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पिंपरी चिंचवड में कुत्तों की नसबंदी के आरोपों की जांच रिपोर्ट गायब, चार साल बाद भी कार्रवाई नहीं

3.29 करोड़ रुपये के कथित नसबंदी घोटाले की जांच रिपोर्ट गायब होने की बात सामने आई है।

पिंपरी चिंचवड में कुत्तों की नसबंदी के आरोपों की जांच रिपोर्ट गायब, चार साल बाद भी कार्रवाई नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका (PCMC) में कुत्तों की नसबंदी को लेकर करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगे चार साल हो चुके हैं। अब इस मामले की जांच पर नए सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट ही गायब है। अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे महानगरपालिका आयुक्त के दफ्तर और विजिलेंस विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पूरा विवाद इस दावे के इर्द-गिर्द है कि ठेकेदारों को ऐसी नसबंदी सर्जरी के पैसे दिए गए, जो शायद कभी हुई ही नहीं। गड़बड़ी नवंबर 2021 में सामने आई थी, जब पूर्व महापौर योगेश बहल ने महापालिका की आमसभा की बैठक में यह मुद्दा उठाया। यह मामला पूरे महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया। दिवंगत अजित पवार ने भी महापालिका चुनाव प्रचार के दौरान सत्ताधारी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। तब के महापालिका आयुक्त शेखर सिंह ने सभा को भरोसा दिया था कि विजिलेंस विभाग जांच करेगा और कार्रवाई होगी।

सबसे अहम आरोप 23 मार्च से 8 अगस्त 2020 के बीच का है, जब सख्त लॉकडाउन लागू था। बहल का आरोप था कि इसी दौरान PCMC के पशु चिकित्सा विभाग ने 7,125 कुत्तों की नसबंदी सर्जरी दर्ज की, जबकि लोग ज्यादातर घरों में बंद थे और रोजमर्रा का सारा कामकाज ठप था।

इस दावे से सवाल उठा कि लॉकडाउन में हजारों कुत्तों को कैसे पकड़ा गया और उनका ऑपरेशन कैसे किया गया। यह भी पूछा गया कि सरकारी कागजों में दर्ज सर्जरी सच में हुई थी या नहीं। तब विस्तृत जांच और कार्रवाई की मांग हुई थी। चार साल बीत गए, मामला किसी नतीजे तक नहीं पहुंचा, और अब जांच रिपोर्ट के कथित तौर पर गायब होने से विवाद में एक और परत जुड़ गई है।

विजिलेंस विभाग खुद सवालों के घेरे में है। जांच तय समय में पूरी करके उसके नतीजे सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए? अगर रिपोर्ट बनी थी तो वह कैसे गायब हो गई? आरोप यह भी हैं कि विजिलेंस के कुछ अधिकारियों की ठेकेदारों से मिलीभगत हो सकती है और नतीजे दबाने के लिए रिकॉर्ड बदले या हटाए गए। इस पर प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्त महापालिका आयुक्त विक्रांत बागडे से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

PCMC के पशु चिकित्सा विभाग ने 12 महीने के लिए 3,29,81,376 रुपये का टेंडर निकाला था और काम कई संस्थाओं में बांट दिया था। रिपोर्ट में जिन संस्थाओं के नाम हैं, वे हैं सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स, लातूर; जीवरक्षा एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट; जैनिस स्मिथ एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट; और एनिमल वेलफेयर एसोसिएशन, नवी मुंबई।

यूथ कांग्रेस के सचिव स्वप्निल बनसोडे ने इन चारों संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने यह जांच सीबीआई (CBI) या एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) से कराने को कहा है।

एक और मुद्दा बायोमेडिकल कचरे के वजन के रिकॉर्ड में फर्क का है। रिपोर्ट के मुताबिक PCMC के पशु चिकित्सा विभाग, सर्जरी करने वाली संस्था और बायोमेडिकल कचरा उठाने वाली एजेंसी Pasco के रिकॉर्ड आपस में मेल नहीं खाते। यह फर्क जांच के लायक है, मगर इससे अकेले यह तय नहीं होता कि कितनी सर्जरी हुईं, और न यह साबित होता है कि रिकॉर्ड जानबूझकर गलत बनाए गए।

बुनियादी सवाल अब भी अनसुलझे हैं। उस दौरान असल में कितने कुत्तों की नसबंदी हुई? ठेकेदारों के बिल कैसे जांचे गए? और महापालिका प्रशासन ने जिस जांच रिपोर्ट का वादा किया था, उसका क्या हुआ? PCMC को जांच की स्थिति साफ करनी होगी, गायब दस्तावेजों का हिसाब देना होगा और नतीजे सार्वजनिक करने होंगे। साथ ही अधिकारियों और ठेकेदारों पर लगे आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच भी पक्की करनी होगी।

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