शिंदे ने 1,440 नए मेडिकल ऑफिसरों को सौंपे नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य विभाग में एक साथ भर्ती
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई में ग्रुप-A के नए मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति आदेश दिए और मरीजों का भरोसा जीतने को कहा।
महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में एक साथ 1,440 नए मेडिकल ऑफिसर शामिल हुए हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को ग्रुप-A के इन नवनियुक्त मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति आदेश सौंपे। उन्होंने नए डॉक्टरों से कहा कि वे अच्छी स्वास्थ्य सेवा दें और मरीजों का भरोसा जीतें।
4 नवंबर को मुंबई में हुए नियुक्ति आदेश वितरण समारोह में शिंदे ने कहा कि डॉक्टर बनना अपने आप में एक उपलब्धि है, लेकिन समर्पित सेवा से समाज का भरोसा जीतना असली इनाम है। उनके मुताबिक डॉक्टर को मरीज को सिर्फ इलाज नहीं, भावनात्मक सहारा और तसल्ली भी देनी चाहिए। मरीज को अच्छा महसूस कराना और उसके चेहरे पर मुस्कान लाना ही डॉक्टर की कामयाबी का असली पैमाना है, ऐसा उन्होंने कहा।
शिंदे ने बताया कि इन 1,440 नए मेडिकल ऑफिसरों में करीब 700 महिलाएं हैं। उन्होंने भर्ती की प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट पर आधारित बताते हुए सराहा। साथ ही कहा कि युवा डॉक्टरों का जोश राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में दिखना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि ग्रामीण इलाकों में पहले MBBS डॉक्टरों की कमी रही है। नई नियुक्तियों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी और सेवाएं बेहतर पहुंचेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि जहां जरूरत हो, वहां आगे और भर्ती की जानी चाहिए।
डॉक्टरों की सुविधाओं पर शिंदे ने कहा कि अगर उनसे अच्छी सेवा की उम्मीद है, तो उन्हें अच्छा रहने का इंतजाम, साफ माहौल, पीने का सुरक्षित पानी, पर्याप्त दवाइयां, पूरी तरह तैयार ऑपरेशन थिएटर और जरूरी मेडिकल उपकरण मिलने चाहिए। ठाणे के छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल में डॉक्टरों के हॉस्टल की खराब हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारियों को तीन महीने में बेहतर सुविधाएं खड़ी करने का निर्देश दिया है। सरकार डॉक्टरों की सेहत और भलाई का ख्याल रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है, ऐसा उन्होंने जोड़ा।
स्वास्थ्य मंत्री रहते अपने अनुभव याद करते हुए शिंदे ने बताया कि वे बाढ़ से प्रभावित कोल्हापुर, संक्रामक बीमारियों से प्रभावित इलाकों, गडचिरोली और मेलघाट गए थे, ताकि स्वास्थ्य इंतजामों का जायजा ले सकें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के फैसले सरकारी प्रक्रियाओं में अटकने नहीं चाहिए और "No Reason, On-the-Spot Decision" के सिद्धांत पर फौरन कार्रवाई होनी चाहिए। शिंदे ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री रहे अपने ढाई साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री सहायता निधि से जरूरतमंद मरीजों को 560 करोड़ रुपये बांटे गए। मेलघाट में कुपोषण पर काम के लिए उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत की तारीफ की।
राज्य सरकार की स्वास्थ्य पहलों में शिंदे ने तीन करोड़ महिलाओं की स्क्रीनिंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अपने जन्मदिन के मौके पर आठ मैमोग्राफी वैन शुरू की गई हैं, ताकि जांच की सुविधा गांवों तक पहुंचे। आपातकालीन चिकित्सा सेवा मजबूत करने के लिए आधुनिक एम्बुलेंस भी दी जा रही हैं। शिंदे के मुताबिक महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना में इलाज की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 22 लाख रुपये कर दी गई है और इसका बीमा कवच 12.50 करोड़ नागरिकों को मिलता है। उन्होंने बताया कि योजना में डायलिसिस वाली किडनी की बीमारियां, दिल के रोग, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर समेत कई इलाज शामिल हैं।
कोविड-19 महामारी में डॉक्टरों के योगदान को याद करते हुए शिंदे ने कहा कि मरीजों की सेवा के लिए डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डाली। उन्होंने नए डॉक्टरों से हर मरीज के साथ बराबरी से पेश आने और हमदर्दी से बात करने को कहा। उनका कहना था कि प्यार से की गई बातचीत मरीज की आधी बीमारी हल्की कर सकती है। मेडिकल पढ़ाई की मेहनत की मिसाल के तौर पर उन्होंने अपने बेटे, सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का जिक्र किया, जिन्होंने MBBS और MS किया है।
शिंदे ने सुझाव दिया कि बेहतरीन सेवा देने वाले डॉक्टरों को हर साल पुरस्कार मिलना चाहिए और उनके कामकाज को सालाना गोपनीय रिपोर्ट में भी दर्ज किया जाना चाहिए। नए मेडिकल ऑफिसरों से उन्होंने लगन और सेवा भाव से काम करने और महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को देश में सबसे अच्छा बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर, विधान परिषद की उपसभापति सचिन अहीर, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत, स्वास्थ्य सचिव डॉ. निपुण विनायक, सांसद संजय जाधव, विधायक प्रोफेसर मनीषा कायंदे और स्वास्थ्य आयुक्त संजय कटकर मौजूद थे।
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