पश्चिम रेलवे के पीने के पानी के 371 सैंपल एक दिन में पास, सभी नतीजे संतोषजनक
पश्चिम रेलवे ने आठ जगहों पर पीने के पानी की 371 जाँच कीं और सभी नतीजे संतोषजनक रहे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पश्चिम रेलवे ने एक ही दिन में आठ जगहों पर पीने के पानी की क्वालिटी के 371 टेस्ट किए। शनिवार, 24 अक्टूबर को जारी एक बयान में रेलवे ने बताया कि सभी टेस्ट के नतीजे संतोषजनक आए।
यह जाँच रेलवे जोन के पानी की क्वालिटी पर नज़र रखने के रूटीन प्रोग्राम का हिस्सा थी। इसका मकसद यह देखना है कि रेलवे परिसर में जो पीने का पानी दिया जाता है, वह सुरक्षित है या नहीं। साथ ही मुसाफिरों और रेलवे कर्मचारियों के लिए साफ-सफाई के स्तर को बनाए रखना भी इसका मकसद है।
कुल 371 टेस्ट में 335 जाँच रेज़िडुअल क्लोरीन की थीं और 36 बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट थे। पश्चिम रेलवे के मुताबिक सभी जाँच में नतीजे संतोषजनक रहे, यानी जिन पैमानों पर पानी को परखा गया, उन पर 100 फीसदी पालन हुआ।
ये जाँच पश्चिम रेलवे के नेटवर्क की आठ जगहों और यूनिट में हुईं। इनमें जगजीवन राम हॉस्पिटल, मुंबई सेंट्रल, वडोदरा, अहमदाबाद, रतलाम, राजकोट, भावनगर और दाहोद शामिल हैं।
रेज़िडुअल क्लोरीन की जाँच से पता चलता है कि साफ किए गए पानी में इतना क्लोरीन बचा है या नहीं, जो सूक्ष्म जीवों से होने वाले संक्रमण से बचाव कर सके। वहीं बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट से यह पता चलता है कि पानी में नुकसान पहुँचाने वाले सूक्ष्म जीवों की गंदगी तो नहीं है और पानी सुरक्षा की ज़रूरी शर्तों पर खरा उतरता है या नहीं।
पश्चिम रेलवे ने कहा कि दिन भर में किए गए सभी 371 टेस्ट के नतीजे संतोषजनक रहे। हालाँकि जारी बयान में अलग-अलग रीडिंग, जाँच के बारीक पैमानों या सैंपल लेने और उनकी जाँच करने के तरीकों की जानकारी नहीं दी गई।
रेलवे परिसर में बड़ी तादाद में मुसाफिर और कर्मचारी पानी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए पीने के पानी की नियमित जाँच साफ-सफाई और लोगों की सेहत की हिफाज़त का अहम हिस्सा है। क्लोरीन के स्तर पर नज़र रखने और बैक्टीरियोलॉजिकल जाँच करने से पानी की क्वालिटी की किसी भी दिक्कत का पता चल सकता है। अगर नतीजों में कोई गड़बड़ी दिखे, तो वक्त पर कदम उठाकर दूषित पानी के इस्तेमाल को रोका जा सकता है और पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा घटाया जा सकता है।
ताज़ा जाँच पश्चिम रेलवे की उस लगातार चल रही कोशिश का हिस्सा है, जिसमें वह अपने पूरे नेटवर्क में पीने के पानी की क्वालिटी पर नज़र रखता है। नियमित जाँच का मकसद दिक्कतों को जल्दी पकड़ना और स्टेशन, अस्पताल और दूसरी रेलवे सुविधाओं में साफ-सफाई का ठीक स्तर बनाए रखना है।
पश्चिम रेलवे ने कहा कि वह बीमारियों से बचाव और साफ-सफाई के उपायों के तहत पानी की क्वालिटी की निगरानी और जाँच जारी रखेगा। यह कार्यक्रम मुसाफिरों और रेलवे कर्मचारियों, दोनों के इस्तेमाल की सुविधाओं को कवर करता है, ताकि रेलवे परिसर में दिया जाने वाला पीने का पानी तय क्वालिटी शर्तों पर खरा उतरे।
बताए गए दिन के सभी 371 टेस्ट के नतीजे संतोषजनक रहे, फिर भी पानी की क्वालिटी में किसी बदलाव को पकड़ने और किसी भी चिंता पर तुरंत ध्यान देने के लिए लगातार निगरानी ज़रूरी बनी हुई है। रेलवे जोन के मुताबिक ये जाँच पूरे नेटवर्क में साफ-सफाई बनाए रखने की उसकी बड़ी कोशिशों का हिस्सा हैं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।