पिंपरी-चिंचवड में कचरा 500 टन बढ़ा, ठेकेदारों के भुगतान पर उठे सवाल
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पिंपरी-चिंचवड में रोज उठने वाला कचरा छह महीने में 1,500-1,600 टन से 2,100 टन के पार पहुंचा। स्वास्थ्य विभाग इसे मोशी डिपो बंद रहने का नतीजा बताता है, जबकि भाजपा पार्षद जांच मांग रहे हैं।
पिंपरी-चिंचवड में रोजाना जमा होने वाले कचरे के आंकड़े अचानक चर्चा में आ गए हैं। पिछले कुछ महीनों में इसमें 500 टन से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इससे शक जताया जा रहा है कि कहीं बड़ी वित्तीय गड़बड़ी तो नहीं हो रही और नगर निगम के करोड़ों रुपये ठेकेदारों की जेब में तो नहीं जा रहे। शहर के लोग और सामाजिक कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि छह महीने पहले जहां रोज 1,500 से 1,600 टन कचरा उठता था, वहां यह आंकड़ा अचानक 2,100 टन के पार कैसे चला गया।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि शहर में रोज करीब 1,500 टन कचरा निकलता है। लेकिन अभी जो कचरा उठाया जा रहा है, उसका अनुमान करीब 2,100 टन का है। ठेकेदारों को भुगतान कचरे के वजन और उनकी गाड़ियों के फेरों की संख्या के हिसाब से होता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि मोशी कचरा डिपो बंद होने के बाद जो कचरा जमा हो गया था, वह अब भी हटाया जा रहा है, इसीलिए आंकड़ा बढ़ा है।
शहर की आबादी 30 लाख से ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रोज करीब 1,500 टन गीला और सूखा कचरा इकट्ठा होता है। पिंपरी-चिंचवड म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PCMC) ने ठोस कचरा प्रबंधन कार्यक्रम के तहत घर-घर से कचरा उठाने और उसे मोशी डिपो तक पहुंचाने का ठेका BVG इंडिया लिमिटेड और एंटनी लारा को दिया है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में कचरा उठाने का काम बाधित हुआ है।
अलग-अलग विभागों के आंकड़े भी मेल नहीं खाते, जिससे उलझन और बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग रोज 1,500 टन कचरा उठाने की बात कहता है, जबकि PCMC की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट में रोज 1,800 टन दर्ज है। अब 2,100 टन का नया आंकड़ा आने से सवाल और गहरे हो गए हैं, क्योंकि हर विभाग अलग मात्रा बता रहा है।
भाजपा पार्षद विनोद नाढे ने कहा, "कचरे का वजन बढ़ने से ठेकेदारों की चांदी हो रही है। करदाताओं का पैसा लूटा जा रहा है। ऐसा लगता है कि निगम का कलेक्शन सेंटरों और कचरा गाड़ियों पर अब सख्त नियंत्रण नहीं रहा। स्वच्छ सर्वेक्षण के नाम पर विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी कचरे के वजन को लेकर करोड़ों का घोटाला होने दिया जा रहा है। निगम प्रशासन का यह दोहरा रवैया साफ दिखता है। कचरा बढ़ने की पूरी जांच होनी चाहिए। ये अतिरिक्त 500 टन कहां से आए, इसकी सच्चाई जल्द से जल्द सामने आनी चाहिए और जो अधिकारी और ठेकेदार जिम्मेदार निकलें, उन पर सख्त कार्रवाई हो।"
वहीं निगम अधिकारियों ने वजन के फर्क की दूसरी वजह बताई। PCMC के स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त प्रदीप ठेंगल ने कहा, "अभी जो कचरा रिपोर्ट हो रहा है वह करीब 2,000 टन दिखता है, लेकिन मोशी कचरा डिपो कुछ समय के लिए बंद था। शहर के अलग-अलग हिस्सों में जमा कचरा अब मोशी डिपो पहुंचाया जा रहा है, इसीलिए मात्रा बढ़ी हुई दिखती है। शहर में जमा सारा कचरा हट जाने के बाद रोज का वजन पहले जैसे स्तर पर लौट आएगा।"
ठेंगल ने यह भी कहा, "हम शहर की सीमा के बाहर से कचरा नहीं उठाते। जो लोग बाहर से कचरा शहर में लाकर डालते हैं, उन पर कार्रवाई की जाती है। कचरा उठाने का काम बाधित हुआ है, लेकिन एक हफ्ते में यह सामान्य हो जाएगा। जो नियम तोड़ेंगे, उन पर कार्रवाई होगी।"
जुड़वां शहरों के कचरे में क्या-क्या होता है? शहर में जमा कचरे का बड़ा हिस्सा प्लास्टिक का है, जिसमें प्लास्टिक की बोतलें, थैलियां और दूसरी चीजें शामिल हैं। बाकी कचरे में जैविक रूप से सड़ने वाला कचरा, बोरे, सैनिटरी नैपकिन, नारियल के छिलके, लकड़ी, पत्ते और बगीचे का दूसरा कचरा, कागज, चमड़ा, कपड़ा, बिजली का कचरा, चीनी मिट्टी का सामान, धातु, घरों से निकलने वाला खतरनाक कचरा, कांच, स्पंज और थर्माकोल भी आता है।
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