहनत से बुढ़ापे की रफ्तार को जरूर धीमा किया जा सकता है। 90 साल की उम्र में भी वे रुकने को तैयार नहीं हैं। 60 साल से ऊपर के वर्ग की वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेना उनका अगला मकसद है। इसके अलावा हॉलीवुड स्टार और बॉडीबिल्डिंग के दिग्गज आर्नोल्ड श्वार्जनेगर से मिलने की भी उनकी गहरी इच्छा है।
तोशिसुके कानाझावा का यह सफर बताता है कि अगर मजबूत इरादा, सब्र और सही जीवनशैली हो, तो उम्र कभी सपनों के आड़े नहीं आती।