मुंबई एनसीपी की कमान झिशान सिद्दीकी को, उमेश पाटील बने राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता
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राष्ट्रवादी काँग्रेस ने पार्टी संगठन में बदलाव करते हुए झिशान सिद्दीकी को मुंबई अध्यक्ष और उमेश पाटील को राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है।
राष्ट्रवादी काँग्रेस (NCP) ने अपने संगठन में अहम बदलाव किए हैं। ये बदलाव ऐसे वक्त हुए हैं जब पूरे राज्य में शिक्षक और स्नातक चुनाव के नतीजों की चर्चा चल रही है। पार्टी का मुंबई अध्यक्ष पद कई दिनों से खाली था। अब इस पद पर पार्टी के दिवंगत नेता बाबा सिद्दीकी के बेटे झिशान सिद्दीकी की नियुक्ति की गई है। पार्थ पवार ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा।
दूसरी तरफ उमेश पाटील को पार्टी का राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और सांसद पार्थ पवार ने उन्हें नियुक्ति पत्र दिया। यह पत्र आज देवगिरी स्थित सरकारी निवास पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और सांसद पार्थ पवार की मुख्य मौजूदगी में दिया गया। इस मौके पर पार्टी के कई और नेता और पदाधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम में यह उम्मीद जताई गई कि स्वर्गीय अजितदादा पवार के विचारों, आदर्शों और जनसेवा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उमेश पाटील पार्टी संगठन को और मजबूत करने के लिए निष्ठा और समर्पण से काम करेंगे।
मुंबई अध्यक्ष बनने के बाद झिशान सिद्दीकी ने सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात है और अब मुंबई में राष्ट्रवादी काँग्रेस को मजबूत करना उनका एजेंडा है। झिशान ने कहा कि सुनेत्रा भाभी उनके लिए मां की तरह हैं और पार्थ पवार बड़े भाई जैसे हैं। उन्होंने कहा कि वे इन दोनों के दिखाए भरोसे पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। झिशान के मुताबिक, पहले उन्हें विधान परिषद की विधायकी दी गई और अब पार्टी का मुंबई अध्यक्ष पद दिया गया है।
इसी मौके पर झिशान सिद्दीकी ने वित्त मंत्री पद के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग हमेशा अजितदादा के पास रहा है और अब इसे संभालने के लिए सुनेत्रा पवार सक्षम हैं, इसका उन्हें पक्का भरोसा है।
एक अलग खबर में, मुंबई महानगरपालिका चुनाव में महायुति के खिलाफ काम करने वाले शिवसेना पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, महायुति के खिलाफ काम करने वाले इन पदाधिकारियों की सूची पार्टी के अंदर तैयार की गई है। सूत्रों का यह भी कहना है कि भाजपा की तरफ से एकनाथ शिंदे को इस बारे में पत्र दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इन पदाधिकारियों पर आरोप है कि पार्टी के खिलाफ रुख अपनाने से चुनाव में महायुति को नुकसान हुआ। शिवसेना के समझाने के बावजूद कुछ बागी उम्मीदवारों ने अपने उम्मीदवारी आवेदन वापस नहीं लिए थे। शिवसेना के कुछ नेताओं का रुख है कि ऐसे बागियों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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