पुणे में नकली 500 रुपये के नोट बनाने वाला गिरोह पकड़ा गया, चार गिरफ्तार, 1,128 नोट जब्त
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विश्रामबाग पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर 500 रुपये के 1,128 नकली नोट और कथित तौर पर छपाई में इस्तेमाल उपकरण जब्त किए।
पुणे की विश्रामबाग पुलिस ने नकली नोट बनाने और चलाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार हुए हैं। उनके पास से 500 रुपये के कुल 1,128 नकली नोट मिले हैं, जिनकी अंकित कीमत 5 लाख 64 हजार रुपये बैठती है। नोट छापने में काम आने वाले उपकरण भी पुलिस ने कब्जे में ले लिए हैं।
पूरा मामला एक मुखबिरी से शुरू हुआ। पुलिस कांस्टेबल सचिन अहिवले और शैलेश सुर्वे को खबर लगी कि महात्मा फुले मंडई के आसपास एक संदिग्ध आदमी नकली नोट लेकर आने वाला है। दोनों ने यह बात सब-इंस्पेक्टर सत्यवान गेंद और सीनियर इंस्पेक्टर नवनाथ जगताप तक पहुंचाई। इसके बाद एक टीम तैयार की गई।
14 अक्टूबर को शाम करीब 4.45 बजे पुलिस ने शुक्रवार पेठ में मंडई के पीछे, म्हसोबा मंदिर के सामने वाली अंदर की सड़क पर जाल बिछाया। वहां नोट लेकर पहुंचे सलमान जैनुद्दीन राजे (30) को पुलिस ने दबोच लिया। वह दौंड तहसील के केडगांव में आंबेगांव का रहने वाला है। उसके पास 500 रुपये के 805 नकली नोट निकले, जिनकी कुल अंकित कीमत 4 लाख 2 हजार 500 रुपये है।
कांस्टेबल अहिवले ने सरकार की ओर से शिकायत दी। उसी के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 180, 178, 179, 181 और 3(5) में विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ।
पूछताछ में राजे ने बताया कि इस काम में उसके तीन साथी और हैं। डीसीपी (जोन 1) कृषिकेश रावले की मंजूरी और सीनियर इंस्पेक्टर जगताप की देखरेख में पुलिस की टीमें सातारा और कोल्हापुर रवाना हुईं। स्थानीय पुलिस की मदद से तीनों को पकड़ लिया गया। इनमें नालासोपारा का रहने वाला शफाज फिरोज अंसारी (30), सातारा जिले की माण तहसील के सुरूपखान वाडी का विशाल विलास गलांडे (37) और कोल्हापुर जिले की शिरोल तहसील का अभिजीत रावसाहेब कांबले (30) शामिल हैं।
तलाशी में अंसारी के घर से 500 रुपये के 323 और नकली नोट मिले, जिनकी अंकित कीमत 1 लाख 61 हजार 500 रुपये है। वहां से एप्सन प्रिंटर, एचपी मॉनिटर, लेनोवो का वायरलेस कीबोर्ड और माउस, ज़ेब्रा सीपीयू, आर्टिस डिवाइस और कुछ और सामान भी बरामद हुआ। पुलिस ने इस सामान की कीमत करीब 21,100 रुपये आंकी है। राजे वाले 805 और अंसारी वाले 323 नोट मिलाकर कुल 1,128 नोट होते हैं।
इस कार्रवाई में सीनियर इंस्पेक्टर जगताप के साथ हवालदार सचिन अहिवले, शैलेश सुर्वे, सचिन कदम, कैलास डुकरे और उनकी टीम शामिल थी।
सीनियर इंस्पेक्टर जगताप ने कहा, "आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच चल रही है कि नकली नोट कैसे बनाए गए और क्या उन्हें बाज़ार में चलाया गया या दूसरों को सप्लाई किया गया।"
पुलिस अब हर आरोपी की भूमिका और पूरे नेटवर्क के फैलाव की जांच कर रही है। असली सवाल यह है कि नोट कहां छपे, कितने और छापे गए और कितने बाज़ार में पहुंच चुके हैं। यानी छपाई से लेकर बाज़ार में बंटने तक की पूरी कड़ी का पता लगाना बाकी है।
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