21 सितंबर को नेशनल चाय डे, जानिए चाय का इतिहास और सेहत से जुड़े फायदे
हर साल 21 सितंबर को दुनियाभर में नेशनल चाय डे मनाया जाता है, यह दिन चाय की लोकप्रियता और उसकी अहमियत को समर्पित है
हर साल 21 सितंबर के दिन दुनियाभर में चाय प्रेमी एक खास मौके का जश्न मनाते हैं, जिसे 'राष्ट्रीय चाय दिवस' यानी नेशनल चाय डे कहा जाता है। भारत हो या दुनिया का कोई भी कोना, एक बात पर लोगों की पसंद फौरन मिल जाती है, वो है गरमागरम चाय की चुस्की। भागदौड़ भरी जिंदगी में एक पल ठहरकर सुकून पाने का मौका देने वाले इस पेय की अहमियत और उसकी लोकप्रियता को दुनियाभर में पहुंचाने के लिए यह दिन तय किया गया है। चाय के शौकीनों के लिए यह कोई मामूली दिन नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा पेय के सम्मान का खास उत्सव है।
चाय की शुरुआत कैसे हुई, इसका इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है। पुराने जमाने में आयुर्वेद में अलग-अलग औषधीय पौधों और मसालों को उबालकर काढ़े के रूप में इसका इस्तेमाल शुरू हुआ था। इसके बाद ब्रिटिश दौर में चाय की पत्तियों में दूध और चीनी मिलाकर पीने का चलन शुरू हुआ। भारतीयों ने इसमें अदरक, इलायची, लौंग और दालचीनी जैसे मसाले मिलाकर दुनिया को 'मसाला चाय' का लाजवाब स्वाद दिया। आज टपरी पर मिलने वाली 5 रुपये की चाय से लेकर बड़े कैफे में मिलने वाली 'चाय लाटे' तक, इस पेय ने दुनियाभर के करोड़ों लोगों के दिल में अपनी अलग जगह बना ली है।
कहते हैं जहां शब्द कम पड़ जाएं या बातचीत की शुरुआत करनी हो, वहां एक कप चाय जादू का काम कर देती है। हमारे यहां घर आए मेहमान का स्वागत ही 'चाय लोगे क्या' के इस अपनेपन भरे सवाल से होता है। दफ्तर के काम का तनाव मिटाने के लिए लिया गया 'चाय ब्रेक' हो या बारिश के दिनों में खिड़की के पास बैठकर दोस्तों के साथ की गई गपशप, चाय हर मौके को और जिंदा और मीठा बना देती है। नेशनल चाय डे के मौके पर अलग-अलग शहरों में, कैफे में और सोशल मीडिया पर चाय के शौकीन इकट्ठा होते हैं। कई रेस्टोरेंट और चाय की टपरियों पर इस दिन खास ऑफर, नए फ्लेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम रखे जाते हैं।
चाय सिर्फ जीभ का चटखारा नहीं, सही मात्रा और सही तरीके से पी जाए तो सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। इस दिन लोग अलग-अलग तरह की चाय का लुत्फ उठाते हैं। अदरक और मसाला चाय में अदरक और भारतीय मसाले पाचन दुरुस्त रखते हैं, इम्युनिटी बढ़ाते हैं और सर्दी-कफ में राहत देते हैं। एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर ग्रीन टी वजन कंट्रोल करने और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मददगार मानी जाती है। वहीं तुलसी, लेमनग्रास और पुदीने की पत्तियों से बनी हर्बल टी मानसिक तनाव कम कर दिमाग को सुकून देती है।
नेशनल चाय डे हमें रोज की व्यस्त जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेने की याद दिलाता है। काम की भागदौड़ में खुद के लिए 10 मिनट निकालकर चाय का लुत्फ उठाना या अपनों के साथ बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए पुरानी यादें ताजा करना, यही इस दिन की असली सार्थकता है। इसलिए इस नेशनल चाय डे पर अपने पसंदीदा कप में गरमागरम चाय डालिए और जिंदगी के हर मीठे पल का आनंद लीजिए।