सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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जेजे अस्पताल के बाहर इंटर्न का मौन प्रदर्शन, 18,000 की जगह 30,000 स्टायपेंड की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

ASMI से जुड़े इंटर्न डॉक्टरों ने मानधन 18,000 से 30,000 रुपये करने की मांग की है और 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी दी है।

मुंबई के जेजे अस्पताल के बाहर गुरुवार को एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर चुपचाप सड़क पर उतरे। न कोई नारेबाजी हुई, न भाषण। इंटर्न की सीधी मांग है कि उनका महीने का स्टायपेंड 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। यह प्रदर्शन एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स यानी ASMI की अगुवाई में हुआ। शहर के महानगरपालिका अस्पतालों में काम करने वाले कई दूसरे डॉक्टर भी इंटर्न के साथ खड़े दिखे। उन्होंने ड्यूटी के दौरान बाजू पर काली पट्टी बांधकर समर्थन जताया।

ASMI का कहना है कि यह मांग आज की नहीं है। संगठन के मुताबिक वह 2024 से अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रहा है, पर राज्य सरकार सुन ही नहीं रही। संगठन का दावा है कि पिछले तीन महीनों में ही 23 चिट्ठियां भेजी गईं, फिर भी किसी ने जवाब नहीं दिया।

ASMI के सचिव डॉ. रमण पवार ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने बताया कि सितंबर में संबंधित विभागों को जवाब देने के लिए 15 से 20 दिन का वक्त दिया गया था, मगर कुछ नहीं आया। पवार ने कहा, "बीस दिन बाद, 5 अक्टूबर को, हमने पुनर्विचार पत्र दिया; मेरे पास उसके सारे प्रिंटआउट और स्वीकृति की कॉपियां हैं।" उनका कहना है कि कॉलेजों के डीन और दूसरे अफसरों को भी कई पत्र दिए गए। भरोसा तो मिला, पर जमीन पर कोई कदम नहीं उठा।

संगठन की मांग सिर्फ 30,000 रुपये तक सीमित नहीं है। वह चाहता है कि हर साल तीन फीसदी की बढ़ोतरी भी तय हो। पवार के मुताबिक खाने, रहने और आने-जाने का खर्च लगातार चढ़ रहा है, जबकि इंटर्न के कंधों पर मरीजों के इलाज की भी बड़ी जिम्मेदारी रहती है। इसलिए संगठन सरकार से लिखित भरोसा और फैसले की तय समयसीमा चाहता है।

प्रदर्शन में शामिल इंटर्न डॉ. शिवानी शेलार ने कहा कि वे बस वाजिब मेहनताना मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई इंटर्न की पोस्टिंग पालघर जैसी जगहों पर होती है, जहां खाना और रहना अपनी जेब से करना पड़ता है। उनका सवाल था कि सिर्फ 18,000 रुपये में महीना कैसे कटेगा। एक और इंटर्न डॉ. शुभम शेजुल ने कहा कि बार-बार अर्जी देने पर भी कुछ हासिल नहीं हुआ। उनकी मांग है कि सरकार लिखकर दे और बताए कि बढ़ोतरी किस तारीख से लागू होगी। उन्होंने यह भी कहा कि रात की शिफ्ट देर तक खिंच जाए तो कैब का किराया देना भी भारी पड़ता है।

पवार ने दूसरे राज्यों से तुलना भी रखी। ASMI के मुताबिक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में इंटर्न को महीने के 25,000 रुपये मिलते हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर में यह रकम 30,000 रुपये है। पवार का तर्क है कि देश की जीडीपी में महाराष्ट्र का बड़ा हाथ है, फिर भी कई दूसरे राज्य ज्यादा स्टायपेंड देते हैं।

अब संगठन ने अल्टीमेटम दे दिया है। पवार ने कहा कि अगर 1 नवंबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो 2 नवंबर से इंटर्न पूरे राज्य में हड़ताल पर चले जाएंगे। उनके शब्द थे, "फिलहाल हम मौन आंदोलन कर रहे हैं। हमने अपने पत्र में लिखा है कि 1 नवंबर से पहले इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हम 2 नवंबर से हड़ताल पर जाएंगे।" उन्होंने कहा कि इंटर्न के पास आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। यह आंदोलन अकेले मुंबई का नहीं है, पूरे महाराष्ट्र के मेडिकल इंटर्न इससे जुड़ रहे हैं।

अगर बात नहीं बनी तो राज्य के करीब 8,000 मेडिकल इंटर्न हड़ताल में उतर सकते हैं। ASMI के अध्यक्ष डॉ. ऋषिकेश सांगळे ने कहा, "इस आंदोलन से राज्य भर के 42 सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से जुड़े 28 प्रमुख निजी अस्पतालों की सेवाओं पर असर पड़ सकता है।"

संगठन ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ से इस मामले में दखल देने की अपील की है। जानकारी के मुताबिक ASMI का एक प्रतिनिधिमंडल इस हफ्ते के आखिर में मंत्री से मिल सकता है, ताकि स्टायपेंड बढ़ाने पर बातचीत हो सके।

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