गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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मावल में सूखे जैसे हालात, पूर्व मंत्री बाला भेगडे ने घोणशेत में खेतों में जाकर देखी हालत

मावल में सूखे जैसे हालात, पूर्व मंत्री बाला भेगडे ने घोणशेत में खेतों में जाकर देखी हालत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

बारिश की कमी से मावल तालुका में खड़ी फसलें सूख रही हैं। पूर्व राज्यमंत्री बाला भेगडे ने किसानों से मिलकर मदद दिलाने का भरोसा दिया।

मावल तालुका में सूखे जैसे हालात को देखते हुए पूर्व राज्यमंत्री बाला भेगडे बुधवार (28 अक्टूबर) को घोणशेत पहुंचे। वहां उन्होंने सीधे खेतों में जाकर फसलों की हालत अपनी आंखों से देखी।

इस दौरान भेगडे ने किसानों से बात की और जानना चाहा कि फसल का कितना नुकसान हुआ है, पानी की कितनी कमी है और इस वजह से उन्हें क्या-क्या दिक्कतें आ रही हैं।

तालुका के कुछ हिस्सों में पानी न मिलने से खड़ी फसलें खतरे में हैं। किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका है। जो फसल उन्होंने मेहनत से खड़ी की, वह पानी के बिना बर्बाद हो जाएगी, यह डर किसान जता रहे हैं। पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ा है।

बारिश कम होने से धान की फसल, जो इस वक्त बालियां फूटने के दौर में है, सूखने लगी है। बीज, खाद और जुताई-बुवाई पर किसानों का बड़ा खर्च हो चुका है। अब उन्हें डर है कि यह सारा खर्च पानी में चला जाएगा, इसलिए गांव-गांव में चिंता का माहौल है।

ऐसे में प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार से तुरंत कदम उठाने और आर्थिक मदद देने की उम्मीद की जा रही है। किसानों ने मांग की है कि प्रशासन फौरन नुकसान के पंचनामे करे और आर्थिक मदद का एलान करे।

भेगडे ने कहा कि मावल तालुका के सूखा-पीड़ित किसानों को सरकार के जरिए जल्द से जल्द मदद दिलाने के लिए पीछा किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि किसानों की दिक्कतें सरकार तक पहुंचाई जाएंगी और जरूरी मदद दिलाने की कोशिश जारी है।

उन्होंने कहा कि किसान गांव की अर्थव्यवस्था का अहम सहारा है। मौजूदा संकट में किसानों को राहत देना जरूरी है और उन्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, धीरज रखना चाहिए। भेगडे ने भरोसा दिया कि किसानों के सवालों के लिए और उन्हें उनका हक की मदद दिलाने के लिए वे आखिर तक कोशिश करते रहेंगे।

अब किसानों की नजर इस पर टिकी है कि प्रभावित इलाकों का दौरा, फसल के नुकसान का आकलन और सरकारी मदद दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है। सूखे की गंभीरता को देखते हुए किसान जल्द फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

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