मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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साटम के ऐतराज पर BMC ने हटाया दीया मिर्जा का वीडियो, मुंबई की राजनीति में उबाल

साटम के ऐतराज पर BMC ने हटाया दीया मिर्जा का वीडियो, मुंबई की राजनीति में उबाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के कुछ घंटों बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने अभिनेत्री दीया मिर्जा का दिवाली जागरूकता वीडियो हटा दिया। इस पर महापौर, विपक्ष और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।

मुंबई में दिवाली से पहले प्रदूषण घटाने का एक सरकारी प्रचार अब राजनीतिक झगड़े में बदल गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अभिनेत्री दीया मिर्जा का वह वीडियो अपने सोशल मीडिया पेजों से उतार दिया, जिसमें वे पटाखों और शोर से दूर रहकर त्योहार मनाने को कह रही थीं। वीडियो रविवार को हटा। इससे ठीक पहले मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने इस पर आपत्ति जताई थी और कुछ ही घंटों में निगम ने कदम उठा लिया।

यह वीडियो निगम की उस मुहिम का हिस्सा था, जो लोगों को हवा और आवाज़ के प्रदूषण के बारे में समझाती है और बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों पर चलने की सलाह देती है। इसी मुहिम में माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड, क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे और हर्षदा खानविलकर के वीडियो भी हैं। ये सब BMC के X और इंस्टाग्राम पेजों पर अब भी चल रहे हैं। यानी पूरी मुहिम में सिर्फ एक चेहरा हटाया गया है, और सवाल यहीं से उठ रहे हैं कि क्या निगम का तरीका बदल गया है।

साटम ने X पर BMC के आधिकारिक हैंडल को टैग करके लिखा था: "@mybmc हमें @deespeak से यह सीखने की जरूरत नहीं कि दिवाली कैसे मनाई जाए। हमारी परंपराएं हमारी संस्कृति में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं।" एक दूसरी रिपोर्ट में यही बात इन शब्दों में दर्ज है: "हमें दिवाली कैसे मनानी है, यह दीया मिर्जा से सीखने की जरूरत नहीं है। हमारी परंपराएं हमारी संस्कृति में गहरी जमी हैं।" पोस्ट के कुछ घंटे बाद निगम ने वीडियो हटाया। निगम की कमान महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े के हाथ में है। अब तक BMC ने नहीं बताया कि वीडियो किस वजह से हटा। यह भी साफ नहीं है कि साटम की आपत्ति ही कारण थी या कुछ और। बाकी वीडियो रखे जाएंगे या हटेंगे, इस पर भी निगम चुप है।

बाद में संपर्क करने पर साटम ने कहा कि उनका एतराज किसी धर्म या पहचान से नहीं, राष्ट्रवाद से जुड़ा है। उन्होंने दीया मिर्जा को "भारत-विरोधी गिरोह" का हिस्सा बताया और आरोप लगाया कि अभिनेत्री देश को अस्थिर करने की कोशिश में लगी हैं। साटम के शब्दों में, "हमें दिवाली मनाने के मामले में उनसे उपदेश की जरूरत नहीं थी। चूंकि विपक्ष भी भारत-विरोधी ताकतों से हाथ मिला चुका है, इसलिए अराजकता फैलाने की इस कोशिश में अपने साथी के प्रति उसका समर्थन या हमदर्दी स्वाभाविक है।"

दीया मिर्जा ने अपनी सफाई में कहा कि वीडियो का मकसद लोगों को जिम्मेदारी से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित करना और प्रदूषण पर जागरूकता बढ़ाना था। उन्होंने कहा, "दिवाली अंधेरे पर रोशनी, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर उम्मीद की जीत का त्योहार है। यह वीडियो जनहित में जागरूकता के लिए रिकॉर्ड किया गया था, ताकि दिवाली ज्यादा सेहतमंद और समझदारी से मनाई जाए। वायु प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य का मामला है और इसे घटाने की हर कोशिश सबके लिए बेहतर पर्यावरण की ओर एक कदम है।"

सोमवार को मुंबई की महापौर ऋतु तावडे ने इस पर बात की। उनका कहना था कि किसी भी सितारे को वीडियो के लिए पैसा नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, कौन-कौन से लोग शामिल हो रहे हैं, इसकी सूची पहले उन्हें दिखाई जानी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन के अफसरों ने वीडियो सीधे निगम के पोर्टल पर चढ़ा दिए। महापौर ने माना, "इसमें प्रशासन की गलती जरूर है।" जब उनसे पूछा गया कि निशाने पर दीया मिर्जा ही क्यों हैं, तो उन्होंने कहा कि मुंबई सब धर्मों और जातियों को साथ लेकर चलने वाला शहर है। फिर भी उन्होंने इसे हिंदुत्व का मुद्दा बताया और कहा कि हिंदुत्व के खिलाफ बोलने वाले को, उसका धर्म, पंथ या जाति कुछ भी हो, भाजपा कार्यकर्ता कड़ा जवाब देंगे।

तावडे ने कहा, "दीया मिर्जा पहले नर्मदा परियोजना, UCC और प्रधानमंत्री मोदी के बयानों तक का विरोध कर चुकी हैं। दीया मिर्जा को हिंदुओं को यह नहीं बताना चाहिए कि दिवाली कैसे मनाएं। उनका चुनिंदा एजेंडा साफ है और यह भी साफ है कि वह हिंदुत्व के खिलाफ हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि आगे से दीया मिर्जा को BMC के किसी सरकारी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा। खबरों के मुताबिक उपमहापौर संजय घाडी ने अभिनेत्री का साथ दिया है, मगर तावडे ने दावा किया कि वे सभी भाजपा पार्षदों की राय ही सामने रख रही हैं।

