कुरार थाने जा रहे वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गायकवाड़ की गाड़ी में हार्ट अटैक से मौत
कुरार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुशील कुमार गायकवाड़ की घर से ड्यूटी पर आते वक्त गाड़ी में हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसी महीने एक और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की मौत हुई थी।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई पुलिस में एक और अफसर की ड्यूटी के दौरान अचानक मौत हो गई है, जिससे पूरे महकमे में मातम का माहौल है। कुरार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुशील कुमार गायकवाड़ का गाड़ी में ही निधन हो गया। वे घर से ड्यूटी पर आ रहे थे।
जानकारी के मुताबिक गायकवाड़ ने एक दिन पहले शाम को डीसीपी (पुलिस उपायुक्त) गजानन राजमाने का जन्मदिन मनाया था। उसके बाद वे नवी मुंबई के उलवे में अपने घर चले गए थे। अगली सुबह वे घर से कुरार पुलिस स्टेशन के लिए निकले, लेकिन स्टेशन पहुंचने से पहले ही हार्ट अटैक के तेज झटके से उनकी जान चली गई।
रास्ते में गायकवाड़ को बेचैनी महसूस होने लगी। उन्होंने अपने साथ मौजूद ड्राइवर और ऑपरेटर को बताया कि उन्हें ठीक नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि वे गाड़ी में ही थोड़ा आराम करेंगे और तकिया मांगा। इसके बाद वे गाड़ी में ही सो गए।
गाड़ी कुरार पुलिस स्टेशन पहुंची तो ड्राइवर ने उन्हें आवाज दी, पर वे नहीं उठे। ड्राइवर ने हाथ से हिलाकर जगाने की कोशिश की। तब पता चला कि उनका शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ चुका है और मुंह से झाग भी निकला हुआ था। ड्राइवर और ऑपरेटर उन्हें फौरन मालाड पठाणवाड़ी के डीएनए अस्पताल ले गए। लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसी महीने की शुरुआत में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शिवाजी जाधव की भी इसी तरह दुखद मौत हो चुकी है। यानी एक ही महीने में दो वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चल बसे, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप है। दोनों अफसरों को करीब सात महीने पहले ही पुलिस निरीक्षक से वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के पद पर प्रमोशन मिला था।
पुलिस के गलियारों में चर्चा है कि काम के तनाव और वरिष्ठ अफसरों के दबाव की वजह से यह हार्ट अटैक आया। कहा जा रहा है कि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ इलाके के फेरीवाले, वाघरी, एसआरए, एमएमआरडीए, फॉरेस्ट यानी वन विभाग और दूसरे कामों के लिए लगातार तगादा किया जाता है। इस वजह से कई अफसर तनाव में काम करते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पुलिस दल में काफी नाराज़गी होने की बात भी कही जा रही है।
इतनी कम उम्र में पुलिस अफसरों की मौत होने से उनके काम के घंटों, छुट्टियों और सेहत से जुड़ी दिक्कतों का सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है।
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