महाराष्ट्र महिला आयोग सात महीने से बिना अध्यक्ष, नियुक्तियों में देरी पर उठे सवाल
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राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष और छह सदस्यों के पद सात महीने से ज्यादा समय से खाली हैं। सरकार ने अब तक नई नियुक्ति का एलान नहीं किया है।
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग पिछले सात महीने से ज्यादा समय से बिना अध्यक्ष और बिना छह सदस्यों के चल रहा है। बार-बार मांग उठने के बावजूद सरकार ने अभी तक नए अध्यक्ष का नाम घोषित नहीं किया है और आयोग का गठन भी पूरा नहीं किया है। इससे महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अध्यक्ष का पद 20 मार्च को खाली हुआ था। उस दिन एनसीपी नेता रूपाली चाकणकर ने नासिक के अशोक खरात से जुड़े विवाद के बाद इस्तीफा दिया था। तब से किसी को उनकी जगह नहीं दी गई है।
आयोग में एक अध्यक्ष, छह सदस्य, एक सदस्य-सचिव और पदेन सदस्य के तौर पर पुलिस महानिदेशक (DGP) होने चाहिए। इस वक्त सिर्फ सचिव और DGP ही मौजूद हैं। महिलाओं के अधिकार, उत्पीड़न और भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनने में आयोग की अहम भूमिका होती है, इसलिए नेतृत्व न होने से शिकायतों के निपटारे पर चिंता जताई जा रही है।
यह खालीपन ऐसे वक्त है जब राज्य में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज की मांग और महिलाओं के खिलाफ दूसरे अपराधों के मामले सामने आ रहे हैं। पुणे में 34 साल की पायल झांबरे की मौत ने इस मुद्दे को और तेज कर दिया है। पायल 2 नवंबर को मुकुंद नगर में अपने घर पर मृत मिली थीं। परिवार का आरोप है कि पैसों और सोने की मांग को लेकर और बेटी के जन्म की वजह से पति और ससुराल वाले उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान करते थे। स्वारगेट पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने, क्रूरता और दहेज प्रतिषेध कानून के तहत मामला दर्ज किया है। पति और सास-ससुर को गिरफ्तार किया गया है और जांच चल रही है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने जुलाई में अपने पुणे दौरे के दौरान यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि इस बारे में वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात कर चुकी हैं और उन्हें पत्र भी लिखा है। उन्होंने सरकार से अध्यक्ष और सभी सदस्यों की नियुक्ति बिना देरी करने की अपील की थी। नियुक्तियां अब भी लंबित हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने इस देरी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आयोग राजनीतिक नियुक्तियों का मंच नहीं बनना चाहिए। उनकी मांग है कि अध्यक्ष किसी ऐसी स्वतंत्र महिला समाजसेविका को बनाया जाए जिसका किसी राजनीतिक दल से नाता न हो। देसाई ने कहा, "राज्य महिला आयोग में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। रूपाली चाकणकर के इस्तीफे के फौरन बाद सरकार को नया अध्यक्ष नियुक्त कर देना चाहिए था। किसी राजनीतिक नेता या पार्टी पदाधिकारी को यह जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। सात महीने बीत गए हैं और इतने अहम पद को खाली रखना गंभीर चूक है।"
बताया गया है कि प्रतिभा शिंदे, डॉ. ज्योति मेटे और एनसीपी के कुछ नेताओं के नामों पर चर्चा हुई है, लेकिन कोई आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। समझा जाता है कि राज्य की सत्ता-साझेदारी में यह पद एनसीपी के हिस्से में आता है, जिससे चयन को राजनीतिक रंग मिल गया है।
पुणे महानगर पालिका कामगार यूनियन की महासचिव और श्रमिक महिला मोर्चा की कार्यकर्ता मुक्ता मनोहर ने हालात पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "राज्य महिला आयोग काफी हद तक निष्क्रिय पड़ा है। उसे महिलाओं की रक्षा की सच्ची नीयत के बजाय राजनीतिक खींचतान और नियुक्तियों की देरी ने जकड़ रखा है।" उन्होंने आगे कहा, "महिलाओं के खिलाफ अपराध, छेड़छाड़ के मामले और बाल विवाह जैसे मुद्दे बढ़ रहे हैं, फिर भी प्रशासन में कोई जल्दबाजी नहीं दिखती। नेतृत्व को राजनीतिक सौदेबाजी का मोहरा नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए प्रतिबद्ध, साफ-सुथरा और संवेदनशील नेतृत्व चाहिए। कार्यकर्ताओं और नागरिकों को अब एकजुट होकर सरकार को जवाबदेह ठहराना चाहिए और तुरंत भरोसेमंद नियुक्तियों की मांग करनी चाहिए।"
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