पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिवीजन में पीने के पानी के सभी 315 सैंपल मानकों पर खरे उतरे
पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिवीजन में 17 से 23 अक्टूबर के बीच पीने के पानी की सभी 315 जांचों के नतीजे संतोषजनक रहे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पश्चिम रेलवे ने बताया है कि उसके मुंबई सेंट्रल डिवीजन में पीने के पानी की क्वालिटी की जितनी भी जांच हुई, सबके नतीजे संतोषजनक रहे हैं। ये जांचें 17 से 23 अक्टूबर 2026 के बीच की गईं और इनकी कुल संख्या 315 थी।
रेलवे प्रशासन के मुताबिक जांचे गए सभी सैंपल में मानकों का 100 प्रतिशत पालन हुआ। यानी एक भी नमूना तय क्वालिटी मानकों से बाहर नहीं निकला।
प्रशासन ने बताया कि हफ्ते भर चली इस जांच मुहिम में 263 जांचें रेसिड्युअल क्लोरीन की थीं और 52 जांचें बैक्टीरियोलॉजिकल थीं। सारे नमूने तय क्वालिटी मानकों पर खरे उतरे।
यह मुहिम पश्चिम रेलवे के मेडिकल डिपार्टमेंट ने चलाई थी। मकसद यह था कि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षित और साफ पीने का पानी मिल सके।
इस निगरानी मुहिम के तहत रेलवे स्टेशनों और रेलवे परिसरों में लगे पीने के पानी के नल और वॉटर कूलर के पानी की क्वालिटी परखी गई। इसमें रेसिड्युअल क्लोरीन का लेवल और टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स यानी TDS का मूल्यांकन किया गया।
पश्चिम रेलवे का कहना है कि पीने के पानी की क्वालिटी बनाए रखने और यात्रियों व कर्मचारियों की सेहत की हिफाजत के लिए नियमित जांच और निगरानी बेहद जरूरी है।
प्रशासन ने आगे कहा कि साफ-सफाई के मानकों का पालन करने और सुरक्षित पीने के पानी की उपलब्धता पक्की करने के लिए मुंबई सेंट्रल डिवीजन के सभी स्टेशनों और रेलवे परिसरों में नियमित जांच आगे भी जारी रहेगी।
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