भीमाशंकर में पेड़ कटाई पर सतेज पाटील का सरकार पर वार
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कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने कर्जत-भीमाशंकर परियोजना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार अल निनो के असर और कम बारिश की बात करती है, तो दूसरी तरफ पर्यावरण के सारे नियम ताक पर रखकर ऐसी परियोजनाएं ले आती है। पाटील के मुताबिक, दुर्भाग्य से महाराष्ट्र में प्रकृति को उजाड़ने वाली परियोजनाएं आने लगी हैं।
पुणे जिले के भीमाशंकर इलाके में एक प्रस्तावित जलविद्युत ऊर्जा भंडारण परियोजना के लिए लाखों पेड़ काटे जाने का आरोप लग रहा है। पिछले चार से पांच दिन में भीमाशंकर जंगल इलाके के सैकड़ों बड़े पेड़ काट दिए गए, जिससे पूरे राज्य में गुस्सा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस परियोजना के लिए 3 लाख पेड़ काटे गए हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि भीमाशंकर की परियोजना और कर्जत पंप स्टोरेज परियोजना पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष इन परियोजनाओं को लेकर फेक नैरेटिव फैला रहा है। फडणवीस ने कहा कि झूठा नैरेटिव खड़ा करना महाराष्ट्र के खिलाफ काम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से किसी की रोजी-रोटी पर असर नहीं पड़ेगा, और अगर ऐसी हालत बनी तो राज्य सरकार उनका ठीक से पुनर्वास करेगी।
फडणवीस की इसी बात पर सतेज पाटील ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, "हमारा परियोजनाओं से विरोध नहीं है, लेकिन ऐसी परियोजनाएं आनी चाहिए जहां प्रकृति को नुकसान न हो।" पाटील ने डेटा सेंटर के आंकड़ों का भी जिक्र किया और कहा कि इस परियोजना के लिए लगने वाले पानी के इस्तेमाल पर भी चर्चा चल रही है। उनकी सलाह है कि राज्य में ऐसे उद्योग-धंधे आएं जिनसे रोजगार मिले और प्रकृति को नुकसान भी न हो।
दरअसल, गुजरात की टोरंट पावर कंपनी की प्रस्तावित जलविद्युत ऊर्जा भंडारण परियोजना के लिए कर्जत-भीमाशंकर जंगल इलाके में पेड़ों की कटाई हो रही है। स्थानीय लोगों के साथ राज्य के विपक्षी दलों ने भी इसका कड़ा विरोध किया है। स्थानीय लोगों को डर है कि इस परियोजना के लिए जंगल के करीब तीन लाख पेड़ काटे जाएंगे। इस मुद्दे पर महायुति सरकार पर पक्षपात का आरोप भी लगाया जा रहा है।
परियोजना के विरोध में स्थानीय लोगों ने 25 अक्टूबर को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे से मुलाकात की और उन्हें पूरी जानकारी दी। इसके बाद राज ठाकरे ने कहा कि वे कर्जत-भीमाशंकर इलाके का दौरा करके परियोजना का जायजा लेंगे और वहां सभा भी करेंगे।
पर्यावरण को बड़ा नुकसान होने की आशंका के चलते स्थानीय नागरिक और पर्यावरण प्रेमी विरोध कर रहे हैं। आरोप है कि जमीन मालिकों की चिंताओं और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को अनदेखा करके परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है। इससे भीमाशंकर इलाके के लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
यह प्रस्तावित परियोजना भीमाशंकर के साई डोंगर इलाके में टोरंट पावर कंपनी की ओर से बनाई जानी है। इस पर करीब 13 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसकी क्षमता तीन हजार मेगावॉट बताई गई है। तीन लाख से ज्यादा पेड़ कटने की वजह से इलाके की जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है। पर्यावरण प्रेमियों ने पक्षियों और वन्यजीवों का प्राकृतिक ठिकाना खत्म होने की आशंका जताई है। साथ ही पहाड़ की ढलान पर मिट्टी के संरक्षण, पानी के प्राकृतिक बहाव, पारंपरिक खेती और पर्यटन पर भी असर पड़ने की बात कही है।
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