बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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धानोरी के गंगा न्यू टाउन में गंदे पानी और बंद STP पर फ्लैट मालिकों का प्रदर्शन

धानोरी के गंगा न्यू टाउन में गंदे पानी और बंद STP पर फ्लैट मालिकों का प्रदर्शन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

गोयल गंगा के गंगा न्यू टाउन के निवासियों ने शनिवार को बिल्डर के सेल्स ऑफिस के बाहर गंदे पानी, STP और बिजली बिल को लेकर प्रदर्शन किया।

धानोरी में गोयल गंगा के गंगा न्यू टाउन प्रोजेक्ट में लाखों-करोड़ों रुपये लगाकर घर खरीदने वालों का आरोप है कि उन्हें काला और बदबूदार पानी पीना और इस्तेमाल करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पानी के दूषित होने का शक है, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) काम नहीं कर रहा, बिजली बिल का मामला अटका है और मेंटेनेंस की भी दिक्कतें हैं।

शनिवार को निवासियों ने डेवलपर के सेल्स ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि करीब 18 महीने से बार-बार शिकायतें करने के बावजूद बिल्डर ने उन पर ध्यान नहीं दिया।

सबसे गंभीर आरोप पानी की क्वालिटी को लेकर है। निवासियों का कहना है, "हमारे नलों से काला और पीलापन लिए हुए, बदबूदार पानी आ रहा है, जिसमें जिंदा लार्वा तक हैं। इससे सेहत को गंभीर खतरा है।" उनके मुताबिक STP करीब डेढ़ साल से लगभग बंद पड़ा है और उसका चलना "सिर्फ नाम के लिए" है।

निवासी तृप्ति जोशी ने कहा, "कई लोगों को त्वचा की दिक्कत, बाल झड़ने और UTI की समस्या हो रही है। हमने अपनी मेहनत की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई, और यह मिला। गंदे पानी की बदबू की वजह से लोग टॉयलेट जाने से कतराते हैं। इस वजह से हम अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को घर भी नहीं बुला सकते, शर्मिंदगी होती है।"

रणधीर मोकाशी ने कहा, "शुरू में हमने सोचा कि प्रोजेक्ट नया है, लेकिन बाद में समझ आया कि पानी इस्तेमाल लायक ही नहीं है। हालत पब्लिक टॉयलेट से भी बुरी है। डेवलपर को STP प्लांट बदलना चाहिए। हम मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन पहल बिल्डर को करनी चाहिए क्योंकि जिम्मेदारी उसी की है।"

निवासियों का दावा है कि जब भी विरोध तेज होता है या जांच की आशंका होती है, तब अपेक्षाकृत साफ पानी टैंकरों से लाकर सीधे STP में डाल दिया जाता है। उनके मुताबिक इससे ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का रंग-रूप कुछ समय के लिए बेहतर दिखता है और जांच करने वाले अधिकारियों से गड़बड़ी छिप सकती है। निवासियों का कहना है कि रोज करीब पांच टैंकर इस्तेमाल होते हैं, हालांकि इस दावे और टैंकर के पानी के असली मकसद की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने पुणे महानगरपालिका और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तुरंत तकनीकी जांच की मांग की है। साथ ही पानी की सप्लाई और STP से निकलने वाले पानी की स्वतंत्र टेस्टिंग भी मांगी गई है।

निवासियों की अस्थायी कमेटी में 14 से 15 सक्रिय सदस्य हैं। कमेटी के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में डेवलपर के प्रतिनिधियों के साथ कम से कम सात-आठ बैठकें हुईं, लेकिन हर बार नए आश्वासन मिले, पक्का हल नहीं। एक सदस्य ने कहा, "हम डेढ़ साल से बिल्डर से यही बात कर रहे हैं। हर बार कहा जाता है कि काम दो महीने में पूरा होगा या तीन महीने में नई मशीनरी लगेगी। हालत वही है। निवासी कब तक इंतजार करें?"

कमेटी के चेयरमैन प्रशांत सिन्हा ने कहा कि यहां छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रहते हैं। उन्होंने कहा, "कई महिलाएं दिन भर घर पर रहती हैं और इन दिक्कतों का लगातार सामना करती हैं। जब हालात वही हैं, तो हम परिवारों से यह नहीं कहते रह सकते कि जल्द सब ठीक हो जाएगा।" निवासियों ने यह भी पूछा है कि STP के पास से लिए गए पानी के सैंपल की ठीक से जांच हो रही है या नहीं, और लैब रिपोर्ट सोसायटी को दी जा रही हैं या नहीं।

बिजली को लेकर निवासी अनिकेत माने का आरोप है कि कब्जा मिलने के बाद से कई फ्लैटों में अधिकृत अलग बिजली मीटर नहीं लगे, जबकि डेवलपर ने C1, C2 और C3 बिल्डिंगों के लिए कॉमन मीटर लगाए हैं। माने ने कहा, "जो लोग फ्लैट में रहते ही नहीं, उन्हें भी बिजली बिल आ रहा है। कुछ लोगों से 2,000 रुपये या ज्यादा मांगे गए हैं। ये बिल किस आधार पर बन रहे हैं? बिल्डर ने 2 BHK या 3 BHK के हिसाब से हमसे 3,000 से 2000 रुपये देने को कहा। हमें अलग मीटर मिलने चाहिए। डेवलपर त्योहार के सीजन के नाम पर अलग से मीटर बिल लेता है, जो गैरकानूनी है।"

कुछ निवासियों का कहना है कि अधिकृत बिजली बिल न होने से आधार अपडेट और दूसरे सरकारी कागजों के लिए एड्रेस प्रूफ मिलने में भी दिक्कत आ रही है।

पानी और बिजली के अलावा निवासियों का आरोप है कि डेवलपर ने कुछ खरीदारों को पजेशन लेटर नहीं दिए और सोसायटी व उसकी सुविधाओं का औपचारिक हैंडओवर भी पूरा नहीं किया। उन्होंने डेवलपर की ओर से मांगे गए मेंटेनेंस पर भी सवाल उठाया है, जबकि निवासियों की सोसायटी खुद मेंटेनेंस का काम कर रही है और फंड जमा कर रही है।

प्रदर्शनकारियों में शामिल अनीता अशोक पवार ने कहा, "इस बार हमने शांति से प्रदर्शन किया, लेकिन अगर समस्याएं नहीं सुलझीं तो आगे हमें सड़क पर उतरना पड़ेगा।"

निवासी "No More Delays, No More Excuses", "Our Health, Our Right" और "One Community, One Voice, A Permanent STP Solution" लिखी तख्तियां लेकर शनिवार को C2 बिल्डिंग के पास जमा हुए और फिर डेवलपर के सेल्स ऑफिस की ओर गए।

सोसायटी की STP विभाग कमेटी के सदस्य और निवासी आत्माराम नाईक ने कहा, "हम MPCB के पास गए तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि डेवलपर ने जो सिस्टम देने का वादा किया था, वह लगाया ही नहीं गया और कोई दूसरी तकनीक इस्तेमाल हो रही है। यह हमारी सेहत से खिलवाड़ और जान जोखिम में डालने जैसा है।"

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