विद्याधर अनास्कर NAFSCOB के निदेशक चुने गए, सभी 21 उम्मीदवार निर्विरोध
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर 2026 से 2031 तक NAFSCOB के निदेशक मंडल में रहेंगे।
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक और सहकार और बैंकिंग के वरिष्ठ जानकार विद्याधर वामनराव अनास्कर निर्विरोध NAFSCOB के निदेशक मंडल में चुने गए हैं। उनका कार्यकाल 2026 से 2031 तक, यानी पाँच साल का होगा। NAFSCOB यानी National Federation of State Cooperative Banks Ltd. देश के राज्य सहकारी बैंकों का राष्ट्रीय स्तर का सबसे बड़ा प्रतिनिधि मंच है।
चुनाव की तस्वीर कुछ ऐसी रही कि NAFSCOB के निदेशक मंडल की 21 सीटों के लिए कुल 22 नामांकन आए थे। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के प्रतिनिधि ने अपना नाम वापस ले लिया, तो 21 सीटों के लिए 21 उम्मीदवार ही बचे। इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने अनास्कर समेत सभी 21 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर दी।
अनास्कर चार दशक से ज्यादा वक्त से सहकारी बैंकिंग में काम कर रहे हैं। सहकार, बैंकिंग प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और बैंकिंग से जुड़े कानूनों में उनका लंबा तजुर्बा है। पिछले आठ साल से वे महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक मंडल में प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बताया गया है कि उनके प्रशासक रहते महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक ने वित्तीय अनुशासन, कारोबार के विस्तार, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, कार्यक्षमता और संस्थागत सुशासन में खास तरक्की की है। बैंक की माली हालत मजबूत करने के साथ उन्होंने राज्य की सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के विकास के लिए भी लगातार कोशिशें की हैं। उनकी अगुवाई में बैंक का नेट वर्थ 5,760 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँचा है।
NAFSCOB सिर्फ राज्य सहकारी बैंकों का संगठन नहीं है। यह देश की पूरी सहकारी कर्ज व्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाने वाली राष्ट्रीय संस्था है। गाँवों की सहकारी कर्ज व्यवस्था तीन स्तरों पर टिकी है। सबसे ऊपर राज्य सहकारी बैंक (StCBs) हैं, जो राज्य स्तर पर वित्त पोषण और तालमेल का काम देखते हैं। जिला स्तर पर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (DCCBs) सहकारी कर्ज का काम करते हैं। और गाँव के स्तर पर प्राथमिक कृषि कर्ज आपूर्ति संस्थाएँ (PACS) किसानों और ग्रामीण सदस्यों को सीधे कर्ज देती हैं।
इन तीनों स्तरों के बीच तालमेल, आर्थिक मजबूती और कार्यक्षमता ही ग्रामीण सहकारी कर्ज व्यवस्था की असली ताकत है। इस व्यवस्था में राज्य सहकारी बैंकों की भूमिका बेहद अहम है, इसलिए उनके राष्ट्रीय फेडरेशन के जरिए राज्यों की दिक्कतें, उम्मीदें, नीति से जुड़े सवाल और विकास के मौके केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और नाबार्ड के सामने असरदार ढंग से रखे जा सकते हैं।
सहकारी बैंकिंग के सामने नियामक चुनौतियाँ, टेक्नोलॉजी में बदलाव, डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, कृषि कर्ज, एनपीए प्रबंधन, सहकारी बैंकों को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास जैसे कई बड़े मुद्दे हैं। इन सब पर NAFSCOB को राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत भूमिका निभानी पड़ती है।
अनास्कर की इस राष्ट्रीय संस्था में निदेशक के तौर पर नियुक्ति को महाराष्ट्र के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए अहम मौका माना जा रहा है। महाराष्ट्र के सहकारी बैंकों के सामने जो सवाल हैं, राज्य सहकारी बैंकों और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के बीच तालमेल, ग्रामीण कर्ज व्यवस्था की मजबूती और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता जैसे मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर रखने में उनके अनुभव का फायदा मिल सकता है।
बदलते आर्थिक और नियामक माहौल में सहकारी बैंकिंग को अपनी अलग पहचान, भरोसा और मुकाबले की ताकत बनाए रखनी जरूरी है। इसके लिए राज्य सहकारी बैंकों, जिला बैंकों और प्राथमिक कृषि कर्ज संस्थाओं के बीच और बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि अनास्कर के चुने जाने से राष्ट्रीय स्तर की नीतिगत चर्चा में महाराष्ट्र की भागीदारी और असरदार होगी। इसे महाराष्ट्र के सहकार क्षेत्र के लंबे अनुभव की राष्ट्रीय मान्यता कहा जा रहा है, और सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से उन्हें बधाइयाँ और स्वागत मिल रहा है।
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