NCP में बैठकों का दौर: देवगिरी पर विधायकों की बैठक के बाद बुधवार सुबह फिर कोर कमेटी
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राष्ट्रवादी काँग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात के बाद पार्टी में बैठकें तेज हैं। सुनील तटकरे ने अंदरूनी विवाद की खबरों को खारिज किया है।
राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (NCP) में इन दिनों बैठकों का सिलसिला चल रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक गुट दिल्ली गया और वहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिला। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज दिख रही है।
राजनीतिक गलियारों में कई महीनों से चर्चा है कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार एक तरफ हैं और अजितदादा गुट के वरिष्ठ नेता दूसरी तरफ। वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली यात्रा के बाद इन चर्चाओं को और हवा मिली है।
NCP की कोर कमेटी की बैठक बुधवार सुबह 9 बजे फिर बुलाई गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रविवार रात दिल्ली में अमित शाह से मिले थे। अगले दिन कोर कमेटी की बैठक हुई थी। अब बुधवार की बैठक उसी मुलाकात के बाद कोर कमेटी की दूसरी बैठक है। सूत्र की भाषा में कहें तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को दरकिनार कर शाह से मुलाकात की थी। वरिष्ठ नेताओं और सांसद पार्थ पवार के बीच बढ़ते संघर्ष की पृष्ठभूमि में इस बैठक की अहमियत बढ़ गई है। सबको उत्सुकता है कि आज की बैठक में क्या होगा।
इससे पहले मंगलवार रात मुंबई के देवगिरी बंगले पर NCP के विधायकों की बैठक हुई। यह बैठक करीब चार घंटे चली और मंगलवार को देर रात खत्म हुई। उसके कुछ ही घंटे बाद बुधवार सुबह कोर कमेटी के नेता फिर इकट्ठा होने वाले हैं।
इस बैठक में 17 विधायक नहीं आए। 50 में से 33 विधायकों ने ही हाजिरी लगाई। NCP के विधानसभा में 41 विधायक हैं, लेकिन कल की बैठक में 29 ही मौजूद थे और विधानसभा के 12 विधायक गैरहाजिर रहे।
बैठक में विधायकों ने शिकायत की कि उनकी पार्टी सत्ता में है, फिर भी काम नहीं हो रहे। कुछ विधायकों की शिकायत थी कि एकनाथ शिंदे की तरफ से काम नहीं हो रहे। विधायकों ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेताओं के बीच जो विवाद चल रहे हैं, उनकी नीचे हमें कोई खबर नहीं मिलती। उन्होंने यह भावना भी जताई कि वरिष्ठ नेताओं के संघर्ष की बातें लगातार सामने आने से पार्टी कमजोर हो रही है।
देवगिरी की बैठक के बाद सुनील तटकरे ने मीडिया से बात की। उन्होंने पार्टी के अंदरूनी विवाद की खबरों का खंडन किया। तटकरे ने कहा कि बैठक में सभी विधायकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के खेतों पर जाएं, उनकी समस्याएं जानें और ज्यादा से ज्यादा सवाल सुलझाने की कोशिश करें।
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