पुणे में फर्जी कुराश सर्टिफिकेट रैकेट: 14 पुलिसकर्मियों समेत 25 लोग गिरफ्तार
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे पुलिस ने कुराश के कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए सरकारी नौकरी पाने के मामले में 14 पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुणे पुलिस ने कुराश नाम के मार्शल आर्ट खेल के कथित फर्जी सर्टिफिकेट से जुड़े भर्ती घोटाले में 25 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 14 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। जांच करने वालों को शक है कि ये कागज इसलिए इस्तेमाल हुए कि सरकारी नौकरी मिल जाए, जबकि खेल कोटे से भर्ती के लिए जिन प्रतियोगिताओं में उतरना जरूरी होता है, उनमें उम्मीदवार शामिल ही नहीं हुए थे।
कुछ आरोपियों को येरवडा सेंट्रल जेल भेजा जा चुका है। छह और लोग अब भी फरार हैं और पुलिस उन्हें ढूंढ रही है। जांच अब सिर्फ पुलिस विभाग तक सीमित नहीं रही, उसका दायरा बढ़ रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक कुछ उम्मीदवार इन विवादित सर्टिफिकेट के सहारे कथित तौर पर सरकारी सेवा में आ गए, और कुछ ने तो पुलिस की ट्रेनिंग भी ले ली थी। जांच में कथित तौर पर ऐसे लोगों के शामिल होने की बात भी सामने आई है, जो ट्रेनिंग में गए ही नहीं। इससे सवाल उठा है कि भर्ती के दौरान ये कथित गड़बड़ियां पकड़ में क्यों नहीं आईं।
कथित रैकेट सिर्फ पुलिस फोर्स की नियुक्तियों तक नहीं रुका है। जांच करने वालों को शक है कि ऐसे ही सर्टिफिकेट से दूसरे सरकारी विभागों में भी नौकरियां हासिल की गई होंगी। पुणे पुलिस संबंधित विभागों से बात कर रही है, ताकि नियुक्तियों को परखा जा सके और उम्मीदवारों के जमा किए कागजों की जांच हो सके। अगर गड़बड़ी दिखी तो ऐसे सर्टिफिकेट पर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों की भी जांच हो सकती है।
बताया गया है कि इस मामले में कुल 31 लोगों की पहचान हुई है। इनमें से 25 गिरफ्तार हो चुके हैं और छह की तलाश जारी है। यह भी बताया गया है कि मामला दर्ज होने के बाद एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। उसकी मौत के हालात के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई ब्योरा नहीं है।
सरकारी भर्ती में खेल कोटा उन खिलाड़ियों को पहचान देने के लिए होता है, जिन्होंने राज्य, राष्ट्रीय या दूसरे मान्यता प्राप्त स्तर की योग्य प्रतियोगिताओं में अपनी काबिलियत दिखाई हो। कथित तौर पर फर्जी कुराश सर्टिफिकेट के इस्तेमाल से यह चिंता उठी है कि असली खिलाड़ियों के हाथ से नौकरी के मौके निकल गए होंगे, और वह भी उन उम्मीदवारों की वजह से, जो पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते थे।
इस मामले ने खेल प्रमाणपत्रों की जांच-पड़ताल का मुद्दा भी सामने ला दिया है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो भर्ती के वक्त जमा होने वाले सर्टिफिकेट पर और कड़ी नजर रखी जा सकती है, और सरकारी विभाग उन्हें जिस तरीके से परखते हैं, उस पर भी गौर हो सकता है।
जांच अभी जारी है। पुलिस इस कथित नेटवर्क को खंगाल रही है, बाकी संदिग्धों का पता लगा रही है और दूसरे विभागों के साथ मिलकर देख रही है कि इन विवादित सर्टिफिकेट से जुड़ी और कौन सी नियुक्तियां हुई हैं।
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