महाराष्ट्र में दवाओं की क्वालिटी जांचने वाली आठ मशीनें, देश का पहला राज्य
राज्य सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य सेवा में दवाओं की जांच मजबूत करने के लिए आठ ड्रग क्वालिटी डिटेक्टर मशीनें खरीदी हैं।
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सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में दी जाने वाली दवाओं की क्वालिटी पर नजर रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने आठ ड्रग क्वालिटी डिटेक्टर मशीनें खरीदी हैं। यह तकनीक करीब 50 देशों में पहले से इस्तेमाल हो रही है, लेकिन भारत में इसे अपनाने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य बन गया है।
फिलहाल हर रीजन को एक मशीन दी गई है। उम्मीद है कि इससे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सप्लाई होने वाली दवाओं की निगरानी बेहतर होगी। सोमवार को आरोग्य भवन में मीडिया से बात करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव आबिटकर ने बताया कि हर रीजन के लिए दो अधिकारियों का एक फ्लाइंग स्क्वॉड बनाया गया है। यह स्क्वॉड दवाओं की जांच करेगा और मिलावटी पाए गए सैंपल आगे की टेस्टिंग के लिए NABL यानी नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज को भेजेगा।
आबिटकर ने कहा कि तय पैमानों पर खरी उतरने वाली दवा के आगे मशीन 'पास्ड' का इशारा दिखाएगी, जबकि किसी भी गड़बड़ी पर 'फेल्ड' का निशान आएगा। इसके हिसाब से दवा बनाने वालों और बेचने वालों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
मंत्री के मुताबिक ये मशीनें टैबलेट, सिरप और सिरिंज में इस्तेमाल होने वाली तरल दवाओं की क्वालिटी परखने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से राज्य में दवाओं की क्वालिटी की निगरानी मजबूत होगी और घटिया स्तर की संभावित दवाओं की पहचान में मदद मिलेगी। हर मशीन की कीमत 1.2 करोड़ रुपये है। उनके शब्दों में, महान वैज्ञानिक सी वी रमन के नाम पर 'रमन' नाम की इन मशीनों को चालू करने वाला महाराष्ट्र भारत का पहला राज्य है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि 4 नवंबर को पूरे महाराष्ट्र में 1400 डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें 600 स्पेशलिस्ट होंगे। इसके अलावा राज्य भर में, खासकर ग्रामीण इलाकों में, 12,000 डेकेयर सेंटर भी शुरू किए जाएंगे। आबिटकर ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में OPD और IPD सेवाएं शुरू करने की कोशिशें भी चल रही हैं।
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