हडपसर-दापोडी जहरीली शराब कांड में CID की चार्जशीट, नौ गिरफ्तार आरोपियों पर मकोका
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पुणे के हडपसर-दापोडी जहरीली शराब कांड में 22 लोगों की मौत हुई थी। CID ने नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है, एक संदिग्ध अब भी फरार है।
पुणे, 30 अक्टूबर 2026: हडपसर-दापोडी जहरीली शराब कांड में राज्य की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने बुधवार को चार्जशीट दाखिल कर दी। इस कांड में इस साल 26 से 28 मई के बीच 22 लोगों की जान गई थी। चार्जशीट उन नौ आरोपियों के खिलाफ है, जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
एक संदिग्ध अभी भी फरार है। उसे पकड़ने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई गई है, जो फिलहाल उसकी तलाश में लगी है।
चार्जशीट महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत बनी विशेष अदालत में पेश की गई। इसी कानून के प्रावधान अगस्त 2026 में आरोपियों पर लगाए गए थे। CID ने नौ गिरफ्तार आरोपियों के साथ फरार संदिग्ध पर भी मकोका लगाया है।
CID के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुनील रामानंद ने बताया कि जांच में अवैध शराब की पूरी सप्लाई चेन सामने आई है। इसमें अवैध शराब की खरीद, उसमें मेथेनॉल की मिलावट और स्थानीय विक्रेताओं के जरिए उसकी बिक्री शामिल है।
आरोप है कि शराब उरुली कांचन के राधेश्याम प्रजापति से ली गई थी। इसके बाद योगेश रामचंद्र वहानकडे उर्फ सिकंदर राठोड़ ने कथित तौर पर उसमें मेथेनॉल मिलाया और फिर वह शराब स्थानीय विक्रेताओं को सप्लाई की गई।
जांचकर्ताओं ने मेथेनॉल की सप्लाई का सुराग भिवंडी में एक कंपनी के गोदाम तक भी निकाला। CID ने उस गोदाम पर और नवी मुंबई में कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा। कंपनी के मालिक अरुण चौबे (59) और उनके बेटे अभिषेक (34) को अवैध सप्लाई में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया।
एजेंसी ने जहरीली शराब की सप्लाई चेन और बिक्री से जुड़े दूसरे आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। रामानंद के मुताबिक दत्ता उर्फ भाऊ लोंढे को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे अवैध शराब बनाने, ढोने और बेचने वाले इस सिंडिकेट का कथित सरगना बताया गया है।
मौतों के बाद शुरुआत में हडपसर और दापोडी पुलिस ने अलग-अलग केस दर्ज किए थे। बाद में राज्य सरकार ने जांच CID को सौंप दी थी।
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