तुकाराम मुंढे बोले: ड्रिंक वाली बर्थडे पार्टी में बेटा नहीं जाता, घर में यही संस्कार है
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राज्य के अन्न व औषध विभाग (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने कहा है कि उनके और उनके बच्चों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत होती है और दोनों तरफ से कोई बात छुपाई नहीं जाती। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बच्चों के दोस्तों की बर्थडे पार्टियों में शराब परोसी जाती है और ऐसी जगह उनका बेटा कभी नहीं जाता। मुंढे के मुताबिक इस बारे में बेटे की सोच बिल्कुल साफ है।
मुंढे ने बताया कि उनके बेटे और बेटी, दोनों के दोस्त हैं। ये बर्थडे पार्टियां अक्सर बड़ी होती हैं। वहां जाना है या नहीं, यह फैसला खुद लेना पड़ता है। उनके मुताबिक कुछ जगहों पर बच्चे ड्रिंक करते हैं। बेटा साफ कहता है कि जो लोग ड्रिंक लेते हैं, उनके बर्थडे में वह नहीं जाएगा।
बेटे का अपना बर्थडे घर पर होता है या कहीं छोटे पैमाने पर। उसमें आठ-दस दोस्त आते हैं और सब कुछ सीमित दायरे में रहता है। मुंढे ने कहा कि बच्चों की यह सोच सिर्फ समझाने से नहीं बनती। वे खुद ड्रिंक नहीं करते और उनके घर में भी कोई नहीं करता, इसलिए इस पर पैसा खर्च नहीं होता। जब घर में कोई ड्रिंक लेता ही नहीं, तो किसी को पिलाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि उनके घर में यही संस्कृति है।
बच्चों की पढ़ाई के बारे में मुंढे ने कहा कि उसके लिए जितना भी पैसा लगे, वे तैयार हैं। उन्हें नहीं पता कि आगे चलकर उनके बच्चे ज्यादा कमाएंगे या कम। पर उन्हें एक बात का भरोसा है कि वे जो भी कमाएंगे, अपनी मेहनत से और सही रास्ते से कमाएंगे। मुंढे के अनुसार इस बात की उन्हें खुशी है।
इसी इंटरव्यू में मुंढे ने सोलापुर के कलेक्टर रहते हुए अचानक हुए अपने तबादले पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सोलापुर में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने कई अहम फैसले लिए थे। उनमें से एक फैसला सिद्धेश्वर की यात्रा को लेकर था। यात्रा के इंतजाम में उन्होंने कुछ बदलाव किए, इमरजेंसी व्यवस्था लागू की और कहा कि सिद्धेश्वर की यात्रा मैदान में ही होगी।
मुंढे के मुताबिक इस पर काफी हंगामा हुआ और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि उनके तबादले की यही सबसे बड़ी वजह थी। फिर भी आज तक सिद्धेश्वर की यात्रा के लिए उनकी बनाई इमरजेंसी व्यवस्था ही इस्तेमाल हो रही है।
मुंढे ने बताया कि सिद्धेश्वर की यात्रा जनवरी महीने में संक्रांति के दिन होती है। उन्होंने कहा कि उनके फैसले से पहले और बाद के जनवरी महीनों का डेटा निकालकर देख लिया जाए। जनवरी में सोलापुर के अस्पताल ब्रॉन्कायटिस के मरीजों से भर जाते थे। डेटा देखने पर तब और अब के जनवरी का फर्क साफ दिखेगा। मुंढे ने कहा कि उनके फैसले से कई लोगों की जान बची।
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