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दादर में PEATA का सेमिनार, OC के लिए BMC की माफी योजना समझने उमड़े सोसायटी वाले

दादर में PEATA का सेमिनार, OC के लिए BMC की माफी योजना समझने उमड़े सोसायटी वाले तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

मंगलवार को दादर में हुए मुफ्त जागरूकता सेमिनार में सोसायटी प्रतिनिधि और फ्लैट मालिक बड़ी तादाद में पहुंचे।

मुंबई में करीब 19,000 इमारतें ऐसी हैं जिनके पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं है। इन्हीं के लिए BMC की माफी योजना (amnesty scheme) पर मंगलवार को दादर में एक मुफ्त जागरूकता सेमिनार हुआ। सेमिनार PEATA (Practising Engineers, Architects and Town Planners Association) ने रखा था। हॉल में सोसायटियों के प्रतिनिधि और फ्लैट मालिक बड़ी संख्या में पहुंचे। PEATA ने यह पहल बिना कोई फीस लिए, आम लोगों के भले के लिए की।

मुंबई उपनगर के पालक मंत्री आशीष शेलार ने कार्यक्रम में भाषण दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित सभी निवासियों को OC मिलना बहुत जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि फंसे हुए निवासियों तक पहुंचने के लिए वार्ड स्तर पर मुहिम चलाई जाए। वहीं आयोजकों और नगर निगम के प्रतिनिधियों का कहना था कि लोगों तक जानकारी पहुंचाना नगर निगम की ही जिम्मेदारी है। उन्होंने मिसाल दी कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जिस तरह टैक्स माफी योजनाओं का जोर-शोर से प्रचार करता है, वैसा ही यहां भी होना चाहिए।

कार्यक्रम के बाद नागरिक कार्यकर्ता और Voice of Kalina-ALM के उपाध्यक्ष लॉय डायस ने एक विस्तृत बयान जारी किया। डायस 89 साल के हैं और रिटायर्ड सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का फेल होना तय था। इसकी दो वजहें उन्होंने गिनाईं: लोगों को पात्रता की शर्तों की बिल्कुल जानकारी नहीं है, और योजना की कट-ऑफ तारीख बहुत सख्त है।

डायस ने सवाल उठाया, "योजना का फेल होना तय था, क्योंकि पात्रता की शर्तों के बारे में लोगों को कुछ पता ही नहीं है, और उससे भी बड़ी बात यह कि यह सिर्फ उन इमारतों के लिए है जो 17 नवंबर 2016 से पहले बनकर तैयार हुईं और जिनमें लोग रहने लगे थे। 31 मार्च 2026 तक बनी और बसी सारी इमारतें अर्जी देने की हकदार क्यों न हों?"

डायस ने चार सुधारों की मांग रखी। पहली, 31 मार्च 2026 तक जिन इमारतों में लोग रहने लगे हैं, उन सबको पात्रता में शामिल किया जाए। दूसरी, पीड़ित निवासियों पर लगाया गया भारी आर्थिक जुर्माना माफ किया जाए। तीसरी, जब तक मामले निपट नहीं जाते, तब तक डिफॉल्टर बिल्डरों और आर्किटेक्टों का रजिस्ट्रेशन रोका जाए। चौथी, Buildings & Proposal Department की अंदरूनी फाइलों का ऑडिट हो और हर वार्ड ऑफिस में नोडल अधिकारी तैनात किए जाएं।

अर्जी भरने वालों की मदद के लिए PEATA ने हेल्पडेस्क भी शुरू किया है। उसका ईमेल [email protected] है। आवेदकों को और रास्ता दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम चलाने का ऐलान भी हुआ है। जुड़े हुए लोगों को उम्मीद है कि PEATA की तकनीकी मदद और सॉफ्टवेयर में हुए बदलावों से अर्जियों की गिनती, जो अब तक इकाई अंकों में है, उससे आगे बढ़ेगी।

PEATA के अध्यक्ष योमेश राव के मुताबिक सेमिनार से हाउसिंग सोसायटियों को अर्जी की प्रक्रिया में फौरन काम आने वाले हल मिले। पहला, सेमिनार में रखी गई बातों के बाद BMC ने अपने AutoDCR सॉफ्टवेयर से एक ऑटोमैटिक रोक हटा दी है, इसलिए जमीन की मालिक सोसायटियां अब सीधे अर्जी जमा कर सकती हैं। दूसरा, जिस सोसायटी के पास जमीन का मालिकाना हक है, या जिस आवेदक के पास जमीन मालिक या डेवलपर का NOC है, वह अर्जी देने के लिए पूरी तरह पात्र है। तीसरा, अलग-अलग फ्लैट मालिक और जमीन की मालिक न होने वाली सोसायटियां अभी अटकी हैं, क्योंकि उन्हें Urban Development Department के साफ निर्देशों का इंतजार है। चौथा, माफी योजना में अर्जी देने से फ्लैट मालिकों के कानूनी हक पर कोई असर नहीं पड़ता। वे खर्च वसूलने के लिए डिफॉल्टर बिल्डरों के खिलाफ कंज्यूमर फोरम या सिविल कोर्ट में दावा जारी रख सकते हैं।

राव ने कहा, "माफी योजना निवासियों के लिए अपनी प्रॉपर्टी को नियमित कराने की एक अहम खिड़की है, लेकिन तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने और अपने घर को ठीक कराने के लिए सोसायटी के सदस्यों को खुद आगे आकर पहल करनी होगी।"

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