बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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पुणे जिला कोर्ट की तीनों लिफ्ट बार-बार खराब, वकील ने मांगा पक्का इलाज

पुणे जिला कोर्ट की तीनों लिफ्ट बार-बार खराब, वकील ने मांगा पक्का इलाज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

शिवाजीनगर की नई जिला कोर्ट इमारत की तीनों लिफ्ट अक्सर बंद पड़ती हैं। अधिवक्ता बालासाहेब खोपड़े ने जिला व प्रधान न्यायाधीश अंजू शेंडे से तुरंत और स्थायी कदम उठाने की मांग की है।

शिवाजीनगर में बनी पुणे जिला कोर्ट की नई इमारत की तीनों लिफ्ट बार-बार खराब हो रही हैं। इससे वकीलों, मुकदमे के पक्षकारों और कोर्ट आने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बताया गया है कि कुछ लोग लिफ्ट के अंदर फंस भी चुके हैं। आरोप है कि लिफ्ट में फंसे लोगों को निकालने का कोई इमरजेंसी इंतजाम नहीं है और वहां कोई ऑपरेटर भी तैनात नहीं रहता। इस वजह से सीनियर सिटिजन और दिव्यांगों की परेशानी खास तौर पर बढ़ गई है।

अधिवक्ता बालासाहेब खोपड़े ने इस मामले में पुणे के जिला व प्रधान न्यायाधीश अंजू शेंडे से तुरंत और स्थायी उपाय करने की गुहार लगाई है। खोपड़े पहले अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता रह चुके हैं और महाराष्ट्र स्टेट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स असोसिएशन, नागपुर के पूर्व महासचिव भी हैं।

नई इमारत में 40 से ज्यादा कोर्टरूम हैं। इसी इमारत में सरकारी वकीलों के दफ्तर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का दफ्तर और बेलिफ का दफ्तर भी है। रोज 5,000 से ज्यादा लोग यहां पहुंचते हैं, जिनमें पक्षकार, पुलिसकर्मी और वकील शामिल हैं। इतनी भीड़ के लिए इमारत में सिर्फ तीन लिफ्ट हैं, और बताया जाता है कि वे अक्सर बिगड़ जाती हैं।

खोपड़े के मुताबिक लिफ्टों में बैकअप बिजली की व्यवस्था भी नहीं है। इसलिए बिजली गुल होने पर अंदर मौजूद लोगों के फंसने का खतरा रहता है। खोपड़े ने बताया कि 8 अक्टूबर को बिजली जाने पर वे खुद भी एक लिफ्ट में फंस गए थे। उनके साथ बाकी लोगों को सरकारी वकील संतोषकुमार पाटले की मदद से बाहर निकाला गया।

उन्होंने कहा कि लोग इंसाफ की उम्मीद में कोर्ट आते हैं, इसलिए परिसर में आने वाले हर शख्स की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जो सीनियर सिटिजन और दिव्यांग कोर्टरूम और दफ्तरों तक पहुंचने के लिए लिफ्ट पर ही निर्भर हैं, उनके लिए हालात ज्यादा चिंताजनक हैं।

खोपड़े ने कोर्ट प्रशासन से कहा है कि वह लिफ्ट के रखरखाव के जिम्मेदार अधिकारियों, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और तकनीकी मेंटेनेंस टीमों से मिलकर लिफ्टों की सुरक्षा, देखभाल और पहुंच की समीक्षा करे। साथ ही उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक उचित निर्देश देने की भी मांग की है, ताकि ऐसी घटनाएं रुकें और कोर्ट की इमारत में लोग सुरक्षित तरीके से आ-जा सकें।

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