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पुणे में पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने सुनाए कबीर के पद, 'कल के कबीर' की प्रस्तुति

पुणे में पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने सुनाए कबीर के पद, 'कल के कबीर' की प्रस्तुति तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी कैंपस के ललित कला केंद्र गुरुकुल एम्फीथिएटर में बुधवार को पांच कलाकारों की टोली के साथ कबीर की वाणी गूंजी।

पुणे, 31 अक्टूबर 2026: पद्मश्री से सम्मानित और जाने-माने लोक गायक प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने बुधवार को पुणे में अपनी मशहूर संगीतमय प्रस्तुति 'कल के कबीर' पेश की। यह कार्यक्रम सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) कैंपस में बने ललित कला केंद्र गुरुकुल के एम्फीथिएटर में हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन दो संस्थाओं ने मिलकर किया। एक तरफ थी Head, Heart, Hands Learning Foundation (H3LF), जो वाल्डॉर्फ पद्धति से प्रेरित शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था है। दूसरी तरफ ललित कला केंद्र (LKK) गुरुकुल था, जो परफॉर्मिंग आर्ट्स को समर्पित संस्थान है।

टिपानिया मालवी लोक परंपरा के जरिए संत कबीर की कविता को लोगों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। इस मौके पर उनके साथ पांच सदस्यों की टोली भी थी। तंबूरा और करताल जैसे पारंपरिक वाद्यों के साथ कलाकारों ने कबीर के पद गाए। इन रचनाओं में प्रेम, बराबरी, इंसानियत और सामाजिक सद्भाव की बातें उभरकर आईं।

सीधी-सादी लोक शैली में पेश की गई इस प्रस्तुति से कबीर की दार्शनिक वाणी आम श्रोताओं तक आसानी से पहुंची। सुनने वालों को समाज में मौजूद दरारों और इंसानी रिश्तों के बारे में सोचने का मौका भी मिला।

आयोजकों के मुताबिक H3LF और ललित कला केंद्र का यह साथ दोनों संस्थाओं की एक जैसी सोच को दिखाता है। दोनों शिक्षा, सांस्कृतिक जागरूकता और सर्वांगीण विकास पर जोर देती हैं।

H3LF बच्चों और किशोरों को अनुभव के जरिए सिखाने की शिक्षा देती है। इसमें पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक समझ पर भी ध्यान दिया जाता है। वहीं ललित कला केंद्र गुरुकुल परंपरा को निभाता है और उसे आधुनिक यूनिवर्सिटी शिक्षा से जोड़कर परफॉर्मिंग आर्ट्स को आगे बढ़ाता है।

H3LF के एक स्कूल लीडर ने कहा, "H3LF में हमारा मानना है कि शिक्षा सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है। यह अपनी जड़ों को समझने, हमारी साझा इंसानियत को खोजने और 'हेड' व 'हैंड्स' के साथ 'हार्ट' को संवारने की बात है।"

स्कूल लीडर ने आगे कहा, "ललित कला केंद्र जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ मिलकर प्रह्लादजी जैसे दिग्गज को बुलाना इसी सोच का सुंदर रूप है। कबीर का सच और सबको साथ लेकर चलने का संदेश वही है, जिसकी आज हमारे युवाओं और पूरे समाज को जरूरत है।"

कार्यक्रम आम लोगों के लिए खुला था। इसमें भारतीय लोक संगीत, दर्शन और सांस्कृतिक परंपराओं में दिलचस्पी रखने वाले लोग बड़ी संख्या में जुटे।

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