विपक्ष की ओर से BMC में नेता और पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर ने प्रशासन के फैसले पर सीधा सवाल दागा। उन्होंने कहा, "अमित साटम आखिर हैं कौन? वह महानगरपालिका के कामकाज में इतने सक्रिय क्यों हैं? महानगरपालिका को इसका जवाब देना चाहिए! अगर महानगरपालिका अमित साटम जैसे विधायक के डर से अपने ट्वीट हटाने लगी है, तो बेहतर होगा कि महानगरपालिका को ही हटा दिया जाए!"

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने भी साटम को घेरा। उन्होंने X पर लिखा, "श्री अमीत सातम, आप दीया मिर्जा को ही क्यों निशाना बना रहे हैं, जबकि माधुरी दीक्षित और निशिगंधा वाड ने भी बीएमसी की ओर से यही अपील की थी? अपील वही, हाई कोर्ट का निर्देश वही, फिर प्रतिक्रिया अलग? यह परंपरा के लिए खड़ा होना नहीं है, यह चुनिंदा नाराजगी और साफ दोहरा मापदंड है। दीया मिर्जा ही आपका निशाना क्यों हैं? नाम दीया मिर्जा है?"

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि इस मामले को किसी एक समुदाय के नजरिए से देखना ठीक नहीं। उनका कहना था कि संविधान हर धर्म को अपना त्योहार मनाने का हक देता है। आठवले बोले, "मेरी समझ से दीया मिर्जा फिल्म अभिनेत्री हैं और मुस्लिम समुदाय से हैं, लेकिन यह किसी खास समुदाय का मामला नहीं है। भारत ऐसा देश है जहां डॉ. बी.आर. आंबेडकर का दिया संविधान हर धर्म को अपने त्योहार मनाने का हक देता है।" उन्होंने आगे माना कि पटाखे बिल्कुल न फूटें तो दिवाली की रौनक कुछ कम हो सकती है, पर साथ ही कहा कि बहुत ज्यादा प्रदूषण की फिक्र भी करनी चाहिए।

शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि लोगों को प्रदूषण का ख्याल रखना चाहिए और त्योहार में सेहत व सुरक्षा को पहले रखना चाहिए। उन्होंने कहा, "दीया मिर्जा, जिनके नाम का मतलब ही रोशनी है, उन्हें पता होना चाहिए कि रोशनी का त्योहार दिवाली को कहते हैं। हर नागरिक समझता है कि प्रदूषण का ध्यान रखना और पटाखे न फोड़ना जरूरी है, ताकि हम सुरक्षित रहें, क्योंकि जान और सेहत सबसे पहले है।"

नागरिक कार्यकर्ता ज़ोरू भथेना के मुताबिक बहस अब पर्यावरण के संदेश से भटककर संदेश देने वाले पर आ टिकी है। उन्होंने कहा, "अमित साटम को संदेश से नहीं, संदेश फैलाने वाले व्यक्ति से दिक्कत है। पहले भी साटम सिर्फ सांप्रदायिक आधार पर ही मुद्दे उठाते रहे हैं।"

शोर के खिलाफ काम करने वाली आवाज़ फाउंडेशन की संस्थापक सुमैरा अब्दुलअली ने पूछा कि क्या एक नेता के कह देने भर से ऐसा काम पलटा जा सकता है, जो अदालत के निर्देश पर चल रहा था। उनके अनुसार हाई कोर्ट की राय थी कि समाज तक संदेश पहुंचाने के लिए हस्तियों को बिना कोई फीस दिए जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि दीया मिर्जा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की गुडविल एम्बेसडर हैं और पर्यावरण के मसलों पर पहले भी बोलती रही हैं, इसलिए उनका चुनाव स्वाभाविक था।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि बॉम्बे हाई कोर्ट का सितंबर का आदेश है। गणेशोत्सव के दौरान सुनवाई करते हुए जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने सार्वजनिक सड़कों पर दिन हो या रात, पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगाई थी। बेंच ने कहा था कि त्योहार शोर और हवा की गंदगी के बिना मनाए जाएं। जुलूसों में लाउडस्पीकर, डीजे और लेजर बीम को उसने "बिलकुल गैरजरूरी" कहा था। कोर्ट ने जुलूसों के भारी शोर और प्रदूषण का खुद संज्ञान लिया था।

तब हाई कोर्ट ने कहा था, "क्या इन सब लाउडस्पीकरों और पटाखों से हमें भगवान का अतिरिक्त आशीर्वाद मिलने वाला है? एक जिम्मेदार समाज के तौर पर हमें यह सब बंद करना चाहिए।" बेंच का कहना था कि सड़कों पर पटाखे जलाना खतरनाक है और जहरीले प्रदूषण को भी बढ़ाता है। उसने कहा, "पटाखे बिलकुल नहीं होने चाहिए। मुंबई जैसे शहर में सार्वजनिक सड़कों पर पटाखों की इजाजत क्यों हो? यही वह समय है जब मुंबई में वायु प्रदूषण शुरू होता है और धुंध छा जाती है। इसे रोकना होगा।"

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