बिना ऑनलाइन प्रक्रिया 11वीं में दाखिला देने वाले जूनियर कॉलेजों पर हर छात्र के पीछे 5,000 रुपये जुर्माना
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा विभाग ने 2025-26 में केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रक्रिया को किनारे कर ऑफलाइन एडमिशन देने वाले जूनियर कॉलेजों पर जुर्माने और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।
पुणे, 30 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा विभाग ने उन जूनियर कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, जिन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में राज्य की केंद्रीकृत ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया को दरकिनार करके 11वीं के छात्रों को बिना मंजूरी ऑफलाइन दाखिला दे दिया। हजारों प्रभावित छात्रों को राहत मिली है और उन्हें 12वीं की परीक्षा में बैठने की इजाजत दी गई है, लेकिन जिम्मेदार संस्थानों को जुर्माना भरना पड़ेगा और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी।
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा के संचालक डॉ. महेश पालकर के जारी आदेश के मुताबिक, जो कॉलेज बिना मंजूरी के एडमिशन देने के दोषी पाए जाएंगे, उन्हें ऑफलाइन तरीके से दाखिला पाने वाले हर छात्र के पीछे 5,000 रुपये जुर्माना देना होगा। यह रकम कॉलेज के मैनेजमेंट से वसूली जाएगी। छात्रों से यह पैसा लेने पर सख्त रोक लगाई गई है।
मामला तब सामने आया जब कई जूनियर कॉलेजों पर आरोप लगा कि उन्होंने केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रक्रिया को छोड़कर छात्रों को सीधे 11वीं में दाखिला दे दिया। 12वीं की परीक्षा के फॉर्म भरने का काम चल रहा था, ऐसे में हजारों छात्रों के पढ़ाई के भविष्य को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई।
संस्थानों की गलती का खामियाजा छात्रों को न भुगतना पड़े, इसलिए शिक्षा विभाग ने उन्हें 12वीं की परीक्षा देने की अनुमति दी है। हालांकि ऐसे छात्रों को उनके अपने कॉलेज की जगह दूसरे कॉलेजों में परीक्षा केंद्र दिया जाएगा।
विभाग ने अधिकारियों से कहा है कि वे संबंधित स्कूल और कॉलेज के मैनेजमेंट से लिखित स्पष्टीकरण लें। अधिकारियों को यह भी जांचना है कि छात्रों की नियमित हाजिरी रही या नहीं, क्लासरूम की सुविधाएं कैसी हैं, इमारत और बाकी ढांचा कैसा है और शिक्षा का अधिकार (RTE) के नियमों का पालन हुआ या नहीं।
संचालनालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी मामलों में कार्रवाई पूरी करके सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपें। चेतावनी भी दी गई है कि आदेशों पर अमल न हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
प्रिंसिपलों पर पदावनति और इंक्रीमेंट कटौती की तलवार: विभाग ने उन हेडमास्टरों और प्रिंसिपलों की भी जिम्मेदारी तय की है, जिन्होंने सरकारी नियमों के खिलाफ जाकर एडमिशन को मंजूरी दी। महाराष्ट्र एम्प्लॉईज ऑफ प्राइवेट स्कूल्स (कंडीशंस ऑफ सर्विस) रूल्स, 1981 के तहत मैनेजमेंट को निर्देश दिया गया है कि जिम्मेदार पाए गए लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करें।
संभावित कार्रवाई में सैलरी इंक्रीमेंट रोकना और पदावनति शामिल है। अगर जांच के बाद भी मैनेजमेंट कार्रवाई नहीं करता, तो जांच के नतीजे महाराष्ट्र एम्प्लॉईज ऑफ प्राइवेट स्कूल्स (कंडीशंस ऑफ सर्विस) रेगुलेशन एक्ट, 1977 की धारा 4A(1) के तहत संचालनालय को भेजने होंगे।
दोबारा गलती पर चेतावनी: शिक्षा विभाग ने जूनियर कॉलेजों को आगाह किया है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में ऐसी गड़बड़ी दोहराई न जाए। जो संस्थान फिर से बिना मंजूरी ऑफलाइन एडमिशन देते पाए गए, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी।
इस कदम का मकसद केंद्रीकृत एडमिशन व्यवस्था को लागू करना है, साथ ही यह भी पक्का करना कि गलत तरीके से दाखिला पाए छात्रों का एक साल संस्थानों की गलती की वजह से बर्बाद न हो।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।