बुधवार, 4 नवंबर 2026

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16 आदिवासीबहुल जिलों में आधार और जन्म प्रमाणपत्र की खास मुहिम, बावनकुले के निर्देश

16 आदिवासीबहुल जिलों में आधार और जन्म प्रमाणपत्र की खास मुहिम, बावनकुले के निर्देश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
समाज PT24 समाज डेस्क

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंत्रालय की बैठक में कागजात से वंचित आदिवासियों के लिए मुहिम, वन हक दावों और बंधुआ मजदूरी से छूटे परिवारों के पुनर्वास पर निर्देश दिए।

महाराष्ट्र सरकार आदिवासीबहुल इलाकों के उन पात्र लोगों के लिए खास मुहिम चलाने जा रही है, जिनके पास आधार कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र नहीं हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को बताया कि यह मुहिम राज्य के 16 आदिवासीबहुल जिलों में चलेगी और इसका मकसद इन लोगों तक जरूरी कागजात पहुंचाना है।

बावनकुले मंत्रालय में एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में आदिवासी, मजदूर, महिलाएं, बच्चे और कामगारों से जुड़ी लंबित समस्याओं पर चर्चा हुई। श्रमजीवी संगठन और अखिल भारतीय किसान सभा के निवेदन के बाद यह बैठक बुलाई गई थी।

मंत्री ने निर्देश दिया कि हर आदिवासी जिले को अलग से आधार पंजीकरण किट दी जाए और जन्म पंजीकरण के लिए खास शिविर लगाए जाएं। कागजात न होने की वजह से कोई आदिवासी निवासी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से बाहर न रह जाए, इसके लिए जिलाधिकारियों से तय समय के भीतर कार्य योजना बनाने को कहा गया है।

बावनकुले ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आदिवासी संगठनों से अपील की कि वे जागरूकता फैलाएं, जनसभाएं करें और लोगों को सरकारी सुविधाओं के लिए जरूरी कागजात पूरे करने में मदद करें। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि मुहिम को लागू करने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वन हक के लंबित व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों को निपटाने के लिए भी मंत्री ने अधिकारियों को तय समयसीमा में मुहिम चलाने को कहा है। संबंधित समितियों से ग्रामसभा के कागजात, कब्जे के सबूत और कानूनी रूप से मान्य दूसरे दस्तावेज जांचकर सही फैसला लेने को कहा गया है। सैटेलाइट तस्वीरें और तकनीकी जानकारी भी पूरक सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकती हैं।

डहाणू, तलासरी और दूसरे संबंधित इलाकों में जिन किराएदारों के नाम दर्ज नहीं हैं या जिन्हें बेदखल किया जा चुका है, उनके मामले सुलझाने के लिए बावनकुले ने खास मुहिम शुरू करने के निर्देश दिए। तकनीकी अड़चनें दूर करने के लिए जरूरी कानूनी प्रावधान देखकर प्रस्ताव पेश करने को पालघर के जिलाधिकारी से कहा गया है।

ठाणे, पालघर, नाशिक, पुणे, रायगढ़ और अहिल्यानगर जिलों में बंधुआ मजदूरी से छूटे लोगों और उनके परिवारों के लिए भी मंत्री ने व्यापक पुनर्वास योजना बनाने को कहा। इस योजना में रिहाई का प्रमाणपत्र, तुरंत मदद, आर्थिक पुनर्वास, मकान, स्वास्थ्य सेवा, बच्चों की पढ़ाई और रोजी-रोटी के मौके शामिल होने चाहिए।

ठाणे और पालघर जिलों के आबादी क्षेत्र के लंबित प्रस्तावों का हल निकालने के लिए राजस्व, वन, ग्रामीण विकास और आदिवासी विकास विभागों की अलग बैठक बुलाई जाएगी। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे वन भूमि से जुड़े मामलों समेत प्रस्तावों की खामियां, लंबित मंजूरियां और अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियां पहचानें और मंजूरी में तेजी लाएं।

आदिवासी इलाकों के जिलाधिकारी ऐसी समितियां बनाएंगे, जो बुनियादी हक, मजदूरों के हक, सरकारी योजनाओं और जरूरी सुविधाओं से वंचित परिवारों को पहचानेंगी। इन समितियों में जिला परिषद, जिलाधिकारी दफ्तर, आदिवासी विकास दफ्तर, नगरपालिका और निवासी उपजिलाधिकारी दफ्तरों के प्रतिनिधि होंगे।

इस पहल की समीक्षा अगले छह महीनों में की जाएगी। पात्र परिवारों को लाभ मिले, इसके लिए अधिकारियों से विभागों में तालमेल बिठाकर एक समान जानकारी का ढांचा और तय कार्यप्रणाली बनाने को भी कहा गया है। मंत्री ने अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र के लिए जरूरी कागजात, आवेदन की प्रक्रिया, सक्षम प्राधिकरण, समयसीमा और अपील की व्यवस्था समझाने वाली आसान मार्गदर्शिका बनाने के निर्देश भी दिए।

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