पुणे और अहिल्यानगर में पानी का संकट, वळसे पाटील ने मंत्री से मांगा तुरंत आवर्तन
बारिश लंबे समय से गायब है, नाले और बांध सूख रहे हैं और रब्बी की फसलें मुरझाने लगी हैं।
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पुणे और अहिल्यानगर जिलों में पानी की किल्लत गहराती जा रही है। बारिश लंबे समय से गायब है। छोटी धाराएं, नाले, बांध और कैनाल सूखने लगे हैं। खेती के पानी का सवाल गंभीर हो गया है और पानी न मिलने से रब्बी सीजन की फसलें मुरझाने लगी हैं।
इसी बीच पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक दिलीप वळसे पाटील ने मांग की है कि कुकडी, हुतात्मा बाबू गेनू (डिंभे) और चासकमान प्रोजेक्ट से तुरंत पानी का आवर्तन छोड़ा जाए। इससे खेती का नुकसान टल सकेगा और गांवों में पीने के पानी की जरूरत भी पूरी हो सकेगी। उन्होंने जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील को चिट्ठी देकर जल्द फैसला लेने की गुजारिश की है।
इस बार के मानसून में जुलाई के बाद बारिश ने खींच ली, जिससे खेती का पूरा प्लान बिगड़ गया। खरीफ में धान और सोयाबीन जैसी फसलों को बारिश के गैप का झटका लगा। अब रब्बी की फसलों के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो गया है। बारिश की राह देख रही फसलें जमीन की नमी खत्म होने से सूखने लगी हैं। कई जगह छोटी धाराएं, नाले और छोटे बांध सूख रहे हैं, इसलिए खेती के लिए पानी मिलना मुश्किल हो गया है।
पुणे जिले के पूर्वी हिस्से और अहिल्यानगर जिले की खेती बड़े पैमाने पर बारिश और डैमों के आवर्तन पर टिकी है। बारिश ने साथ छोड़ा तो किसानों को सिंचाई के पानी का इंतजार करना पड़ रहा है। वक्त पर पानी नहीं मिला तो खड़ी फसलों का नुकसान बढ़ने का डर है। आगे गांवों में पीने के पानी की जरूरत भी गंभीर होने की आशंका है, इसलिए डैमों में उपलब्ध पानी का हिसाब लगाकर आवर्तन छोड़ने की मांग जोर पकड़ रही है।
बारिश के लंबे गैप से खेती और पीने के पानी, दोनों का सवाल एक साथ खड़ा हुआ है। ऐसे में मौजूद जल भंडार का इस्तेमाल कैसे होगा, इस पर किसानों की नजर टिकी है। आवर्तन में देरी हुई तो रब्बी की फसलों का नुकसान और बढ़ सकता है। इसलिए पानी की जरूरत, उपलब्ध स्टॉक और अलग-अलग इलाकों की मांग के बीच संतुलन बनाकर तुरंत फैसला लिया जाए, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।
वळसे पाटील ने मंत्री को चिट्ठी देकर दोनों जिलों में पानी की किल्लत की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने इस बारे में मंत्री से सीधे बातचीत भी की है। उनकी मांग है कि कुकडी, डिंभे और चासकमान प्रोजेक्ट में मौजूद पानी की समीक्षा कर उसका ठीक से नियोजन किया जाए और जरूरत के मुताबिक तुरंत आवर्तन छोड़ा जाए।
उन्होंने कहा है कि किसानों की खड़ी फसल बचाने के लिए वक्त पर पानी मिलना जरूरी है। पानी के बिना फसल बर्बाद हुई तो उसका सीधा असर किसानों की कमाई और गांव की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए हालात की गंभीरता देखते हुए जलसंपदा विभाग को फैसला लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने जोर दिया है कि गांवों में पीने के पानी की समस्या खड़ी होने से पहले ही इंतजाम कर लिए जाएं।
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