खेल मैदान का रिज़र्वेशन हटाना है तो उसी शहर में उतनी ही ज़मीन देनी होगी
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राज्य के शहरी विकास विभाग ने नया सरकारी फ़ैसला जारी किया है। खेल के मैदान का रिज़र्वेशन रद्द करने से पहले उसी एरिया की ज़मीन दूसरी जगह रिज़र्व करनी होगी।
राज्य के शहरी विकास विभाग ने एक सरकारी फ़ैसला (GR) जारी किया है। इसके मुताबिक, अगर खेल के मैदान के लिए रिज़र्व की गई ज़मीन को रिज़र्वेशन से हटाना है, तो संबंधित नगर निगम या नगर परिषद को पहले उसी एरिया की ज़मीन किसी दूसरी जगह खेल के मैदान के लिए रिज़र्व करनी होगी। इसके बाद ही राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी ली जा सकेगी।
अभी तक के नियमों में खेल के मैदान का रिज़र्वेशन कैंसिल करने के लिए सिर्फ़ राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी लेनी पड़ती थी। नए फ़ैसले में इसके साथ यह शर्त जोड़ दी गई है कि उसी एरिया का खेल का मैदान किसी दूसरी जगह पर दिया जाए।
सरकार ने मैदानों पर कब्ज़ा रोकने के लिए सख़्त रुख़ अपनाया है। कब्ज़ा चाहे किसी भी साल हुआ हो, उसे रेगुलर नहीं किया जाएगा। सरकारी फ़ैसले में यह भी कहा गया है कि किसी भी हालत में खेल के मैदान का रिज़र्वेशन नहीं बदला जाएगा।
हालांकि, अगर प्लानिंग अथॉरिटी को लगता है कि डेवलपमेंट प्लान में खेल के मैदान का रिज़र्वेशन कैंसिल करना ज़रूरी है, तो उसे उसी शहर में किसी दूसरी जगह उतने ही एरिया की ज़मीन खेल के मैदान के लिए रिज़र्व करनी होगी। उसके बाद राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी लेनी होगी।
अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, यह फ़ैसला इसलिए लिया गया है ताकि ग्राउंड के लिए रिज़र्व एरिया कम न हो। अधिकारी ने कहा कि युवाओं के लिए ग्राउंड बहुत ज़रूरी हैं और नई पीढ़ी की ज़रूरतों को देखते हुए यह एक अहम फ़ैसला है।
महाराष्ट्र में अभी 29 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, 232 म्युनिसिपल काउंसिल और 125 म्युनिसिपल पंचायत हैं। ग्राउंड के रिज़र्वेशन से जुड़े इस नियम का असर इन सभी लोकल सेल्फ़-गवर्नमेंट बॉडीज़ के अधिकार क्षेत्र पर पड़ेगा।
दूसरी तरफ़, NGO वनशक्ति के एनवायरनमेंटल एक्टिविस्ट डी. स्टालिन ने इस पॉलिसी की आलोचना की है। उनका कहना है कि एक एरिया के ग्राउंड के बदले दूसरे सबअर्ब में जगह देने का आइडिया गलत है। उन्होंने कहा कि हर एरिया में खुली जगहें उस एरिया के रहने वालों के लिए ज़रूरी होती हैं।
स्टालिन ने आरोप लगाया कि कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की नज़र खुली ज़मीनों पर है और सरकार नागरिकों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने कहा कि ज़मीनों के कमर्शियलाइज़ेशन की जल्दबाज़ी की वजह से शहरों की हालत खराब हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह फ़ैसला कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा। नागरिकों को अपने इलाके में बेहतर ज़िंदगी के अपने अधिकार के लिए मज़बूती से खड़ा होना चाहिए। स्टालिन ने साफ़ किया कि बच्चों के खेलने का अधिकार कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसका व्यापार किया जा सके।
इससे पहले 2025 में राज्य सरकार ने नगर निगमों और नगर परिषदों को महाराष्ट्र रीजनल प्लानिंग एंड टाउन प्लानिंग एक्ट के तहत कब्रिस्तानों के लिए डेवलपमेंट प्लान में किए गए रिज़र्वेशन को रद्द न करने का निर्देश दिया था। ऐसे रिज़र्वेशन को बदलना या रद्द करना होता, तो कैबिनेट की मंज़ूरी ज़रूरी थी। सरकार ने यह नियम तब लागू किया था जब कई रेजिडेंशियल कॉलोनियों ने यह स्टैंड लिया था कि वे अपने इलाके में कब्रिस्तान नहीं चाहते हैं।
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