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पुणे की CIRT 60वें साल में, भोसरी में ऑटोमोटिव साइबर सुरक्षा टेस्टिंग लैब शुरू

पुणे की CIRT 60वें साल में, भोसरी में ऑटोमोटिव साइबर सुरक्षा टेस्टिंग लैब शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट ने सितंबर 2026 से सितंबर 2027 तक राष्ट्रीय पहलों की घोषणा की और भोसरी कैंपस में नई लैब दिखाई।

पुणे की सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट (CIRT) ने गाड़ियों की सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी पर ज़ोर देते हुए सालभर चलने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रमों का ऐलान किया है। पुणे में 5 नवंबर 2026 को बुधवार के दिन मीडिया से बातचीत के दौरान संस्थान ने भोसरी कैंपस में नई बनी ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी पेनिट्रेशन टेस्टिंग लैबोरेटरी भी दिखाई।

CIRT की स्थापना 1967 में हुई थी। यानी 59 साल पूरे हो चुके हैं और संस्थान सितंबर 2026 में अपने 60वें साल में दाखिल हुआ। इस मौके पर सितंबर 2026 से सितंबर 2027 तक "Ensuring Safer and Secure Mobility" थीम पर कई कार्यक्रम होंगे। डायमंड जुबली समारोह का औपचारिक उद्घाटन और जुबली लोगो का अनावरण केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया।

बातचीत में CIRT के डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र सिंह, टेक्निकल सेक्रेटेरिएट के प्रमुख शेखर ढोले, ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी और मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर के प्रमुख फारुख मखदूम, सेफ्टी और होमोलोगेशन के प्रमुख डॉ. मंगेश पाठक, ऑटोमोटिव टेस्टिंग डिवीजन के प्रमुख संजय सालुंके और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

संस्थान की शुरुआत केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और एसोसिएशन ऑफ स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग्स (ASRTU) की साझा पहल से हुई। शुरू में उसका काम देशभर के राज्य परिवहन उपक्रमों की टेस्टिंग और क्षमता निर्माण में मदद करना था।

डॉ. देवेंद्र सिंह ने कहा, "छह दशकों से CIRT हर उस सुरक्षित गाड़ी और पुर्ज़े के पीछे खड़ा रहा है जो हमारी लैब से गुज़रा है। भारत कनेक्टेड, सॉफ्टवेयर-डिफाइंड, इलेक्ट्रिक और ऑटोमेटेड गाड़ियों की तरफ बढ़ रहा है, इसलिए सुरक्षा अब गाड़ी के डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर भी टिकी है। हमारा डायमंड जुबली साल उस विरासत का सम्मान करने और भारतीय मोबिलिटी के अगले दौर के लिए ज़रूरी टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और इंसानी हुनर बनाने का है।"

पिछले छह दशकों का सफर देखें तो CIRT ने भारत की पहली टायर और व्हील रिम लैबोरेटरी बनाई और 1994 में MoRTH ने उसे CMVR के नियम 124 के तहत अधिकृत किया। 2007 में वह CMVR नियम 126 के तहत पूरी गाड़ी के होमोलोगेशन की टेस्टिंग एजेंसी बनी और उसकी लैब को NABL मान्यता मिली। गोल्डन जुबली साल 2017 में उसने भारत की पहली रेट्रोफिटेड इलेक्ट्रिक बस सर्टिफाई की और ड्राइवर मूल्यांकन प्रणाली के लिए पहला पेटेंट हासिल किया।

इसके बाद 2019 में उसे GSR 870 के तहत आयातित गाड़ियों को सर्टिफाई करने का अधिकार मिला। 2023 में उसे भारत NCAP का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया, 2024 में वर्चुअल सिमुलेशन लैबोरेटरी शुरू हुई और 2025 में ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी डिवीजन बना।

फिलहाल संस्थान की 10 लैब ISO/IEC 17025 के तहत NABL से मान्यता प्राप्त हैं। उसने 2,000 से ज़्यादा कार्यक्रमों में 80,000 से अधिक अधिकारियों को ट्रेनिंग दी है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच CIRT ने भारत NCAP की 38 आधिकारिक सेफ्टी रेटिंग जारी कीं। महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात में 115 से ज़्यादा ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक लगाए गए हैं।

टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के अलावा CIRT 3.5 टन से ऊपर सकल वाहन वज़न (GVW) की गाड़ियों के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स कमेटी (AISC) का सेक्रेटेरिएट है। वह UNECE के सड़क यातायात सुरक्षा ग्लोबल फोरम WP.1 के लिए MoRTH का सेक्रेटेरिएट भी है और उसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) और SIRO की मान्यता है। MoRTH की फंडिंग वाली योजनाओं की निगरानी, अमल और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट भी वही देखता है। इन गतिविधियों से 31 इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च, 22 रीजनल ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर, 82 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर और पांच ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग स्टेशनों का नेटवर्क चलता है।

