मुंबई में CNG फिर 1 रुपये महंगी, अब 90 रुपये प्रति किलो
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महानगर गैस लिमिटेड ने मुंबई और आसपास CNG का दाम 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाया है। 2 नवंबर से नया दर लागू है।
मुंबई और आसपास के इलाकों में CNG और महंगी हो गई है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने कॉम्प्रेस्ड नैचुरल गैस (CNG) का दाम प्रति किलो 1 रुपये बढ़ा दिया है। 2 नवंबर से नया दर 90 रुपये प्रति किलो लागू हो गया है।
जनवरी 2026 से अब तक यह छठी बढ़ोतरी है। अप्रैल से देखें तो CNG कुल 9 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इसका बोझ कमर्शियल वाहन चलाने वालों पर भी पड़ा है और अपनी गाड़ी वालों पर भी।
MGL का कहना है कि इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह गैस खरीदी का बढ़ता खर्च है। खासकर आयात की गई रीगैसिफाइड लिक्विफाइड नैचुरल गैस (RLNG) के दाम चढ़े हैं। कंपनी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के भाव ऊपर-नीचे होते रहते हैं, जिससे खरीदी महंगी पड़ी और रिटेल दर बदलना जरूरी हो गया। आयात की गई गैस के दाम ग्लोबल मार्केट के इंडेक्स से जुड़े होते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय एनर्जी बाजार में जो भी बदलाव आता है, उसका सीधा असर देश के भीतर ईंधन के दामों पर दिखता है।
लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से रिक्शा और टैक्सी चलाने वालों में चिंता है, क्योंकि उनकी रोज की कमाई पर ईंधन के खर्च का सीधा असर पड़ता है। मुंबई के कमर्शियल ट्रांसपोर्ट में CNG का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में बार-बार दाम बढ़ने से ऑपरेटिंग कॉस्ट पर अलग से दबाव बन रहा है।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों को डर है कि अगर दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो आगे फिर से यात्री किराया बढ़ाने की मांग करनी पड़ेगी। किराये में हाल ही में सुधार किया गया है, फिर भी ईंधन के दाम चढ़ते रहे तो दोबारा किराया बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष थंपी कुरियन के मुताबिक इस ताजा बढ़ोतरी का असर यात्री किराये में करीब 4 रुपये तक पड़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर CNG के दाम और बढ़ते हैं और कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट 25 प्रतिशत तक चढ़ जाती है, तो कुछ शर्तों के साथ छह महीने के भीतर फिर किराया बढ़ाने की मांग उठ सकती है।
CNG से चलने वाली गाड़ियां इस्तेमाल करने वाले आम लोगों का सफर भी महंगा होगा। ईंधन के दाम कुल मिलाकर बढ़ने से CNG गाड़ी चलाने का आर्थिक फायदा कुछ घट गया है। जो लोग नियमित रूप से लंबी दूरी तय करते हैं, उन्हें यह झटका ज्यादा महसूस हो सकता है। किराया फिर बढ़ाने की मांग उठी तो यात्रियों पर क्या असर होगा, इसे लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
आगे क्या होगा, यह ईंधन के दामों के उतार-चढ़ाव और ट्रांसपोर्ट वालों को उठाने पड़ रहे ऑपरेटिंग खर्च पर निर्भर करेगा। अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों का देश के भीतर खरीदी खर्च पर जो असर पड़ता है, उसे देखते हुए अब सबकी नजर CNG के आगे के दामों पर रहेगी। इस बढ़ोतरी ने मुंबई और आसपास के बढ़ते ट्रांसपोर्ट खर्च की ओर फिर ध्यान खींचा है, और कमर्शियल वाहन चालक ईंधन की चढ़ती कीमतों से राहत पाने की कोशिश में लगे हैं।
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