पुणे में 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को होगा 14वां तालचक्र महोत्सव, दो शाम ताल और नृत्य
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स्वारगेट के गणेश कला क्रीड़ा मंच पर पद्मश्री पंडित विजय घाटे की परिकल्पना वाला तालचक्र महोत्सव शनिवार और रविवार शाम 6 बजे से होगा। प्रवेश निःशुल्क है।
पुणे के संगीत प्रेमियों के लिए दो शाम ताल, सुर और नृत्य की सौगात आ रही है। तालचक्र महोत्सव का 14वां संस्करण शनिवार, 31 अक्टूबर और रविवार, 1 नवंबर 2026 को स्वारगेट के गणेश कला क्रीड़ा मंच में होगा। यह महोत्सव पूरी तरह तालवाद्यों को समर्पित है और इसमें भारतीय लय परंपराओं की विविधता को सामने रखा जाता है।
इस महोत्सव की परिकल्पना जाने-माने तबला वादक पद्मश्री पंडित विजय घाटे की है। उन्होंने महोत्सव की घोषणा करते हुए बताया कि दोनों दिन कार्यक्रम शाम 6 बजे शुरू होगा। प्रवेश निःशुल्क रहेगा और पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा। आयोजन पुनीत बालन ग्रुप के खास सहयोग से हो रहा है।
इस बार भारतीय शास्त्रीय संगीत, फ्यूजन और नृत्य का मेल देखने को मिलेगा। अलग-अलग घरानों और परंपराओं से जुड़े नामी कलाकार मंच पर आएंगे।
पहले दिन, शनिवार 31 अक्टूबर को "फ्यूजन 2026" नाम का खास सत्र होगा। इसकी परिकल्पना और अगुवाई जाने-माने तबला वादक पंडित विजय घाटे करेंगे। इस सत्र में शीतल कोलवलकर (कथक), तन्मय देवचके (हारमोनियम), सागर पाटोकर (तबला), नागेश आडगांवकर (गायन), शिखर नाद क़ुरैशी (जेम्बे), संगीत हल्दीपुर (कीबोर्ड), रवि चारी (सितार), शेल्डन डी'सिल्वा (बास गिटार), जीनो बैंक्स (ड्रम्स) और जॉर्ज ब्रुक्स (सैक्सोफोन) शामिल होंगे। सत्र का संचालन मिलिंद कुलकर्णी करेंगे।
दूसरे दिन, रविवार 1 नवंबर को तीन अलग सत्र होंगे। इनमें तालवाद्यों की कला और लय व नृत्य के आपसी मेल को सामने रखा जाएगा।
पहले सत्र में फर्रुखाबाद घराने के जाने-माने कलाकार पंडित संजय मुखर्जी का तबला सोलो होगा।
दूसरे सत्र में तबला और कथक के बीच लय की जुगलबंदी होगी। इसमें पंडित ज्ञान प्रकाश घोष के शिष्य और फर्रुखाबाद घराने के कलाकार पंडित अनिंदो चटर्जी, पंडित बिरजू महाराज की शिष्या और लखनऊ घराने की कथक नृत्यांगना दुर्गा आर्य, और बनारस व अजराड़ा घराने के तबला वादक पंडित मुकुंदराज देव शामिल होंगे।
महोत्सव का समापन "शिव तांडव" से होगा। यह पखावज की खास प्रस्तुति है, जिसे पंडित नानासाहेब पानसे की पखावज परंपरा के होनहार युवा तालवादक कृष्णा सालुंके पेश करेंगे।
नामी उस्तादों, उभरती प्रतिभाओं और नए संगीत प्रयोगों के साथ तालचक्र महोत्सव इस बार भी श्रोताओं को भारत की समृद्ध तालवाद्य विरासत का अलग अनुभव देगा।
प्रवेश निःशुल्क है। आयोजकों ने इच्छुक लोगों से अपील की है कि वे पहले से पंजीकरण के लिए 9370830002 पर संपर्क करें।
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