बोरीवली में एमजी हेक्टर की टक्कर से ढाई साल के बच्चे की मौत, मां भी घायल
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बोरीवली वेस्ट में एमजी हेक्टर ने कथित तौर पर बच्चे की ट्राइसाइकिल को टक्कर मारी। आरोपी डॉक्टर गिरफ्तार हुआ और उसे जमानत मिल गई।
मुंबई के बोरीवली वेस्ट में बुधवार (4 नवंबर) की रात एक एमजी हेक्टर एसयूवी ने कथित तौर पर एक बच्चे की ट्राइसाइकिल को टक्कर मार दी। इस हादसे में ढाई साल के बच्चे की जान चली गई। उसकी मां भी घायल हो गईं। पुलिस के मुताबिक बच्चा अपनी मां के साथ घर के बाहर खेल रहा था। हादसा रात करीब 9.45 बजे बोरीवली वेस्ट में चंदावरकर रोड पर ओम शांति चौक के पास हुआ।
पुलिस ने इस मामले में 48 साल के डॉक्टर समीर नितिन परेख को गिरफ्तार किया। वे एसयूवी चला रहे थे और उन पर आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जमानत मिल गई। जमानत के बाद मजिस्ट्रेट ने पुलिस से सवाल किया कि आरोपी पर सिर्फ जमानती धाराएं क्यों लगाई गईं।
शिकायत बच्चे की मां ने दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे बेटे को खेलाने बाहर ले गई थीं। घर लौटते वक्त दोनों सड़क पार कर रहे थे, तभी उन्होंने एक लाल रंग की एमजी हेक्टर को अपनी तरफ आते देखा। अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि गाड़ी बहुत तेज रफ्तार से और लापरवाही से चलाई जा रही थी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसयूवी यू-टर्न ले रही थी, तभी उसने बच्चे की ट्राइसाइकिल को टक्कर मारी। अधिकारी के शब्दों में, "टक्कर से मां जमीन पर गिर गईं, जबकि ट्राइसाइकिल पास से गुजर रही एक किआ कार की तरफ घिसट गई। फिर एसयूवी किआ के बाईं तरफ जा टकराई और बच्चा दोनों गाड़ियों के बीच फंस गया। जांच के लिए हमने दोनों गाड़ियां जब्त कर ली हैं।"
पुलिस का कहना है कि ड्राइवर घायल बच्चे को उठाकर कांदिवली वेस्ट के शताब्दी अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। कोर्ट में आरोपी के वकील ने दावा किया कि परेख मौके से भागे नहीं थे, बल्कि बच्चे को खुद अस्पताल लेकर गए थे।
कोर्ट की कार्रवाई के दौरान बोरीवली पुलिस ने आरोपी की दो दिन की कस्टडी मांगी। खबर है कि एडिशनल मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट शिवदत्त एम पाटिल ने जांच अधिकारी से पूछा कि कस्टडी मांगते वक्त सिर्फ जमानती धाराएं क्यों लगाई गईं। बताया गया है कि मजिस्ट्रेट ने पूछा, "क्या पुलिस आरोपी की मदद करने की कोशिश कर रही है?" उन्होंने जांच अधिकारी सागर पवार को नोटिस भी जारी किया। इसके बाद परेख को बिना बॉन्ड के जमानत दे दी गई।
बच्चा अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और दादा-दादी के साथ रहता था। पिता एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं और मां गृहिणी हैं। बताया गया है कि परिवार साथ में दिवाली मनाने की तैयारी में था। बच्चे का अंतिम संस्कार दहिसर में किया गया।
पुलिस ने 5 नवंबर को एफआईआर दर्ज की है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 (लापरवाही से गाड़ी चलाना), 106(1) (लापरवाही से मौत का कारण बनना) और 125(b) (जान खतरे में डालने वाला काम) लगाई गई हैं। इसके साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 भी लगी है, जो खतरनाक ड्राइविंग से जुड़ी है। मामले की आगे जांच जारी है।
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