भीमाशंकर अभयारण्य में अवैध पेड़ कटाई की बात वन विभाग ने नकारी, रोहित पवार ने उठाए थे सवाल
वन विभाग ने कहा कि भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर अवैध पेड़ कटाई नहीं हो रही। विधायक रोहित पवार ने पास के सैंदोंगर जंगल में हजारों पेड़ कटने का आरोप लगाया था।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे, 24 अक्टूबर 2026: भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर अवैध तरीके से पेड़ काटे जाने की खबरों को वन विभाग ने गलत बताया है। एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया था कि अभयारण्य से सटे सैंदोंगर जंगल इलाके में पंप्ड-स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। इसी के बाद वन विभाग ने सफाई दी है।
पुणे के वन संरक्षक आशीष ठाकरे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों पर यह खबर चल रही थी कि एक कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए अभयारण्य के भीतर अवैध पेड़ कटाई हो रही है। यह खबर सही नहीं है।
वन विभाग ने साफ कहा, "भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर ऐसी कोई अवैध पेड़ कटाई नहीं हो रही है।" विभाग ने नागरिकों से अपील की कि वे इस स्पष्टीकरण को ध्यान में रखें और प्रशासन का सहयोग करें।
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पवार ने रायगढ़ जिले की कर्जत तहसील में सैंदोंगर जंगल इलाके की बात उठाई थी, जो भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से लगा हुआ है। उनका आरोप था कि वहां 233 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर 32,000 से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं।
पवार ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पंप्ड-स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ कट रहे हैं। इससे वन्यजीवों के रहने की जगह, जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान हो सकता है, ऐसा उन्होंने कहा।
उनके मुताबिक इस जंगल में कई तरह के जानवर रहते हैं। इनमें महाराष्ट्र का राज्य पशु बार्किंग डियर (काकड़), तेंदुए, जंगली सूअर, ऊदबिलाव और पक्षियों की कई प्रजातियां शामिल हैं। उन्होंने यह चिंता भी जताई कि पेड़ कटने से पक्षियों के घोंसले, अंडे और चूजे नष्ट हो सकते हैं और औषधीय पौधों समेत स्थानीय पारिस्थितिकी को भी खतरा है।
पवार ने सुरंग बनाने के दौरान होने वाली ब्लास्टिंग पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि इससे पहाड़ों के कुछ हिस्से कमजोर पड़ सकते हैं। उन्होंने मालिन और इरशालवाड़ी की आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में विकास के अपने खतरे हो सकते हैं। ये बातें पवार ने अपनी पोस्ट में कही हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पवार ने कहा कि वे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट या संबंधित कंपनी के खिलाफ नहीं हैं। उन्हें एतराज प्रोजेक्ट की जगह पर है, जिसे उन्होंने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील बताया। उन्होंने मांग की कि प्रोजेक्ट को ऐसी जगह ले जाया जाए जहां पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने सरकार से जगह पर दोबारा विचार करने को कहा। साथ ही नागरिकों, पर्यावरण संगठनों और मीडिया से अपील की कि वे जंगलों और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाएं। पवार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन 3 नवंबर को प्रधानमंत्री करने वाले हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या जंगल बचाने की कीमत पर विकास होना चाहिए।
वन विभाग के बयान में खास तौर पर भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर अवैध पेड़ कटाई की खबरों से इनकार किया गया है। वहीं पवार के आरोप अभयारण्य से सटे सैंदोंगर जंगल इलाके को लेकर हैं।
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