21 सितंबर वर्ल्ड ग्रेटिट्यूड डे: छोटा सा शब्द धन्यवाद बदल सकता है पूरी लाइफस्टाइल
हर साल 21 सितंबर को मनाया जाने वाला वर्ल्ड ग्रेटिट्यूड डे लोगों को रुककर अपनी जिंदगी की अच्छी चीजों का शुक्रिया अदा करने का मौका देता है, जिसके सेहत पर भी कई फायदे बताए जाते हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तनाव, कॉम्पिटिशन और शिकायतों से घिरे रहते हैं। हमारे पास जो नहीं है उसी की सोचते-सोचते अक्सर हम डिप्रेशन में चले जाते हैं। लेकिन हमारे पास जो अच्छा है, उसके लिए नेचर का और लोगों का शुक्रिया अदा करना ही असल में कृतज्ञता यानी ग्रेटिट्यूड कहलाता है। इसी वजह से हर साल 21 सितंबर को पूरी दुनिया में वर्ल्ड ग्रेटिट्यूड डे मनाया जाता है। यह दिन लोगों को थोड़ा रुककर पीछे मुड़कर देखने और जिंदगी की पॉजिटिव बातों को दिल से महसूस करने का सुनहरा मौका देता है।
वर्ल्ड ग्रेटिट्यूड डे मनाने की शुरुआत 1965 में हवाई में हुई एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस से हुई थी। स्पिरिचुअल गुरु श्री चिन्मय ने यह आइडिया रखा था कि दुनिया भर में एक ऐसा दिन होना चाहिए, जिस दिन हर इंसान एक-दूसरे का शुक्रिया अदा करे। इसके बाद 1966 से हर साल 21 सितंबर को यह दिन मनाया जाने लगा और धीरे-धीरे यूनाइटेड नेशंस यानी यूएन की मध्यस्थता से इस दिन को दुनिया भर में मान्यता मिल गई। रोज की जिंदगी में थैंक्यू या धन्यवाद जैसा छोटा सा शब्द बड़ा चमत्कार कर सकता है। जब हम दिल से किसी का शुक्रिया अदा करते हैं, तो सिर्फ सामने वाले को ही नहीं बल्कि खुद हमें भी एक अलग तरह की खुशी और सुकून मिलता है।
मॉडर्न मेडिकल साइंस और साइकोलॉजी ने भी यह साबित किया है कि कृतज्ञता की आदत इंसान की फिजिकल और मेंटल हेल्थ में जबरदस्त सुधार लाती है। जो लोग रेगुलर तौर पर शुक्रिया अदा करते हैं, उनके शरीर में कॉर्टिसोल नाम के स्ट्रेस हार्मोन का लेवल कम हो जाता है। जब हम किसी के लिए कृतज्ञ होते हैं, तो दिमाग में डोपामिन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन निकलते हैं, जिससे मन खुश रहता है। रात को सोने से पहले दिन भर की अच्छी बातों को याद करने से दिमाग शांत होता है, अच्छी नींद आती है और ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा कृतज्ञता की वजह से इंसान की सोच नेगेटिविटी से पॉजिटिविटी की तरफ शिफ्ट होती है, जिससे मुश्किल हालात में लड़ने का कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है।
परिवार, दोस्तों, कलीग्स या अपने बच्चों के प्रति कृतज्ञता जताने से रिश्तों की दूरी मिटती है और अपनापन बढ़ता है। टीचर्स के दिए ज्ञान के लिए, पेरेंट्स के त्याग के लिए और दोस्तों के साथ के लिए शुक्रिया कहने से उनकी नजर में हमारे लिए इज्जत दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही हमें खाना, पानी और हवा देने वाली नेचर के प्रति कृतज्ञ रहना भी आज के टाइम की जरूरत है, और एनवायरनमेंट को बचाना भी नेचर के प्रति शुक्रिया अदा करने का ही एक हिस्सा है।
वर्ल्ड ग्रेटिट्यूड डे को सिर्फ एक दिन तक सीमित न रखकर इसे एक लाइफस्टाइल बना लेना चाहिए। इसके लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। रोज रात को सोने से पहले उस दिन हुई तीन अच्छी बातें डायरी में लिखी जा सकती हैं, जिसे ग्रेटिट्यूड जर्नलिंग कहा जाता है। अपनी जिंदगी में अहम रोल निभाने वाले किसी एक शख्स को रोज थैंक्यू मेसेज भेजा जा सकता है। दूसरों का शुक्रिया अदा करते वक्त खुद का शुक्रिया अदा करना भी नहीं भूलना चाहिए और मुश्किल वक्त में खुद को संभालने के लिए खुद की तारीफ भी करनी चाहिए। कुल मिलाकर, शिकायतें करते रहने से जिंदगी मुश्किल बन जाती है, जबकि जो मिला है उसके लिए कृतज्ञ रहने से जिंदगी खूबसूरत और भरपूर बनती है।