संस्थान राज्य सरकारों को इलेक्ट्रिक, डीज़ल और CNG बसों की खरीद पर सलाह देता है। राज्य परिवहन विभागों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को AI वाले ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सिस्टम लागू करने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी भी देता है। इन सिस्टम का मकसद ड्राइवर के मूल्यांकन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और कार्यक्षमता बढ़ाना है।

आजकल की गाड़ियां इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, टेलीमैटिक्स सिस्टम और ओवर-द-एयर (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट पर ज़्यादा निर्भर हैं, इसलिए साइबर सुरक्षा गाड़ी की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई है। CIRT का ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी डिवीजन गाड़ी बनाने वाली कंपनियों और पुर्ज़े सप्लाई करने वालों को टेस्टिंग, मूल्यांकन और सर्टिफिकेशन से जुड़ी सेवाएं देता है। इनमें कंप्लायंस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए साइबर सिक्योरिटी मैनेजमेंट सिस्टम (CSMS) और सॉफ्टवेयर अपडेट मैनेजमेंट सिस्टम (SUMS) का ऑडिट और AIS-189 व AIS-190 के तहत वाहन टाइप अप्रूवल शामिल है।

डिवीजन इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, गेटवे, टेलीमैटिक्स, इन्फोटेनमेंट सिस्टम और गाड़ी के अंदर के नेटवर्क की वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनिट्रेशन टेस्टिंग (VAPT) भी करता है। OTA अपडेट की सुरक्षा, V2V और V2X कम्युनिकेशन सिस्टम और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग इंटरफेस की जांच भी इसमें आती है। मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर के ज़रिए CIRT OEM, पुर्ज़ा सप्लायर, टेस्टिंग एजेंसियों और रेगुलेटरों के लिए खास ट्रेनिंग भी चलाता है।

संस्थान की साइबर सुरक्षा गतिविधियां AIS-189 और AIS-190, UN रेगुलेशन R155 और R156, ISO/SAE 21434 और ISO 24089 के मुताबिक हैं। CIRT के अनुसार, निष्पक्षता की नीति के तहत सलाह और सर्टिफिकेशन की सेवाएं अलग-अलग स्वतंत्र टीमें संभालती हैं।

फारुख मखदूम ने कहा, "साइबर सिक्योरिटी अब गाड़ी की सुरक्षा की शर्त है, कोई ऊपर से जोड़ी जाने वाली चीज़ नहीं। पुणे में समर्पित पेनिट्रेशन टेस्टिंग लैब होने से भारतीय निर्माता और सप्लायर अपनी गाड़ियों के सड़क पर उतरने से पहले भारतीय और UN दोनों ज़रूरतों के मुताबिक उनकी साइबर मज़बूती देश में ही जांच सकते हैं।"

डायमंड जुबली के तहत सितंबर 2026 से सितंबर 2027 के बीच राष्ट्रीय स्तर की पहलें और ज्ञान साझा करने के कार्यक्रम होंगे। इनमें सुरक्षित, भरोसेमंद और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन की राष्ट्रीय पहल है, जिसमें टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और हुनर विकास से सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा पर ध्यान रहेगा। V2V और V2X तकनीक, कनेक्टेड गाड़ियों और कम्युनिकेशन सिक्योरिटी पर वेबिनार और वर्कशॉप होंगे। छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के पेशेवरों में जागरूकता और खास हुनर बढ़ाने के लिए ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी टैलेंट डेवलपमेंट इकोसिस्टम प्रस्तावित है।

तकनीकी वर्कशॉप और सेमिनार साइबर सिक्योरिटी, बस टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन, ई-रिक्शा और ई-कार्ट टेस्टिंग, गाड़ी रजिस्ट्रेशन और फिटनेस और AI आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट जैसे विषयों पर होंगे। संबंधित पक्षों में जागरूकता बढ़ाने के लिए CIRT "Moving India Safely" सड़क सुरक्षा अभियान भी शुरू करेगा।

डायमंड जुबली कार्यक्रम का समापन सितंबर 2027 में एक एक्सपो-कम-कॉन्फ्रेंस और समापन समारोह से होगा। उम्मीद है कि इसमें गाड़ी की सुरक्षा, ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी और साइबर रेज़िलियंस एक्ट (CRA), V2V/V2X तकनीक, भारत NCAP 2.0, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन और ADAS वैलिडेशन जैसे विषय शामिल होंगे। CIRT ने कहा कि यह सालभर का कार्यक्रम सरकारी एजेंसियों, ऑटोमोबाइल उद्योग, टेस्टिंग संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों के बीच सहयोग का मंच बनेगा।

CIRT पुणे में स्थित है और MoRTH से अधिकृत टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन एजेंसी है। संस्थान की गतिविधियों में गाड़ी की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन, ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण, और रिसर्च व कंसल्टेंसी शामिल हैं। वह तिमाही Indian Journal of Transport Management और सालाना प्रकाशन State Transport Undertakings: Profile & Performance छापता है।

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