28 सितंबर : सूचना के अधिकार का अंतरराष्ट्रीय दिन, जानिए इसका महत्व
यूनेस्को द्वारा घोषित इस दिन का मकसद पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देना है
किसी भी मजबूत और जिंदा लोकतंत्र की नींव नागरिकों की जागरूकता पर टिकी होती है। जब देश के हर नागरिक को सरकार के फैसलों, नीतियों और सार्वजनिक योजनाओं की सही जानकारी मिलती है, तभी असली विकास मुमकिन हो पाता है। यही वजह है कि हर साल 28 सितंबर को दुनियाभर में सूचना पाने का अंतरराष्ट्रीय सार्वत्रिक दिवस मनाया जाता है, जिसे अंग्रेज़ी में International Day for Universal Access to Information यानी IDUAI कहा जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को ने घोषित किया है और प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन लाने के लिए इसे बेहद अहम माना जाता है।
सूचना का अधिकार सिर्फ एक कानूनी नियम नहीं, बल्कि मानव अधिकारों का ही एक हिस्सा है। जब नागरिकों को सार्वजनिक संस्थाओं और सरकार के पास मौजूद जानकारी तक आसानी से पहुंच मिलती है, तो वे बेहतर तरीके से फैसले ले पाते हैं। भारत में भी जानकारी का अधिकार कानून 2005, यानी सूचना का अधिकार कानून 2005 लागू होने के बाद से आम आदमी के हाथ में प्रशासन से सवाल पूछने का एक बड़ा हथियार आ गया है। इस दिन के मौके पर दुनियाभर में नागरिकों को उनके इस अधिकार का एहसास कराया जाता है, ताकि वे सरकारी कामकाज पर नजर रख सकें और भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकें।
आज हम डिजिटल क्रांति के दौर में जी रहे हैं, जहां स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के जरिए हर पल जानकारी की बौछार होती रहती है। लेकिन इस जानकारी के सैलाब में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सच और फेक न्यूज यानी बनावटी जानकारी में फर्क कैसे किया जाए। गलत जानकारी और अफवाहों के फैलने से समाज में गलतफहमियां फैलती हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है। इसलिए आज के दौर में सिर्फ कोई भी जानकारी मिल जाना काफी नहीं, बल्कि वह जानकारी भरोसेमंद, अधिकृत और सच्ची होना बेहद जरूरी हो गया है।
जानकारी तक खुली और बिना रोकटोक की पहुंच समाज में बराबरी लाने में मदद करती है। पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए यह अधिकार एक बड़ी ढाल की तरह काम करता है। पत्रकारों को निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने के लिए सरकारी आंकड़ों और दस्तावेजों तक पहुंचना आसान हो जाता है। जब नागरिकों को सही जानकारी मिलती है, तो वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा फायदा उठा पाते हैं और सामाजिक न्याय स्थापित करना भी आसान होता है।
यूनेस्को की पहल पर मनाया जाने वाला यह दिन हर साल एक खास थीम पर आधारित होता है, जिसके जरिए दुनियाभर के देशों से अपने सूचना अधिकार कानूनों में सुधार करने और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर जानकारी को और आसान बनाने की अपील की जाती है। जानकारी की सुलभता सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आर्थिक विकास से भी सीधे जुड़ी हुई है।
आखिर में, सूचना पाने का अंतरराष्ट्रीय सार्वत्रिक दिवस हर नागरिक को यह याद दिलाता है कि ज्ञान और जानकारी का अधिकार ही असल मायने में लोकतंत्र की आत्मा है। अफवाहों से दूर रहकर सच को चुनना, प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए सवाल पूछना और अपने बुनियादी अधिकारों का सही इस्तेमाल करना हर जिम्मेदार नागरिक की जिम्मेदारी है। इस दिन लिया गया जागरूकता का संकल्प ही एक मजबूत और समझदार समाज बना सकता है।