OCI कार्डधारक इमरान खान से हाई कोर्ट ने कहा, प्रदर्शन में शामिल होने पर बिना शर्त माफी मांगें
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों को है। अभिनेता इमरान खान माफी देने को तैयार हुए। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को होगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को अभिनेता इमरान खान को फटकार लगाई। इमरान अमेरिकी नागरिक हैं और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक हैं। मामला CEC-SIR के मुद्दे पर हुए एक प्रदर्शन में उनके शामिल होने का है। कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों को मिलता है। इसके बाद खान बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हो गए।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि OCI कार्डधारकों को भारतीय नागरिकों जैसे अधिकार नहीं होते। हाई कोर्ट ने कहा, "OCI कार्डधारक के तौर पर आप इस देश की मेहरबानी पर हैं। ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, लेकिन एक मौका दिया जा सकता है।"
बेंच ने सवाल उठाया कि जो मुद्दा भारतीय नागरिकों से जुड़ा है, उस पर हुए प्रदर्शन में खान क्यों गए। कोर्ट ने कहा कि उनका SIR से कोई लेना-देना नहीं था। बेंच ने सुझाव दिया कि अगर वे प्रदर्शनों में हिस्सा लेना चाहते हैं तो भारतीय नागरिकता ले लें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों के पास उन्हें डिपोर्ट करने की ताकत है।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या किसी भारतीय नागरिक को विदेश में ऐसे ही प्रदर्शन में शामिल होने दिया जाएगा। बेंच ने कहा कि कुछ जमीनी हकीकतों का ध्यान रखना पड़ता है। साथ ही कोर्ट ने कहा, "खान बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। वे बचपन से भारत में हैं। अब थोड़ी उदारता और बड़ा दिल दिखाइए। हमें 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) की भावना से चलना है।"
खान की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अंडरटेकिंग दी कि 43 साल के अभिनेता आगे किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे और किसी और को भी इसके लिए नहीं उकसाएंगे। बेंच ने कहा कि सिर्फ अंडरटेकिंग काफी नहीं है और खान को बिना शर्त माफी भी मांगनी होगी। कोर्ट ने पुलिस हिरासत से छूटने के बाद खान की सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया और कहा कि उनके युवा फॉलोअर्स उनसे प्रभावित हो सकते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) ने इमरान खान को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 7(2)(C) और 29 के तहत 'लीव इंडिया' आदेश जारी किया था। ये धाराएं सरकार को विदेशी नागरिकों पर पाबंदी लगाने और उन्हें हटाने का अधिकार देती हैं। आदेश में खान को 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने को कहा गया था, वरना डिपोर्टेशन की कार्यवाही होती।
यह नोटिस 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन के बाद आया, जिसमें पुलिस ने खान को कुछ देर हिरासत में रखा था। यह रैली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में थी। रैली में कथित SIR गड़बड़ियों को लेकर CEC कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।
खान के वकील जुल्फिकार मेमन ने सुनवाई के बाद कहा कि हाई कोर्ट ने राज्य को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले को 7 दिसंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। मेमन के मुताबिक तब तक 'लीव इंडिया' नोटिस पर रोक रहेगी। उन्होंने बताया कि मुख्य न्यायाधीश ने खान से अंडरटेकिंग मांगी है कि OCI कार्डधारक होने के नाते वे आगे किसी भी रूप में प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे।
मेमन ने कहा कि खान से सोशल मीडिया या मीडिया में प्रदर्शनों के बारे में अनजाने में कही गई किसी भी बात के लिए बिना शर्त माफी भी मांगी गई है। उनके मुताबिक खान कभी किसी सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए और आगे भी ऐसा इरादा नहीं है। मेमन ने कहा कि कोर्ट ने खुद "अनजाने में" शब्द इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि खान अपनी सेलिब्रिटी हैसियत की वजह से कुछ ऐसा कह या पोस्ट कर गए हों जो सरकार के खिलाफ लगा हो, तो वे उसे खेद के साथ वापस लेने और माफी मांगने को तैयार हैं।
मेमन ने यह भी कहा कि खान किसी ऐसी पार्टी, एजेंसी या समूह से जुड़े नहीं रहे जो प्रदर्शन करता है, और अंडरटेकिंग पहले ही रिकॉर्ड पर रखी जा चुकी है। उनके मुताबिक कोर्ट ने इस बात की सराहना की कि इमरान ने इस देश में 42 साल बिना किसी विवाद के बिताए हैं और उनकी रोजी-रोटी भारत में ही है। मेमन ने बताया कि नोटिस वापस होगा या नहीं, यह अंडरटेकिंग और माफी जमा होने के बाद तय होगा। माफी जमा करने की कोई तारीख नहीं दी गई है और FRRO का जवाब मिलने के बाद माफी दाखिल की जाएगी।
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