इंटरपोल की मदद से दुबई में पकड़ा गया साइबर ठगी का आरोपी, 150 बैंक खाते इस्तेमाल
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पिंपरी-चिंचवड साइबर पुलिस ने 26 साल के आरोपी को दुबई से भारत लाकर गिरफ्तार किया। उस पर 150 से ज्यादा बैंक खातों से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का रैकेट चलाने का आरोप है।
पिंपरी-चिंचवड साइबर पुलिस ने इंटरपोल की मदद से चलाए गए ऑपरेशन में एक 26 साल के साइबर ठगी के संदिग्ध को भारत लाकर गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह दुबई में बैठकर सरहद पार साइबर ठगी करवाता था और ठगी का पैसा 150 से ज्यादा बैंक खातों के जरिए घुमाता था। पुलिस की जांच में एक कथित संगठित साइबर ठगी नेटवर्क सामने आया है, जिसमें बैंक खाते जुटाए जाते थे, ठगी की रकम उनमें मंगाई जाती थी और कमीशन काटकर नकद निकाल ली जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुमंत उर्फ नानू रवींद्र दासरे (26) के रूप में हुई है। वह पुणे के निगडी प्राधिकरण का रहने वाला है। उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी हुआ था और उसके बाद उसे दुबई में पकड़ा गया। फिर उसे भारत डिपोर्ट किया गया और मुंबई एयरपोर्ट पर सब-इंस्पेक्टर प्रवीण स्वामी की अगुवाई वाली टीम ने उसे हिरासत में लिया। इसी मामले में चिखली के तुषार अमराराम चौधरी (29) और आकुर्डी के आदर्श संतोष वाघमारे (27) को भी गिरफ्तार किया गया है।
साइबर सेल के प्रभारी सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर रविकिरण नाले ने बताया, "मामला पिंपरी-चिंचवड साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 317(2), 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज हुआ था। जांच के दौरान पुलिस को खबर मिली कि आरोपी विदेश से काम कर रहे हैं और साइबर ठगी के लेनदेन के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं।"
नाले ने आगे कहा, "जांच में सामने आया कि दासरे ने कथित तौर पर 6,000 दिरहम की महीने की तनख्वाह पर इस रैकेट में काम शुरू किया था। शुरू में उसका काम शेयर ट्रेडिंग और टास्क वाली ठगी की स्कीमों के लिए लोगों को फोन और मैसेज करना था। उसे पीड़ितों से जुटाई गई रकम का चार फीसदी कमीशन कथित तौर पर मिलता था।"
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) रोहिदास पवार ने कहा, "गिरफ्तार आरोपी रैकेट के तौर-तरीकों से वाकिफ हो गया था। कथित तौर पर उसने दूसरे आरोपियों से हाथ मिलाया और मुख्य ठगों के साथ साझेदारी में साइबर ठगी करने लगा। पुलिस को शक है कि उसे ठगी की कुल रकम का 20 फीसदी हिस्सा मिल रहा था।" पवार ने यह भी कहा, "हमने पाया कि चौधरी और वाघमारे ने कथित तौर पर 150 से ज्यादा बैंक खाते जुटाकर दासरे को दिए। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर अलग-अलग साइबर ठगी की स्कीमों से लोगों से ठगा गया पैसा मंगाने में हुआ। दासरे दुबई से लेनदेन का तालमेल बिठाता था और दोनों साथी पैसे को आगे भेजने और निकालने में मदद करते थे।"
मामले की जांच कर रहे अफसरों में शामिल सब-इंस्पेक्टर प्रवीण स्वामी ने कहा, "आरोपियों ने कथित तौर पर ठगी की रकम नकद निकाली, अपना कमीशन रखा और बाकी रकम दासरे के दिए बैंक खातों से आगे भेज दी। शुरुआती जांच बताती है कि इस नेटवर्क ने इन गतिविधियों से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम बनाई।"
पुलिस की कार्रवाई सब-इंस्पेक्टर प्रवीण स्वामी को भरोसेमंद सूत्रों से दुबई में दासरे के ठिकाने की पक्की जानकारी मिलने के बाद शुरू हुई। वरिष्ठ अफसरों की मंजूरी से उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी हुआ। फिर इंटरपोल से तालमेल के जरिए मुख्य आरोपी को दुबई में ढूंढकर हिरासत में लिया गया और भारत डिपोर्ट किया गया।
पुलिस ने यह भी पाया है कि दासरे का नाम पिंपरी-चिंचवड के मामले के अलावा हैदराबाद (तेलंगाना) और कालेवाड़ी में दर्ज साइबर क्राइम के मामलों से भी कथित तौर पर जुड़ा है। जांच अफसर अब पूरे नेटवर्क, बैंक खातों के स्रोत और कुछ और संदिग्धों के शामिल होने की गुंजाइश को खंगाल रहे हैं।
पुलिस कमिश्नर विनय कुमार चौबे ने कहा कि सरहद पार से चल रहे साइबर ठगी नेटवर्क से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया है कि बैंक खाते मुहैया कराकर और ठगों को पैसा इधर-उधर करने में मदद देकर साइबर क्राइम में हाथ बंटाने वालों पर कार्रवाई तेज की जाए। सब-इंस्पेक्टर प्रवीण स्वामी ने कहा, "जांच में सामने आया है कि आरोपी सिर्फ बैंक खाते नहीं दे रहे थे, बल्कि साइबर ठगी से आया पैसा घुमाने और निकालने में कथित तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। हम पूरे पैसे के लेनदेन की जांच कर रहे हैं और रैकेट में शामिल दूसरे लोगों की पहचान कर रहे हैं।"
दासरे को 4 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। साइबर पुलिस अब और गिरफ्तारियों की संभावना देख रही है। साथ ही दुबई से कथित तौर पर चल रहे कॉल सेंटरों, पैसों के लेनदेन और ठगी की रकम घुमाने में इस्तेमाल बैंक खातों के जाल की भी जांच हो रही है।
यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर विनय कुमार चौबे, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस डॉ. शशिकांत महावरकर, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस सारंग आवाड, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) रोहिदास पवार और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस रोहिणी बनसोडे के मार्गदर्शन में हुई। जांच में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर रविकिरण नाले, पुलिस इंस्पेक्टर दिगंबर गायकवाड और सब-इंस्पेक्टर प्रवीण स्वामी समेत कई अफसर शामिल रहे।
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