मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

50 साल बाद मरीज बने डॉ. जोहारी, जांच की उसी डॉक्टर ने जिसका इलाज उन्होंने किया था

जसलोक हॉस्पिटल में 100 साल से ज्यादा उम्र के ईएनटी सर्जन डॉ. ए. सी. जोहारी की जांच उसी डॉ. दिव्य प्रभात ने की, जिनकी सर्जरी उन्होंने 50 साल पहले की थी।

50 साल बाद मरीज बने डॉ. जोहारी, जांच की उसी डॉक्टर ने जिसका इलाज उन्होंने किया था
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में हाल ही में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसकी चर्चा अस्पताल में हो रही है। 100 साल से ज्यादा उम्र के सीनियर ईएनटी (नाक, कान, गला) सर्जन डॉ. ए. सी. जोहारी अपने गले की तकलीफ का इलाज कराने यहां पहुंचे थे। डॉ. जोहारी पिछले करीब छह दशकों से मुंबई में मरीजों की सेवा कर रहे हैं और उन्होंने जिंदगी में हजारों मरीजों का इलाज किया है। इस बार वे खुद मरीज की भूमिका में थे।

डॉ. जोहारी को गले में लगातार जलन हो रही थी, ऐसा लगता था जैसे गले में कुछ अटका हो और खाना निगलने में बहुत तकलीफ हो रही थी। उनकी उम्र और इन लक्षणों को देखते हुए यह फिक्र होना स्वाभाविक था कि कहीं गले में कोई गंभीर बीमारी तो नहीं। इसलिए जसलोक हॉस्पिटल की ईएनटी ओपीडी में उनकी वीडियो लैरिंगोस्कोपी की गई।

जांच में गले के हिस्से में एक छोटी थैली जैसी बनावट दिखी। अस्पताल के मुताबिक यह सामान्य (नॉर्मल) स्थिति है और जांच में किसी गंभीर या खतरनाक बीमारी के संकेत नहीं मिले। इस नतीजे से डॉ. जोहारी और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली। रिपोर्ट आने के बाद डॉ. जोहारी को सिर्फ दवाइयों की सलाह दी गई है।

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जांच करने वाली डॉक्टर कोई और नहीं, बल्कि जसलोक हॉस्पिटल की ईएनटी सर्जरी कंसल्टेंट डॉ. दिव्य प्रभात थीं। करीब 50 साल पहले, यानी पांच दशक पहले, डॉ. जोहारी ने बच्ची रहीं दिव्य प्रभात की सायनस की सर्जरी की थी, जो कामयाब रही थी। वक्त के साथ वह बच्ची खुद ईएनटी सर्जन बनी और मेडिकल की दुनिया में अपना नाम बनाया। आज उन्हीं के सामने डॉ. जोहारी मरीज बनकर बैठे थे।

डॉ. दिव्य प्रभात ने इस मौके पर कहा, "डॉ. जोहारी जैसे अनुभवी ईएनटी सर्जन को जब ऐसे लक्षण दिखते हैं, तो गंभीर बीमारी की फिक्र होना स्वाभाविक है। वीडियो लैरिंगोस्कोपी से फौरन तस्वीर साफ हो गई और जब पता चला कि स्थिति सामान्य है, तो उनके चेहरे की खुशी देखना मेरे लिए बहुत संतोष की बात थी। जिन डॉक्टर ने 50 साल पहले मेरा इलाज किया था, आज उनके इलाज में मदद करने का मौका मिलना मेरे लिए बड़े सौभाग्य और अनोखे अनुभव की बात है।"

डॉ. ए. सी. जोहारी ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, "पूरी जिंदगी मरीजों की सेवा में बिताने के बाद जब मुझे खुद ये लक्षण महसूस हुए, तो मैं भी जानना चाहता था कि आखिर हो क्या रहा है। लैरिंगोस्कोपी से यकीन हो गया कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है। जिनका इलाज मैंने पांच दशक पहले किया था, उन्हीं डॉक्टर से अपनी जांच कराना एक अद्भुत अनुभव था। मेडिकल की दुनिया हमें अनपेक्षित रास्तों से ऐसे संयोगों तक ले आती है।"

जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के सीईओ जितेंद्र हरियाण ने कहा, "स्वास्थ्य सेवा भरोसे पर टिकी होती है। जिन डॉक्टर ने अपनी पूरी जिंदगी मरीजों की सेवा में लगा दी, उनका हमारे डॉक्टरों पर वैसा ही भरोसा करना हमारे लिए खास सम्मान की बात है। डॉ. जोहारी का यह सफर एक तरह से उनके मेडिकल करियर को पूर्णता देता है। डॉक्टर के तौर पर हम कितने भी अनुभवी हों, मरीज के तौर पर इलाज में साफ जानकारी, हमदर्दी और भरोसे को ही सबसे ऊपर रखते हैं, यह वाकया इसकी याद दिलाता है।"

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