मेट्रो स्टेशनों के आसपास प्लानिंग से बढ़ेगी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सवारी: अश्विनी भिड़े
अश्विनी भिड़े ने कहा कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास सोच-समझकर किया गया विकास रोज के सफर को आसान बना सकता है।
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मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने शनिवार को कहा कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास योजना बनाकर विकास किया जाए तो ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करेंगे। उनके मुताबिक इससे रोज का आना-जाना बेहतर होगा और लंबे समय में आर्थिक तरक्की को भी सहारा मिलेगा।
भिड़े भुवनेश्वर में हुई 19वीं अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि शहरों में ट्रांसपोर्ट का ढांचा और शहरी विकास साथ-साथ चलने चाहिए, तभी लोगों का सफर आसान होगा और शहर टिकाऊ ढंग से बढ़ेंगे।
वे शहर की सीमा के बाहर जमीन के इस्तेमाल और ट्रांसपोर्ट पर हुए एक सेशन की अध्यक्षता कर रही थीं। वहां इस बात पर चर्चा हुई कि शहर का फैलाव पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के हिसाब से हो और प्रशासनिक सीमाओं के पार भी बेहतर प्लानिंग की जाए।
भिड़े ने महाराष्ट्र की उन कोशिशों की जानकारी दी जो ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के लिए हो रही हैं। यह प्लानिंग का ऐसा तरीका है जिसमें घर, दुकानें-दफ्तर और जरूरी सुविधाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट के पास बसाई जाती हैं।
उन्होंने बताया कि यह नीति नागपुर और पुणे में लागू की गई है। मुंबई में भी भूमिगत मेट्रो स्टेशनों के करीब 500 मीटर के दायरे में ज्यादा घनत्व वाले विकास को बढ़ावा देने वाली नीति लागू हो चुकी है।
इस तरीके का मकसद ऐसे इलाके बनाना है जहां रहने वाले लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दफ्तर, दुकानों और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुंच सकें। अलग-अलग गतिविधियां मेट्रो स्टेशनों के पास आने से निजी गाड़ियों पर निर्भरता घटेगी और रोज के सफर के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट ज्यादा सुविधाजनक बनेगा।
इस नीति में विकास की इजाजत को सार्वजनिक ढांचे के लिए पैसों से भी जोड़ा गया है। ज्यादा निर्माण क्षेत्र की इजाजत देने पर जो अतिरिक्त प्रीमियम वसूला जाता है, वह स्थानीय सुविधाओं और ट्रांसपोर्ट ढांचे पर खर्च होता है। इससे मेट्रो स्टेशनों के आसपास के इलाकों का विकास होता है।
भिड़े ने कहा कि स्टेशनों के आसपास योजना के साथ विकास होने से वहां पहुंचना आसान होगा और रोज का सफर सुविधाजनक बनेगा, जिससे सवारियां बढ़ सकती हैं। घर और कारोबार स्टेशनों के पास होंगे तो लोग निजी गाड़ियों पर कम निर्भर रहकर दफ्तर और जरूरी सेवाओं तक पहुंच सकेंगे। मौजूदा ट्रांसपोर्ट ढांचे का बेहतर इस्तेमाल होगा और शहर में लंबे सफर की जरूरत भी कम होगी।
मुंबई में सफर की मांग घरों, नौकरियों और कारोबारी गतिविधियों के बंटवारे से जुड़ी है। इसलिए जमीन के इस्तेमाल को मेट्रो के विस्तार के साथ जोड़ना शहर के सफर को सुधारने में अहम हो सकता है।
हालांकि ऐसी नीतियां तभी कारगर होंगी जब सड़कें, पैदल चलने की जगह और स्थानीय ट्रांसपोर्ट कनेक्शन जैसा सहायक ढांचा मौजूद हो। इसलिए मिलकर प्लानिंग जरूरी है, ताकि ज्यादा घनत्व वाले विकास से मौजूदा नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
भिड़े ने सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल पर भी जोर दिया, ताकि ट्रांसपोर्ट प्लानिंग बेहतर हो और शहर की सीमा के बाहर के इलाकों में विकास संभाला जा सके।
शहर जैसे-जैसे फैलते हैं, लोगों का रोज का सफर नगरपालिका की सीमाओं के पार जाने लगता है। इसलिए ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और जमीन के इस्तेमाल की नीतियों में शहरों और आसपास के इलाकों के बीच होने वाले सफर का ध्यान रखना होगा, सिर्फ एक प्रशासनिक इलाके के विकास पर नजर रखना काफी नहीं है।
उन्होंने लंदन और सिंगापुर जैसे शहरों के अनुभवों और शहरी योजना विशेषज्ञों की सिफारिशों का जिक्र किया। उनके मुताबिक आगे की मोबिलिटी नीतियां बनाने में इनसे मदद मिल सकती है।
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