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मुंबई यूनिवर्सिटी सीनेट ने 2025-26 के सालाना खाते और 31 मार्च की बैलेंस शीट को दी मंजूरी

पढ़ाई PT24 मुंबई टीम

यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई की सीनेट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी के वित्त वर्ष 2025-26 के सालाना खातों और 31 मार्च 2026 की बैलेंस शीट को मंजूरी दे दी। इससे पहले ये दोनों चीजें यूनिवर्सिटी की वित्त और प्रबंधन से जुड़ी संस्थाओं की जांच और मंजूरी से गुजर चुकी थीं।

ऑडिट किए गए ये खाते स्टैच्युटरी ऑडिटर संदीप व्यास एंड कंपनी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने तैयार किए थे। इन्हें महाराष्ट्र पब्लिक यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2016 की धारा 29(g) के तहत सीनेट के सामने रखा गया।

फाइनेंस एंड अकाउंट्स कमेटी ने 5 अक्टूबर 2026 की अपनी बैठक में खातों को मंजूर किया था। उसके बाद मैनेजमेंट काउंसिल ने 13 अक्टूबर की बैठक में इन्हें हरी झंडी दी और सीनेट से मंजूरी के लिए सिफारिश की।

सीनेट की बैठक की अध्यक्षता यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई के कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी ने की। बैठक में प्र-कुलगुरु प्राचार्य डॉ. अजय भामरे, रजिस्ट्रार डॉ. प्रसाद कारंडे और सीनेट के दूसरे सदस्य मौजूद थे। फाइनेंस एंड अकाउंट्स ऑफिसर सीए हर्षल वाघ ने 2025-26 के सालाना खाते और 31 मार्च 2026 की बैलेंस शीट सीनेट के सामने पेश की।

इस बीच मुंबई यूनिवर्सिटी ने 16 अक्टूबर को अपने सभी संबद्ध और स्वायत्त कॉलेजों को निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित तालुकों के पात्र छात्रों को परीक्षा फीस तुरंत पूरी वापस की जाए। यह निर्देश राज्य सरकार के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें 2026 के खरीफ सीजन की हालत को देखते हुए 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया और इन इलाकों के स्कूल और कॉलेज के छात्रों को परीक्षा फीस में राहत देने की बात कही गई।

16 अक्टूबर को जारी सर्कुलर में यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों से कहा कि पात्र छात्रों की भरी जा चुकी फीस उसी दिन से लौटाना शुरू करें। मकसद यह है कि छात्रों को आर्थिक राहत बिना देर के मिले। यूनिवर्सिटी ने प्राचार्यों से कहा है कि वे रिफंड की प्रक्रिया पर खुद नजर रखें और देखें कि हर पात्र छात्र को परीक्षा फीस की पूरी रकम मिले।

रिफंड सभी फैकल्टी के पात्र छात्रों को देना होगा, और यह सूखा प्रभावित तालुकों के तय कॉलेजों की सूची के हिसाब से होगा। कॉलेजों को फैकल्टी के हिसाब से और हर छात्र के हिसाब से रिफंड का रिकॉर्ड रखने को भी कहा गया है। प्रक्रिया पूरी होने पर कॉलेज यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन एंड इवैल्युएशन को कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा करेंगे।

यूनिवर्सिटी ने जोर देकर कहा है कि किसी भी पात्र छात्र का रिफंड बाकी नहीं रहना चाहिए और सभी संबद्ध और स्वायत्त कॉलेज इन निर्देशों को जल्द लागू करें। यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ किया है कि सूखा प्रभावित तालुकों के जिन पात्र छात्रों ने अब तक परीक्षा फीस नहीं भरी है, उनसे संबंधित परीक्षाओं के लिए फीस नहीं ली जाएगी।

परीक्षा फॉर्म भरते समय, जहां परीक्षा पोर्टल पर यह विकल्प मौजूद हो, वहां छात्र या कॉलेज को 'Drought Affected Taluka' कैटेगरी चुननी होगी। कॉलेजों को यह पक्का करना होगा कि कैटेगरी सही दर्ज होने के बाद छात्र की परीक्षा फीस अनिवार्य फीस की गिनती से बाहर रहे।

यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसने यह प्रक्रिया परीक्षा फीस में राहत पर महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक फैसले के मुताबिक शुरू की है। सभी संबद्ध और स्वायत्त कॉलेजों को दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने और पात्र छात्रों को पूरा फायदा दिलाने के लिए कहा गया है। इस कदम का मकसद 2026 के खरीफ सीजन में सूखे से प्रभावित इलाकों के छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम करना है।

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