पुणे एयरपोर्ट पर बम की धमकी से निपटने की मॉक ड्रिल, चेक-इन और कार्गो में रखे गए नकली बम
पुणे एयरपोर्ट पर AAI और CISF समेत कई एजेंसियों ने बम की धमकी से निपटने की सालाना मॉक ड्रिल की।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे एयरपोर्ट पर बम की धमकी से निपटने की सालाना मॉक ड्रिल की गई। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के पुणे एयरपोर्ट ने सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और दूसरी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर यह अभ्यास किया। यह ड्रिल बॉम्ब थ्रेट कंटिन्जेंसी प्लान (BTCP) के तहत हुई। मकसद था कि आपात हालात के लिए तैयारी परखी जाए और बम की धमकी के वक्त एजेंसियों के बीच तालमेल और मजबूत हो।
अभ्यास की शुरुआत 1100 बजे AAI के प्रशासनिक भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में टेबलटॉप एक्सरसाइज से हुई। इसमें काल्पनिक धमकी के हालात पर बात हुई, हर एजेंसी की भूमिका और जिम्मेदारी समझाई गई और आपस में संपर्क के तौर-तरीके तय किए गए।
इसके बाद 1130 बजे टर्मिनल बिल्डिंग में असली मॉक ड्रिल शुरू हुई। तय परिदृश्य के मुताबिक एक अनजान शख्स ने इंडिगो के पुणे मैनेजर को बताया कि चेक-इन एरिया में एक लावारिस बैग पड़ा है, जिसमें नकली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) होने का शक है। मैनेजर ने फौरन CISF के सिक्योरिटी ऑपरेशनल कंट्रोल रूम को खबर दी। कंट्रोल रूम ने तुरंत क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को अलर्ट किया और संबंधित ड्यूटी पोस्ट को भी सूचना दी। प्रभावित हिस्से में मौजूद यात्रियों, स्टाफ और कंसेशनेयर को सुरक्षित तय जगह पर पहुंचाया गया।
अभ्यास के तहत शक वाले बैग को ब्लास्ट इन्हिबिटर से ढका गया और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई। फिर बैग की जांच कई चरणों में हुई: पहले नजर से मुआयना, फिर डॉग स्क्वाड, एक्सप्लोसिव वेपर डिटेक्टर (EVD), डॉग स्क्वाड से दोबारा जांच, नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर (NLJD), इलेक्ट्रॉनिक स्टेथोस्कोप और हैंडहेल्ड रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम (RTVS)। तय प्रक्रिया के मुताबिक काल्पनिक IED की मौजूदगी पक्की मानी गई, बॉम्ब थ्रेट असेसमेंट कमेटी (BTAC) की बैठक बुलाई गई और स्पेसिफिक थ्रेट घोषित किया गया।
उसके बाद बॉम्ब डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीम ने टेलीस्कोपिक मैनिपुलेटर से शक वाले बैग को संभाला और उसे सस्पेक्ट लगेज कंटेनमेंट वेसल (SLCV) में रखा। काल्पनिक रेंडर सेफ प्रोसीजर (RSP) कामयाबी से पूरा होने के बाद धमकी वाला बैग आगे की कार्रवाई के लिए तय सेफ डिस्पोजल एरिया (SDA) यानी कूलिंग पिट में ले जाया गया।
टर्मिनल बिल्डिंग के अलावा कार्गो एरिया में इंडिया पोस्ट के पास भी, काल्पनिक धमकी के हिस्से के तौर पर, एक नकली IED रखा गया था। राज्य की BDDS टीम ने उसे कामयाबी से पकड़ लिया। इससे एयरपोर्ट के कार्गो इलाके में सुरक्षा खतरों से निपटने की उसकी तैयारी और क्षमता दिखी।
इस अभ्यास का मकसद शामिल एजेंसियों की कामकाजी तैयारी को परखना था। साथ ही यह तय करना था कि हर एजेंसी को अपनी भूमिका और जिम्मेदारी साफ हो, और पूरे एयरपोर्ट परिसर में बम की धमकी जैसे काल्पनिक हालात में एजेंसियों का तालमेल और आपसी संपर्क कितना असरदार है, इसकी जांच हो सके।
ड्रिल में CISF, भारतीय वायुसेना, पुणे पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), फायर सर्विसेज, कस्टम्स, इमिग्रेशन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, एयरलाइंस और एयरपोर्ट से जुड़े दूसरे पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
ऐसे मॉक अभ्यास एयरपोर्ट की आपात तैयारी का अहम हिस्सा हैं। इनसे कामकाजी तैयारी बेहतर होती है, एजेंसियों का तालमेल मजबूत होता है और सुरक्षा से जुड़े हालात में असरदार और मिला-जुला जवाब पक्का होता है।
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