निर्देशक संजय गुप्ता का निधन, बाथरूम में गिरने के बाद वक्त पर इलाज नहीं मिल पाया
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
'कांटे' और 'काबिल' बनाने वाले निर्देशक संजय गुप्ता नहीं रहे। पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।
'कांटे', 'काबिल', 'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'आतिश: फील द फायर' जैसी फिल्में बनाने वाले निर्देशक संजय गुप्ता का निधन हो गया है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस खबर से शोक है।
जानकारी के मुताबिक 30 अक्टूबर की रात संजय गुप्ता अपने घर के बाथरूम में पैर फिसलने से गिर पड़े। सिर पर गहरी चोट लगी और वे बेहोश हो गए। सुबह होने तक घर में किसी को पता ही नहीं चला कि वे बाथरूम में पड़े हैं। वक्त पर इलाज नहीं मिल पाने की वजह से उनकी जान चली गई। पुलिस ने मामले की शुरुआती जांच की है, लेकिन उसमें कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई।
संजय गुप्ता ने आज इंडस्ट्री के कई बड़े स्टार बन चुके कलाकारों को उनकी जवानी में अपनी फिल्मों से मौका दिया था। अभिनेता संजय दत्त के साथ उन्होंने पूरी 9 फिल्में कीं। उनकी पहली फिल्म 'आतिश: फील द फायर' थी। इसके बाद उन्होंने खौफ (2000), जंग (2000), कांटे (2002), मुसाफिर (2004) और जिंदा (2006) का निर्देशन किया। इनमें 'कांटे' जबरदस्त चली। फिल्म में अमिताभ बच्चन, सुनील शेट्टी, महेश मांजरेकर और संजय दत्त मुख्य भूमिकाओं में थे।
कुछ महीने पहले संजय गुप्ता ने हुसैन जैदी को दिए एक इंटरव्यू में 1992 का एक किस्सा सुनाया था। तब वे 'आतिश: फील द फायर' की शूटिंग कर रहे थे, जिसमें संजय दत्त, करिश्मा कपूर और रवीना टंडन मुख्य भूमिका में थे। एक दिन उनके घर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को नाना बताया। संजय गुप्ता को समझ नहीं आया कि नाना कौन है। बाद में पता चला कि वह फोन छोटा राजन का था। छोटा राजन ने फोन पर उन्हें जमकर गालियां दीं, जिससे संजय गुप्ता बुरी तरह घबरा गए। उन्होंने फौरन संजय दत्त को फोन करके पूरी बात बताई। तब संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त की गाड़ी भेजी और संजय गुप्ता को घर से सुरक्षित बाहर निकलवाया।
साल 2007 में संजय गुप्ता और संजय दत्त ने मिलकर व्हाइट फेदर फिल्म्स नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की थी। इस कंपनी ने 'शूटआउट एट वडाला' बनाई। लेकिन तकनीशियनों के मेहनताने को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। इसके बाद दूरी बढ़ गई, बातचीत बंद हो गई और दोनों ने कारोबारी रिश्ते भी तोड़ लिए। संजय गुप्ता ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि कुछ लोगों ने दोनों के बीच गलतफहमी पैदा कर दी थी, इसी वजह से यह सब हुआ।
झगड़े के बाद इंडस्ट्री में कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि संजय दत्त ने सबको गुप्ता की फिल्मों में काम न करने की चेतावनी दी है। इस वजह से करीब तीन साल संजय गुप्ता के पास कोई काम नहीं था और वे बेरोजगार रहे। एक वक्त ऐसा भी आया जब वे बॉलीवुड छोड़कर खंडाला में अपना होटल चलाने के बारे में सोचने लगे थे। दोनों के बीच चार साल तक दूरी बनी रही। फिर 2012 में अमिताभ बच्चन की बर्थडे पार्टी में संजय गुप्ता जॉन अब्राहम से बात कर रहे थे, तभी संजय दत्त ने खुद आवाज देकर उन्हें बुलाया और झगड़ा खत्म कर दिया। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया।
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