नवी मुंबई के अस्पताल में 53 साल के मरीज के पेट से निकाला गया 19 सेमी का टूथब्रश
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मेडिकवर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी से पूरा टूथब्रश मुंह के रास्ते निकाला। मरीज उसी दिन शाम तक घर लौट गया।
मुंबई के एक 53 साल के आदमी से 29 सितंबर की सुबह ब्रश करते वक्त पूरा टूथब्रश निगल लिया गया। नवी मुंबई के मेडिकवर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी के जरिए उसे बाहर निकाल लिया।
मरीज के मुताबिक वह रोज की तरह उठा और बाथरूम में दांत साफ करने गया। वह टूथब्रश से जीभ भी साफ करता था। उसने बताया, "अचानक जीभ पर चल रहा ब्रश फिसल गया और गले के नीचे चला गया। वह कुछ दूर तक जा चुका था। मैंने निकालने की कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मैं मदद के लिए चिल्लाया, पर आवाज जोर से नहीं निकली। मेरी बेटी आई तो मैंने इशारों से समझाया कि क्या हुआ है। उसने मुंह में हाथ डालकर ब्रश निकालने की कोशिश की, पर नहीं निकला। हम दोनों कई मिनट तक कोशिश करते रहे।"
घबराहट के बावजूद घरवालों ने होश नहीं खोया। वे पड़ोसी के घर पहुंचे और पड़ोसी उन्हें एक डॉक्टर के पास ले गया। वहां क्लिनिक में भी ब्रश नहीं निकला, तो मरीज को नवी मुंबई के मेडिकवर हॉस्पिटल्स ले जाया गया।
मंगलवार सुबह अस्पताल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेडिकल टीम ने इसे "बहुत ही असामान्य मेडिकल इमरजेंसी" बताया। इलाज करने वाली टीम की अगुवाई डॉ. राव साहेब राठोड़ ने की। वे मेडिकवर हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई में कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और थेरेप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट हैं।
डॉ. राठोड़ ने बताया कि ब्रश निगलने के करीब तीन से चार घंटे बाद मरीज अस्पताल आया और उसके पेट में हल्का दर्द था। मामला असामान्य था, इसलिए आगे जांच की गई। एंडोस्कोपी में पता चला कि 19 सेमी (करीब 7 इंच) लंबा टूथब्रश मरीज के पेट में फंसा हुआ है। डॉ. राठोड़ के मुताबिक टूथब्रश लंबा और सख्त होता है, उसे पाचन नली में आगे-पीछे करना मुश्किल होता है और वह चोट पहुंचा सकता है या संकरी जगहों पर अटक सकता है।
डॉ. राठोड़ ने कहा कि करीब 30 मिनट की एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से उसे निकालने की योजना बनी। यह आसान नहीं था, क्योंकि ब्रश सख्त और सीधा था और पेट में आड़ा पड़ा था। इस वजह से उसे पकड़ना और पाचन नली के मोड़ों से निकालना कठिन था। डॉक्टरों ने एंडोस्कोप की नोक पर एक हुड लगाया, उससे ब्रश का एक सिरा पकड़ा और धीरे-धीरे खींचा।
मरीज को थोड़ी देर के जनरल एनेस्थीसिया में रखा गया था। डॉ. राठोड़ के मुताबिक ब्रश पहले उस जगह पर अटका जहां पेट खाने की नली से मिलता है। बार-बार कोशिश करने और मरीज की पोजीशन बदलने के बाद उसे वहां से आगे निकाला गया। फिर वह गले में ऊपरी ओसोफेजियल स्फिंक्टर और पोस्टक्रायकॉइड हिस्से के पास अटक गया। ब्रश सख्त था और खाने की नली के मोड़ों के हिसाब से मुड़ नहीं सकता था, इसलिए उसे और सावधानी से घुमाना पड़ा। आखिर में उसे साबुत मुंह के रास्ते निकाल लिया गया।
बाद में दोबारा की गई एंडोस्कोपी में ऊपरी या निचले ओसोफेजियल स्फिंक्टर में कोई चोट नहीं दिखी। मरीज के लक्षणों में सुधार हुआ और रिकवरी रूम में निगरानी के बाद प्रक्रिया के तीन से चार घंटे के भीतर उसे स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों और अपने परिवार समेत सभी शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करते हुए मरीज ने कहा, "मुझे उस दिन दोपहर 2.40 बजे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया और देर शाम तक मैं घर पहुंच गया। नतीजे से मैं बहुत शुक्रगुजार हूं। अब मैं टूथब्रश सिर्फ दांतों के लिए इस्तेमाल करता हूं, जीभ के लिए नहीं। उस वक्त मुझे डर था कि मैं सांस नहीं ले पाऊंगा। भगवान और मदद करने वाले सभी लोगों का शुक्र है कि मैं एक और दिवाली देख पाऊंगा।"
डॉक्टरों ने बताया कि मछली की हड्डी, टूथपिक या चीकू के बीज जैसी चीजें निगल लेने के मामले आते रहते हैं और उनमें फौरन इलाज की जरूरत पड़ती है। लेकिन पूरा टूथब्रश निगल जाना दुर्लभ और डरावना मामला है। डॉक्टरों के मुताबिक इलाज में देर होने पर आंत में रुकावट और छेद होने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
टूथब्रश या कोई और बड़ी चीज निगल लेने वालों के लिए डॉक्टरों की सलाह है कि वे घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय फौरन डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टरों के मुताबिक उल्टी कराने या खाना खिलाकर चीज को नीचे धकेलने की कोशिश से गले या खाने की नली में चोट, खून बहना हो सकता है, या चीज और कसकर फंस सकती है। उनका कहना है कि वक्त पर इलाज ही मरीज की सुरक्षा की कुंजी है।
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