10 अक्टूबर को सर्वपित्री अमावस्या, शनि अमावस्या और गजछाया योग भी
पितृपक्ष का आखिरी दिन 10 अक्टूबर को है। श्राद्ध और तर्पण के तीन मुहूर्त बताए गए हैं।
पितृपक्ष का आखिरी दिन यानी सर्वपित्री अमावस्या इस साल 10 अक्टूबर को आ रही है। बताया गया है कि इस दिन सभी पितर अपने पितृलोक लौट जाते हैं, इसीलिए इस दिन को ज्यादा अहमियत दी जाती है। कई लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं।
जिन लोगों को अपने पूर्वजों के मृत्यु की तारीख मालूम नहीं होती, उनके लिए सर्वपित्री अमावस्या पर श्राद्ध किया जाता है। इस साल यह दिन और खास रहने वाला है, क्योंकि उसी दिन शनि अमावस्या भी है और गजछाया योग भी बन रहा है। अमावस्या पर हस्त नक्षत्र हो तो गजछाया योग बनता है। कहा जाता है कि इस योग में पितरों को पिंडदान किया जाए तो उन्हें मुक्ति मिलती है और वे बहुत तृप्त होते हैं।
श्राद्ध किसी भी वक्त नहीं किया जाता, उसके लिए शुभ मुहूर्त होता है। 10 अक्टूबर के लिए मुहूर्त ये हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 31 मिनट से 8 बजे तक है। दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक है। कहा गया है कि इन वक्तों में श्राद्ध और तर्पण करने पर उत्तम फल मिलता है।
घर पर श्राद्ध करने का तरीका भी बताया गया है। सुबह जल्दी उठें, नहाकर साफ कपड़े पहनें और सबसे पहले अपने पितरों को याद करें। मन में संकल्प करें कि परिवार के सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों की आत्मा को शांति मिले। इसके बाद अपने इष्ट देवता और भगवान विष्णु का नाम लें।
फिर एक तांबे के लोटे में साफ पानी लें, उसमें थोड़े काले तिल डालें और पूर्वजों के नाम से वह पानी अर्पित करें। इसी को तर्पण कहते हैं। असली विधि, मंत्र, दिशा कौन सी हो और जनेऊ कैसे पहनें, यह सब किसी जानकार ब्राह्मण से पूछकर ही करें। बिना जाने कुछ भी न करें।
इस दिन दान का भी बहुत महत्त्व बताया गया है। पितरों के नाम से अन्नदान करें, ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं और अनाज दान करें। गाय, कुत्ते और कौवे को भी खिलाएं, क्योंकि माना जाता है कि पितर इन जानवरों के रूप में आते हैं। चावल, गेहूं, गुड़, घी और कपड़े दान किए जा सकते हैं।
बताया गया है कि इस दिन किया दान कभी बेकार नहीं जाता और उसका पुण्य सीधे पितरों को मिलता है। मन से पूर्वजों से माफी मांगें और घर में सुख, शांति और पैसा बना रहे, यह प्रार्थना करें। कहा गया है कि श्रद्धा से किया दान सारी इच्छाएं पूरी करता है। इसलिए 10 अक्टूबर को न भूलें और अपने पितरों के लिए थोड़ा वक्त जरूर निकालें।
धर्म, ज्योतिष, वास्तु जैसे विषयों की ये बातें सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूर लें।