भीमाशंकर अभयारण्य में पेड़ कटाई के दावे वन विभाग ने नकारे, रोहित पवार ने लगाए थे आरोप
वन विभाग ने शनिवार को कहा कि भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर अवैध पेड़ कटाई नहीं हो रही है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे: वन विभाग ने शनिवार को साफ किया कि भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर अवैध तरीके से पेड़ नहीं काटे जा रहे हैं। एक दिन पहले एनसीपी (सपा) के विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया था कि पंप्ड-स्टोरेज जलविद्युत प्रोजेक्ट के लिए पास के सैंदोंगर जंगल में हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। उसके बाद विभाग की यह सफाई आई है।
पुणे के वन संरक्षक आशीष ठाकरे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से सोशल मीडिया और दूसरी जगहों पर जो खबरें घूम रही हैं, वे गलत हैं। विभाग ने कहा, "भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर ऐसी कोई अवैध पेड़ कटाई नहीं हो रही है।" विभाग ने लोगों से इस स्पष्टीकरण पर ध्यान देने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
लेकिन विभाग की विज्ञप्ति में सिर्फ अभयारण्य की बात है। पवार के आरोप रायगढ़ जिले की कर्जत तहसील के सैंदोंगर जंगल इलाके को लेकर हैं, जो अभयारण्य के बगल में है। उस सटे हुए इलाके में पेड़ कट रहे हैं या नहीं, इस पर विभाग की विज्ञप्ति में कुछ नहीं कहा गया है।
पवार ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि सैंदोंगर इलाके में 233 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर 32,000 से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने चेताया कि इस कटाई से वन्यजीवों के ठिकानों, जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस जंगल में भौंकने वाला हिरण, भारतीय विशाल गिलहरी, तेंदुए, जंगली सूअर, ऊदबिलाव और पक्षियों की कई प्रजातियां रहती हैं। उन्हें डर है कि कटाई से पक्षियों के घोंसले, अंडे और चूजे खत्म हो सकते हैं। औषधीय पौधों और आसपास के पूरे स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र पर भी खतरा आ सकता है।
पवार ने सुरंग बनाते समय होने वाले ब्लास्टिंग पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक इससे पहाड़ों के कुछ हिस्से कमजोर पड़ सकते हैं। पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में विकास के खतरों की बात करते हुए उन्होंने मालीण और इरशालवाड़ी की आपदाओं का जिक्र किया। उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पवार ने कहा कि वे जलविद्युत प्रोजेक्ट या उससे जुड़ी कंपनी के खिलाफ नहीं हैं। उन्हें एतराज प्रोजेक्ट की जगह पर है, जिसे उन्होंने पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील बताया। वे चाहते हैं कि प्रोजेक्ट ऐसी जगह ले जाया जाए जहां पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने सरकार से जगह पर फिर से विचार करने की मांग की। साथ ही आम लोगों, पर्यावरण संगठनों और मीडिया से अपील की कि जंगलों और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले संभावित असर के बारे में आवाज उठाएं।
पवार ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री 3 नवंबर को इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने वाले हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या विकास जंगलों को बचाने की कीमत पर होना चाहिए।
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